

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार जो अपने यहां कोविड 19 के मामले कम होने की बात कर रही थी उसने ICMR-NICED (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कॉलरा एंड एंटरिक डिजीज) वायरस की खराब टेस्ट किट भेजने का आरोप लगाया है।
राज्य के स्वास्थ विभाग वे रविवार को ट्वीट कर कहा कि ICMR-NICED द्वारा सप्लाई किए गए खराब टेस्ट किट बार बार गलत नतीजे दे रहे हैं जिस कारण मरीजों के इलाज में देरी आ रही है। कोलकाता का ICMR-NICED स्वास्थ मंत्रालय के भीतर आने वाला रिसर्च सेंटर हैं और पूर्वी भारत का क्षेत्रीय वायरस रिसर्च डायग्नोस्टक लैब भी है।
NICED के निदेशक शांता दत्त ने बताया कि- इससे पहले जब किट की आवश्यकता होती थी, तो उन्हें कम मात्रा में आयात किया जाता था और एनआईवी, पुणे द्वारा वितरित किया जाता था। लेकिन जब मांग बढ़ने लगी तो ICMR ने किटों का आयात किया और उन्हें सीधे कोलकाता के NICED सहित 16 क्षेत्रीय केंद्रों में भेज दिया। फिर किट को राजकीय मेडिकल कॉलेजों में वितरित किया गया जहां उन्हें स्टैंडर्डाइज किया जाना आवश्यक था। समय और तकनीकी ज्ञान की कमी के कारण यह मानकीकरण नहीं किया जा रहा है।
राज्य में पहला कोविड -19 का मामला 17 मार्च को दर्ज किया था, लेकिन पिछले सप्ताह से प्रशासन ने यहां उच्च जोखिम वाले स्थानों को सील करना शुरू करना शुरू किया गया। विशेषज्ञों का आरोप है कि बंगाल देर से जागा है। वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ कुणाल सरकार के अनुसार, अगर टेस्ट की गति नहीं बढ़ाई गई तो ऐसे माइक्रो-स्पॉट की पहचान का कोई फायदा नहीं होगा। कुणाल ने कहा कि भारत में सैंपल टेस्ट की गति धीमी है और पश्चिम बंगाल में ये और भी धीमी है। हमें समझना होगा ये कम टेस्ट का कोई कॉम्पटीशन नहीं है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के रविवार शाम जारी आंकड़ों के अनुसार कोरोना संक्रमण के पिछले 24 घंटों में 1324 नए मामले दर्ज किए गए हैं। इसके साथ ही देश में महामारी से संक्रमित कुल रोगियों की संख्या 16116 हो गई है। वहीं पिछले 24 घंटे में 31 लोगों की जान गई है। इसके साथ ही देश में कुल मौतों का आंकड़ा 519 हो गया है।
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