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आदिवासि परम्परा के उत्सव गल चूल

झाबुआ : जिले के विभिन्न अंचलों में होली एवं धुलेंडी के अवसर पर मनाया जाने वाला आदिवासियों का परम्परागत उत्सव गल एवं चूल का आयोजन जिले में विभिन्न स्थानों पर सम्पन हुआ इस दौरान जिले के थांदला जनपद के ग्राम मछलाईमाता मंे हो रहे आयोजन के दौरान एक युवती की छेडखानी किये जाने के आरोप में युवती के रिश्तेदार ने लाठी से उस युवक का सिर फोड दिया घटना के बाद आयोजन जारी रहा।

जिले में मनाया जाने वाले गल एवं चूल उत्सव आदिवासि परम्परा के दो विभिन्न उत्सव है, जिनमें मन्नतधारी अपनी मन्नत पूरी हो जाने पर श्रद्धा के साथ इसमें सम्मिलीत होता है। इसके लिये मन्नतधारी को सात दिन तक शाकाहारी भोजन ग्रहण कर एवं सयमपूर्वक रहकर तथा आदिवासि परम्परा के नियमों का पालन करते हुवे। सात दिन तक रहना होता है। ये मन्नतधारी अपने शरीर पर हल्दी का लेपन तथा हाथ पांवों में मेहन्दी लगाकर एक सप्ताह तक अपने क्षेत्र में लगने वाले भगोरीया हाट में परिक्रमा करते है।

तब कहीं जाकर गल एवं चूल में भाग लेने योग्य समझे जाते है। चूल में करीब 25 से 30 फिट लम्बें बनाये गये गड्डे में अग्नि प्रज्वलित कि जाती है उन अंगारों पर मन्नतधारी नगे पैर चलते है। जबकी गल में 25 से 35 फिट बनाये गये लकड़ी के उंचे मचान पर मन्नतधारी को बांध कर घुमाया जाता है। (आज कल कहीं-कहीं ये मचान पक्के भी बना दिये गये है।) नीचे बड़ी संख्या में उपस्थित पुरूष ढोल मादल बजाकर नृत्य करते है एवं महिलाएं गल बाबा के गीत गाती है।

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