
हमीरपुर : उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जनपद में गोहांड विकास खंड क्षेत्र में 10 हजार साल पुरानी सभ्यता के अवशेष पुरातत्व विभाग के सर्वे में मिले हैं जिन्हें लेकर पुरातत्व विभाग के अधिकारी विश्लेषण में जुट गये हैं। इस पूरे इलाके की पुरातत्व की धरोहरें और अवशेषों की सूची तैयार करायी जा रही है।
उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग की बुन्देलखंड के क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे ने हमीरपुर जनपद के गोहांड विकास खंड क्षेत्र के प्रत्येक गांवों का पुरातात्विक सर्वे कराया है।
इसके लिये कई टीमें गठित की गयी थी। करीब एक माह तक पुरातात्विक सर्वे टीम ने पुराने किले, गढ़ी, मंदिर, मूर्तियों और टीलों की खोज की। सर्वे के दौरान 10 हजार वर्षों के पुराने पाषाण युग के उपकरण और अन्य पुरातात्विक अवशेष मिलने से अधिकारी दंग रह गये हैं। फिलहाल पुरातात्विक धरोहरों और अवशेषों को कब्जे में लेकर अध्ययन के लिये सील कर दिया गया है।
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे ने सोमवार को बताया कि गोहांड ब्लाक के तीन दर्जन गांवों में सर्वेक्षण के दौरान पुरानी मानव सभ्यता के मिट्टी के पके बर्तन, पत्थर का उपकरण, कौडिय़ां व अन्य अवशेष पाये गये हैं। ये हजारों साल पुराने हैं जो पुरातात्विक के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि इन अवशेषों और धरोहरों को लेकर शोध किया जायेगा। उन्होंने बताया कि इन गांवों से मिले पाषाण काल के इन उपकरणों और अवशेषों का मिलना पुरातत्व के लिये बहुत ही महत्वपूर्ण है।
25 हजार वर्ष पूर्व के पाषाणकालीन उपकरण भी मिले
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे ने बताया कि गोहांड ब्लाक के दगवां एवं मुसाही मौजा से पाषाण काल के उपकरण मिले हैं। इससे पहले पाषाणकाल के अवशेष कालपी की खुदाई में भी मिल चुके हैं। ये पाषाणकालीन उपकरण 25 हजार साल पुराने हैं। उन्होंने बताया कि हमीरपुर जिले के इस दुर्गम इलाके में इस तरह के अवशेषों को मिलना शोध का विषय बन गया है। इसके अलावा जमरा गांव के प्राचीन टीले की ग्रामसभा के सड़क निर्माण में की गयी खुदाई से 25 हजार साल पुराने मिट्टी के पके बर्तनों के अवशेष व पत्थर का बना एक अन्य उपकरण मिला है जिसका शोध किया जायेगा। उन्होंने बताया कि इसे कृष्ण लेपित मृदभाण्ड तथा काला व लाल प्रकार का मृदभाण्ड कहते हैं।
उत्तर मध्यकाल के मानव सभ्यता के भी मिले अवशेष
क्षेत्रीय पुरातात्विक अधिकारी झांसी डॉ. एसके दुबे ने बताया कि गोहांड विकास खंड के चिकासी, बरौली खरका, चंदवारी डांडा, घुरौली, बिलगांव, मंगरौठ, जिंगनी, पवई, अलकछवा, बड़ा, गड़हर, चक अमरपुरा, दंगवा, नहदौरा, अमगांव, सरसई, मुसाही मौजा, रावतपुरा, त्योतना, इटैलिया राजा, सिकरौंधा, खरका, रिहुंटा, चिल्ली, औता, टोला रावत, टीकुर, तुलसीपुरा, जमरा, बागीपुरा, महजौली, खरेहटा खुर्द, सिंगरावन आदि गांवों में सर्वेक्षण के दौरान पुरातत्व महत्व के अवशेष मिले है। इन गांवों में आदि मानव से लेकर उत्तर मध्यकाल तक के मानव सभ्यता के अवशेष पाये गये हैं जो पुरातत्व के लिये बेहद महत्वपूर्ण हैं। अब सभी धरोहरों को अध्ययन के लिये कब्जे में ले लिया गया है।
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