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कोरोना: अमेरिका की विमानन कंपनियों ने 50 अरब डॉलर का राहत पैकेज मांगा, भारत सरकार से भी लगाई गुहार

कोरोना वायरस से फैली महामारी को लेकर दुनिया भर की विमानन कंपनियां सेवाओं में कटौती कर रही हैं। इस बीच अमेरिका की विमानन कंपनियों ने सरकार से 50 अरब डॉलर के राहत पैकेज की मांग की हैं। वहीं भारत सरकार से भी तत्काल अगले छह महीने के लिये वैमानिक शुल्कों में 30 प्रतिशत की कटौती की मांग की।अमेरिका की विमानन कंपनियों के संगठन एयरलाइंस फॉर अमेरिका ने सोमवार को कहा कि मांग में अप्रत्याशित कमी आयी है और स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ते जा रही है। संगठन ने कहा कि यह 9/11 के आतंकवादी हमले के बाद उत्पन्न हुई स्थिति से भी बुरी है।

संगठन ने ऋण, राहत व कर छूट की मांग करते हुए कहा, ”यह आज की दिक्कत है, भविष्य की नहीं। इसके लिये तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। ट्रंप सरकार ने भी विमानन क्षेत्र की दिक्कतों को माना है और विमानन उद्योग को मदद के संकेत दिए हैं।

23 अरब डॉलर की नकदी की कमी होगी

संगठन के अध्यक्ष निकोलस कैलियो ने कहा कि अच्छी से अच्छी स्थिति में भी 2020 के अंत तक विमानन उद्योग के समक्ष 23 अरब डॉलर की नकदी की कमी होगी। यदि स्थिति खराब हुई तो यह कमी 53 अरब डॉलर पर पहुंच सकती है। उन्होंने कहा, ”आज के हिसाब से कहें तो स्थिति के खराब होने का ही अंदेशा है। यूरोपीय विमानन कंपनियां भी संक्रमण से पसरे संकट को देखते हुए सेवाओं में कटौती कर रही हैं।

उड़ान क्षमता में 75 प्रतिशत कटौती करेगी ब्रिटिश एयरवेज

ब्रिटिश एयरवेज तथा स्पेन की विमानन कंपनी आइबेरिया का स्वामित्व रखने वाली कंपनी आईएजी ने कहा कि वह अप्रैल-मई के दौरान उड़ान क्षमता में 75 प्रतिशत कटौती करेगी। जर्मनी की विमानन कंपनी लुफ्थांसा ने भी उड़ान क्षमता में 90 प्रतिशत तक की कटौती करने की घोषणा की है। ब्रिटेन की वर्जिन अटलांटिक ने कहा है कि उसने 75 प्रतिशत विमानों को खड़ा करने का निर्णय लिया है।

भारत सरकार से वैमानिक शुल्कों में छूट की मांग 

विदेशी विमानन कंपनियों के संगठन बोर्ड ऑफ एयरलाइंस रिप्रजेंटेटिव्स इन इंडिया (बीएएलआर) ने कोरोना वायरस के कारण उत्पन्न मंदी की स्थिति से उबरने के लिये सरकार से तत्काल अगले छह महीने के लिये वैमानिक शुल्कों में 30 प्रतिशत की कटौती की मांग की। संगठन ने विमानन सचिव प्रदीप सिंह खरोला से पिछले सप्ताह कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण से विमानन उद्योग पर बुरा असर पड़ रहा है।

यह उद्योग भारी दबाव में है। वैमानिक शुल्कों में मार्ग तथा टर्मिनल की दिशा बताने से जुड़ी सेवाओं के शुल्क शामिल होते हैं। एयर इंडिया पायलट यूनियन्स ने भी सोमवार को इन्हीं वजहों का हवाला देकर सरकार से तत्काल राहत की मांग की।  बीएएलआर 36 विदेशी विमानन कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है।

उड़ानों पर रोक से प्रभावित हुई माल ढोने की क्षमता

वैश्विक विमानन संगठन इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (आईएटीए) ने सभी देशों को आगाह किया है कि कोरोना वायरस को लेकर उड़ानों पर लगी रोक से दवाओं को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने की क्षमता प्रभावित हुई है। आईएटीए ने सोमवार को सभी देशों की सरकारों से आग्रह किया कि मालवाहक विमानों की उड़ानों में बाधाएं नहीं डाली जायें, ताकि आपूर्ति श्रृंखला बाधित नहीं हो और दवाओं की निर्बाध आपूर्ति जारी रहे।

संगठन ने कहा, ”यात्रा पर नाटकीय रुकावटें तथा यात्रियों की मांग कम होने से विमानों से माल की ढुलाई की क्षमता प्रभावित हुई है। आईएटीए के मुख्य कार्यकारी अलेक्जेंडर डी जुनियाक ने कहा, ”सरकारों द्वारा यात्रा पर रोक लगाये जाने से जनवरी अंत से अब तक दुनिया भर में 1,85,000 से अधिक यात्री उड़ानें रद्द की गयी हैं।उन्होंने कहा, ”इससे कार्गो क्षमता प्रभावित हुई है, जो कि ऐसे समय में काफी महत्वपूर्ण है।

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