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जब रेप के दोषी को फांसी देने पर जल्लाद के बेटे को मिली थी सरकारी नौकरी

नई दिल्ली. निर्भया के दोषियों को 20 मार्च यानी शुक्रवार सुबह 5.30 बजे फांसी होनी है। तमाम कानूनी दांवपेच के बाद अब फांसी का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। निर्भया की वकील सीमा कुशवाहा ने गुरुवार को कहा, उन्हें यकीन है कि शुक्रवार को चारों दोषियों को फांसी होगी। यह पहला मामला नहीं है, जब किसी रेप के मामले में फांसी होगी। इससे करीब 16 साल पहले भी रेप के मामले में आखिरी फांसी दी गई थी।

कोलकाता में 15 साल की छात्रा के साथ रेप और हत्या के मामले में 2004 में दोषी धनंजय चटर्जी को फांसी दी गई थी। यह फांसी 14 अगस्त को सुबह 4.30 पर कोलकाता की अलीपुर जेल में दी गई थी। यह मामला 14 साल कोर्ट में चला था।

नहीं था कोई जल्लाद
धनंजय चटर्जी को अलीपुर की जेल में जब फांसी दी जानी थी, तो उस वक्त प बंगाल में कोई जल्लाद नहीं था। इससे कुछ महीने पहले ही जल्लाद मलिक नाटा रिटायर हो गए थे। सरकार ने फांसी देने के लिए उनसे दोबारा संपर्क किया।

नाटा ने सरकार के सामने रखी थी शर्त
नाटा सरकार की बात मानकर फांसी देने के लिए तैयार तो हो गए, लेकिन उन्होंने सरकार के सामने शर्त रखी कि उनके बेटे को सरकारी नौकरी मिले। सरकार इस शर्त पर तैयार हो गई। नाटा ने धनंजय को फांसी दी। धनंजय को 30 मिनट तक फांसी पर लटकाया गया था। मलिक नाटा का निधन 2009 में लंबी बीमारी के बाद हो गया था।

भारत में 2004 के बाद सिर्फ 4 को हुई फांसी

– धनंजय चटर्जी- 14 अगस्त 2004 (कोलकाता अलीपुर जेल)
– अजमल कसाब- 21 नवंबर 2012 (पुणे यरवदा जेल)
– अफजल गुरू- 09 फरवरी 2013  (दिल्ली तिहाड़ जेल)
– याकूब मेमन-  30 जुलाई 2015  (नागपुर सेंट्रल जेल)

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