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गर्भावस्था में थायराइड है गंभीर समस्या, जानें लक्षण और उपाय

अक्सर गर्भधारण के बाद थायराइड की समस्या महिलाओ में देखी जा सकती है ऐसी स्थिति में गर्भ में पल रहे बच्चे की वृद्धि और विकास मे परेशानी होती है और इसका समय रहते पाता लगाना और उपचार करना अत्यंत आवशयक हो जाता है। असल में हाइपोथायरोडिज्म अधिकतर महिलाओं को होता है, जिसमें थायराइड ग्लैंड उचित मात्रा में हर्मोन नहीं बना पाता है।

थायराड के कारण:

अधिकतर महिलाओं की हाइपोथायराडिज्म होता है,जिसमें थायराड ग्लैंड उचित मात्रा में हर्मोन नहीं बनाता, ऐसे में सही समय में इसका इलाज करना जरुरी है क्योंकि इसका सौ प्रतिशत इलाज संभव है। इससे पीड़ित महिलाओं में अनियमित माहवारी और गर्भधारण करने में मुश्किल महसूस होती है।

इसलिए गर्भधारण के तुरंत बाद टीएसएच की जांच करवा लेनी चाहिए,क्योंकि इसका प्रारंभिक लक्षण बहुत अधिक दिखाई नहीं पड़ता, इसलिए महिलाएं इसे नजरअंदाज करती है।

लक्षण:

इसके शुरूआती लक्षणों में कुछ इस प्रकार है की चेहरे पर सूजन, त्वचा में सिकुडन, ठंड सहन न कर पाना, अचानक तेजी से वजन का बढ़ना, कब्ज की परेशानी, मांस पेशियों में ऐठन आदि है।

ऐसा महसूस होते ही तुरंत डॉक्टर से मिलकर थायराइड स्क्रीनिंग अवश्य करवाएं। थायराइड के सही इलाज न होने से बच्चे में निम्न समस्या दिखाई पड़ सकती है।

बच्चे की मस्तिष्क का सही तरह से विकसित न होना, प्रीमेच्योर डिलीवरी होना, मृत शिशु का जन्म होना, बच्चे का वजन कम होना, दिल की धड़कन का तेज होना, उसका आई क्यू लेवल कम होना आदि है। इसलिए जब भी ऐसी शिकायत हो डौक्टर की तुरंत सलाह लेने की जरुरत होती है।

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