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बेटी कोरोना संक्रमित, रेलवे अधिकारी पिता ने छिपाई जानकारी तो हुआ मुकदमा दर्ज

एक मरीज न जाने कितने लोगों को संक्रमित कर सकता है। यही मानते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग युद्ध स्तर पर मॉनीटरिंग कर रहा है। इस दौरान एक फर्जी सूचना देना रेलवे इंजीनियर को महंगा पड़ गया। उनके खिलाफ सदर थाने में आईपीसी की धारा 269 व 270 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। मुकदमे के आदेश डीएम प्रभु नारायण सिंह ने दिए थे।

मुकदमा जिला अस्पताल के डॉक्टर विनय कुमार ने दर्ज कराया है। उन्होंने तहरीर में लिखा है कि 12 मार्च को 12 संदिग्ध मरीजों के सैंपल अलीगढ़ भेजे गए थे। 11 की रिपोर्ट नेगेटिव आई। एक महिला को हाईली सस्पेक्टिड की श्रेणी में रखा गया था। उसकी रिपोर्ट नहीं आई थी। महिला का पति बंग्लुरु में कोरोना पॉजीटिव पाया गया था। इसलिए महिला पर नजर रखी जा रही थी। 13 मार्च को स्वास्थ्य विभाग की टीम महिला के रेलवे कालोनी स्थित घर पर पहुंची। उसके पिता रेलवे में इंजीनियर हैं।

उन्होंने आरआरटी टीम प्रभारी डॉक्टर अंशुल पारीक से कहा कि बेटी सुबह मंगला एक्सप्रेस से दिल्ली चली गई। वहां से फ्लाइट से बंग्लुरु जाएगी। यह सुनकर डॉक्टर अंशुल घबरा गईं। उन्होंने डीएम आगरा प्रभु नारायण सिंह से फोन पर रेलवे इंजीनियर की बात कराई। रेलवे इंजीनियर ने डीएम आगरा को भी यही जानकारी दी। डीएम आगरा ने इसे बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने तत्काल ट्रेन की लोकेशन पता करने को कहा। ताकि उसे रास्ते में रुकवाया जा सके। कोच में बैठे अन्य यात्रियों की जांच भी करानी पड़ेगी। यह बात उठने लगी। पूरे प्रकरण से उत्तर प्रदेश शासन के सचिव को भी अवगत कराया गया।

बाद में पता चला कि रेलवे इंजीनियर से भ्रामक सूचना दी थी। बेटी घर पर ही मौजूद थी। यह जानते हुए भी एक संक्रमित मरीज न जाने कितने लोगों को संक्रमित कर सकता है उन्होंने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भ्रामक सूचना दी। इसी आधार पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। रेलवे इंजीनियर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए डीआरएम को भी लिखा गया है।

क्या है धारा 269 व 270
आईपीसी की धारा 269 जो कोई व्यक्ति विधि विरुद्ध ऐसा कार्य करेगा जिससे किसी दूसरे का जीवन संकट में पड़ जाए। किसी रोग या संक्रमण फैलने की प्रबल आशंका हो। वह छह माह के कारावास और जुर्माने दोनों से दंडित किया जा सकता है।
धारा 270- जो कोई परिद्वेष से ऐसा कोई कार्य करेगा जिसे वह जानता है कि ऐसा करने से किसी का जीवन संकट में पड़ सकता है। संक्रमण फैल सकता है। वह दो वर्ष कारावास और जुर्माने दोनों से दंडित किया जा सकता है।

पुलिस को बुलाना पड़ा था
मरीज के बारे में सही सूचना नहीं देने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एसएसपी आगरा बबलू कुमार से संपर्क किया था। एसएसपी के निर्देश पर इंस्पेक्टर सदर कमलेश सिंह फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे थे। यह पूरा प्रयास और मशक्कत सिर्फ इसलिए था ताकि संदिग्ध मरीज को आईसोलेशन वार्ड में रखा जाए। वह पूर्णत: स्वस्थ न होने तक दूसरे लोगों से दूर रहे। कोरोना वायरस एक मरीज से ही दूसरे तक पहुंच रहा है।

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