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पाक की पूर्व राजनयिक का दावा, नवाज शरीफ ने भारत के लिए नरम रुख अपनाया

पाकिस्तान की एक पूर्व राजनयिक ने दावा किया है कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने भारत के प्रति नरम नीति अपनाई। इस नीति के तहत शरीफ ने विदेश मंत्रालय को भारत और मौत की सज़ा पाए कुलभूषण जाधव के खिलाफ बोलने से मना किया था। विदेश कार्यालय में 2013 से 2017 के बीच प्रवक्ता रहीं तसनीम असलम ने इस्लामाबाद के एक पत्रकार के यूट्यूब चैनल को दिए साक्षात्कार में रविवार (15 मार्च) को यह दावा किया।

असलम ने दावा किया, “नवाज़ शरीफ विदेश कार्यालय के जरिए भारत और जाधव के खिलाफ कुछ नहीं कहना चाहते थे।” जाधव (49) को पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने ‘जासूसी और आतंकवाद के आरोप में अप्रैल 2017 में मौत की सज़ा सुनाई थी। इसके बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय अदालत का रुख किया था और जाधव की मौत की सज़ा रोकने की मांग की थी।

पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसके सुरक्षा बलों ने मार्च 2016 में जाधव को बलूचिस्तान प्रांत से गिरफ्तार किया था, जहां वह कथित रूप से ईरान से गए थे। असलम ने कहा कि भारत के खिलाफ नरम नीति अपनाना मुल्क के लिए फायदेमंद नहीं हुआ। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री के भारत के साथ कारोबारी हित होने का आरोप लगाते हुए कहा, “इसने मुल्क को फायदा नहीं पहुंचाया लेकिन मुझे नहीं पता कि इसने उनके (शरीफ) हितों को फायदा पहुंचाया या नहीं।”

शरीफ परिवार के भारत समर्थक होने के सवाल पर उन्होंने कहा, “ हां, बिल्कुल।” असलम ने कहा कि शरीफ 2014 में भारत गए, तो उन्होंने हुर्रियत के नेताओं से मुलाकात नहीं की। उन्होंने कहा, “आमतौर पर, पाकिस्तान का हर प्रधानमंत्री हुर्रियत नेताओं से मिलता है, लेकिन जब शरीफ भारत गए तो वह उनसे नहीं मिले।” उन्होंने यह भी कहा कि शरीफ ने (2016 में) संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन में सिर्फ कश्मीर के बारे में बात की, जबकि भारत या जाधव का जिक्र नहीं किया।

असलम ने कहा कि कुछ नेताओं को लगता है कि भारत के प्रति तुष्टिकरण काम करेगा, लेकिन यह मुश्किल है। असलम पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ के शासनकाल के दौरान 2005 से 2007 तक भी विदेश कार्यालय की प्रवक्ता रहीं थी। वह 2017 में सेवानिवृत्त हो गई थीं।

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