
सरकार व स्वयंसेवी संस्थाओं का सार्थक सहयोग
डॉ दिलीप अग्निहोत्री
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल रुग्ण व गरीब बच्चों को सहायता व शिक्षा के प्रति प्रेरणा देती है। ऐसे अनेक कार्यक्रमों में वह स्वयं सहभागी भी होती रही है। कोरोना आपदा व लॉक डाउन के समय उनके दिशा निर्देश में राजभवन से भी अनेक राहत कार्यों का संचालन किया गया। उन्होंने राजभवन बागवानी की सब्जियों का स्वयं जरूरतमन्दों में वितरण किया। इसके अलावा टी बी बीमारी से पीड़ित बच्चों गरीब बच्चों को गोद लेने व उनकी चिकित्सा कराने का अभिनव सेवा कार्य उन्हीं की प्रेरणा से प्रारंभ किया गया। इसके अनेक सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे है।

स्वयं सेवी संस्थाओं की भूमिका
आनन्दी बेन पटेल पिछले कई दशकों से समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय रही है। इस संबन्ध में उनके व्यापक अनुभव रहे है। गुजरात में वह कैबिनेट मंत्री व मुख्यमंत्री रही है। स्वयं सेवी संस्थाओं व सरकार की टीम के बीच सकारात्मक सामंजस्य के विषय में भी उनको वव्यवहारिक जानकारी है। इसी आधार पर उन्होंने लखनऊ राजभवन के एक कार्यक्रम में उपयोगी विचार दिया। राज्यपाल ने कहा कि कोरोना के समय स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा अच्छा कार्य किया गया है। इसका कारण था कि सरकार तथा उसकी टीम के साथ साथ जनता द्वारा भी सहयोग किया गया। वाराणसी में स्वयं सेवी संस्थाओं के माध्यम से सूची बनाकर कुपोषित एवं क्षय रोग ग्रसित बच्चों को गोद लेकर उसकी देखभाल की गयी। ऐसे बच्चों को अनेक अधिकारियों द्वारा गोद लिया गया तथा उचित देखभाल एवं पोषण के कारण अनेक बच्चे स्वस्थ भी हो गये हैं, ये एक बहुत अच्छी पहल है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार से सभी जिलों के अधिकारियों को इस पुनीत कार्य में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए वे प्रभावित बच्चों तथा उनके माता पिता से मिलें,संवाद बनाये रखें तथा उनकों मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास करें उनके लिये फल, मिठाई आदि लेकर उनके घर जायें इस प्रकार वे भावनात्मक रूप से जुड़ेंगे और छह सात माह में अनेक बच्चे टी बी से बाहर निकल जायेंगे।

अभियान का शुभारंभ
आनंदीबेन पटेल ने दो जनवरी से बारह जनवरी तक चलने वाले सक्रिय क्षय रोग खोज अभियान का राजभवन से शुभारम्भ किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और देश को टी बी मुक्त बनाना है। इसके लिये हमें वृद्धाश्रम,नारीगृह, कारागार,मलिन एवं श्रमिक बस्तियां, आंगनवाड़ी केन्द्र तथा प्राथमिक विद्यालयों में क्षय रोग से ग्रसित मरीजों को गंभीरतापूर्वक चिन्हित करना होगा। उन्होंने कहा कि यह गम्भीर बीमारी है। यह हम सभी के लिये चुनौती बनी हुई है। इसे हराने के लिये हमे सुनियोजित तरीके से कार्य योजना बनानी होगी।
मदद की मानीटरिंग
राज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार द्वारा दी जारी मदद पीड़ित बच्चों तक शत प्रतिशत पहुंचनी चाहिए। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि अभियान के तहत प्रभावित परिवारों को जो आर्थिक मदद दी गयी है और लगातार दी भी जा रही है फिर भी अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आ रहे हैं। अतः दी जाने वाली मदद की मानीटरिंग भी समय समय पर करें ताकि आर्थिक मदद का उपयोग कुपोषित या टी बी ग्रस्त बच्चों को ही मिले। उचित होगा कि इस कार्य से ग्राम प्रधानों को भी जोड़ा जाय। ग्राम प्रधानों को जिम्मेदारी दें तथा उन्हें मेरा गांव स्वच्छ गांव,मेरा गांव स्वस्थ गांव तथा मेरा गांव समृद्ध गांव की भावना के लिये प्रेरित करें। उनकी प्रेरणा एवं प्रोत्साहन से इस अभियान को गति तथा नयी दिशा मिलेगी।
राज्यपाल ने कहा कि हमारा प्रयास होना चाहिए कि किसान, गरीब,महिलाएं एवं बच्चे सभी इस अभियान से जुड़े।
गम्भीर है प्रदेश सरकार
आनन्दी बेन पटेल ने मुख्यमंत्री द्वारा इस दिशा में किये गये प्रयासों की तारीफ की और अधिकारियों को 2025 तक टी बी मुक्त प्रदेश बनाने के लिये हर स्तर पर कड़ी मेहनत करने के निर्देश दिये। इस अवसर पर चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जय प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में ये अभियान घर घर चलाया जायेगा ताकि एक भी टीबी रोग से ग्रसित व्यक्ति छूटने न पाये। चिन्हीकरण के पश्चात उनके समुचित जांच एवं उपचार की व्यवस्था की गयी है। ताकि प्रदेश टी बी प्रदेश सरकार ने इसे गंभीरता से लिया है। कोविड के कारण इसके कार्य की गति प्रभावित हुई थी लेकिन अब सक्रिय मरीज चिन्हीकरण के कार्य में गति आयी है।
अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों में डिजिटल लांचिंग के माध्यम से बारह जनवरी तक टीबी रोग से ग्रसित रोगियों का चिन्हीकरण अभियान चलेगा।
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