Home / स्पॉट लाइट / यूपी बोर्ड परीक्षा: हाईस्कूल हिंदी का पेपर; और उत्तर में लिखा, ‘मैं तेरे इश्क में मर न जाऊं कहीं ‘

यूपी बोर्ड परीक्षा: हाईस्कूल हिंदी का पेपर; और उत्तर में लिखा, ‘मैं तेरे इश्क में मर न जाऊं कहीं ‘

आगरा(Uttar Pradesh ). यूपी बोर्ड की कांपियों का मूल्यांकन 2 अप्रैल तक टाल दिया गया है। कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए ऐसा फैसला लिया गया है। एक दिन हुए मूल्यांकन में हाईस्कूल के छात्रों द्वारा कांपियों की जांच के समय पूछे गए प्रश्नों के जवाब में अजीब से उत्तर दिए गए मिल रहे हैं।  किसी परीक्षार्थी ने प्रश्नों के उत्तर की जगह फिल्मी गाने लिख डाले हैं तो किसी ने अपने दर्द भरे फसाने लिखे हैं। किसी ने लिखा है कि प्लीज पास कर दीजिएगा नहीं तो जी नहीं पाऊंगी।

यूपी बोर्ड परीक्षा की कांपियों का मूल्यांकन शुरू होने के बाद बंद कर दिया है। पहले दिन हुए मूल्यांकन में छात्रों द्वारा लिखे गए उत्तर से परीक्षक भी हैरान हैं। हाईस्कूल के हिंदी के पेपर में छात्रों ने अजीबोगरीब उत्तर दिया है। किसी ने फिल्मी गाने लिखे हैं तो किसी ने अपनी गरीबी का हवाला देते हुए पास करने की अपील की है। उत्तर पुस्तिकाओं में एक छात्र ने कांपियों की जांच करने वाले टीचर्स से विनती किया है कि वह बहुत गरीब है। अगर वह पास नहीं हुई तो दोबारा नहीं पढ़ पाएगा। इसलिए उसे पास कर दिया जाए।

तुलसीदास के दोहे का अर्थ पढ़कर उड़े होश 
एक छात्र ने तुलसीदास के दोहे पुर से निकसी रघुवीर वधू के भावार्थ में लिखा है “तेरे जाने का गम और न आने का गम, और फिर जमाने का गम। इस बार तुम्ही आना ,इरादे फिर से न जाने का लाना। छात्रों द्वारा ऐसे उत्तर देखकर कांपियों की जांच  निरीक्षक भी हैरान हैं।

रसखान के दोहे की व्याख्या में लिखा ‘मैं तेरे इश्क में मर न जाऊं कहीं ‘
कांपियों की जांच कर रहे एक निरीक्षक को हाईस्कूल के हिंदी की कॉपी में फ़िल्मी गीत लिखा मिला। रसखान के एक दोहे के भावार्थ में लिखा गया उत्तर चौंकाने वाला था। कॉपी में लिखा गया था ‘मै तेरे इश्क में मर न जाऊं कहीं तू मुझे आजमाने की कोशिश ने कर, खूबसूरत है तू तो हूँ मैं भी हंसी मुझसे नजरें चुराने की कोशिश न कर।

यह खबर hindi.asianetnews.com  से लिया गया है

Check Also

“BEHIND THE SMOKE-SCREEN”: a book on Emergence of the National War Academy

This book running into 219 pages, authored by noted chronicler and researcher Tejakar Jha and ...