
कोराना वायरस के बढ़ते खतरे के बीच यह खबर आई है कि चीन में कोरोना वायरस के संक्रमण के शिकार लोगों के इलाज के लिए बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक मुस्लिम कैदियों के अंगों को निकाला जा रहा है। चीन ने खुद स्वीकार किया है कि कोरोना वायरस का एक मरीज जो मरने की हालत में पहुंच गया था, उसे डबल ऑर्गर्न ट्रांसप्लान्ट के जरिए बचाया गया। 59 साल के इस मरीज को 24 फरवरी को दो अंगों का प्रत्यारोपण किया गया।
कहा जा रहा है कि चीन में अल्पसंख्यक उइगर मुसलमानों के अंगों को जबरन निकाला जा रहा है। जहां तक कोरोना वायरस का सवाल है, यह चीन के हुबेई प्रोविन्स के वुहान शहर से फैला और अब यह पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। दुनिया के सैकड़ों देशों के लाखों लोग कोराना के संक्रमण के शिकार हो चुके हैं, हजारों की संख्या में इससे मौत हो चुकी है और कई देशों ने इसे लेकर हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी है। लेकिन चीन में अंगों के अवैध व्यापार का संबंध सिर्फ कोरोना से नहीं है। वहां राजकीय संरक्षण में यह काम कई सालों से चल रहा है।
साल 2014 में चीन ने यह कहा था कि वह ऑर्गन ट्रांसप्लान्ट के लिए कैदियों की हत्या नहीं करता है, लेकिन भरोसेमंद सूत्रों के हवाले से मीडिया में खबरें आती रही हैं कि चीन में अवैध तौर पर ऑर्गन हार्वेस्टिंग प्रोग्राम चलाया जा रहा है। वहां कैदियों के महत्वपूर्ण अंगों को निकाल लिया जाता है और उन्हें मरने के लिए छोड़ दिया जाता है। यह बेहद क्रूरतापूर्ण है। इसका विरोध भी हो रहा है, लेकिन चीन ऐसा करने से बाज नहीं आ रहा है।
कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने के बाद इंग्लैंड के एक उबर चालक ने चीन में चल रहे ऑर्गन हार्वेस्टिंग का दिल दहला देने वाला खुलासा किया था। वह काफी समय तक चीन में डॉक्टर रह चुका था और उसने उइगर मुस्लिम कैदियों के अंगों को निकाला जाते और उनकी मौत होते खुद देखा था। अभी यह मामला फिर सुर्खियों में छाया हुआ है। देखें इससे संबंधित तस्वीरें।
यह खबर Asianet News Hindi से लिया गया हैं
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