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वैज्ञानिकों का कहना, वातानुकूलित कमरे, बसों में ज्यादा घातक साबित हो रहा कोरोना

बीजिंग :  कोरोना वायरस किन जरियों से तेजी से फैल रहा है, इस लेकर अभी भी वैज्ञानिकों में आम राय नहीं बन पा रही है। एक नई स्टडी में सामने आया है कि एयर कंडीशंड बसों, मेट्रो या अन्य वाहनों में कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति के साथ सफ़र करना आपको काफी भारी पड़ सकता है। ये स्टडी कोरोना से संक्रमित उन लोगों पर की गई है जो कि एक बस यात्रा के बाद संक्रमित पाए गए थे।

एक रिपोर्ट के मुताबिक वातानुकूलित जगह कोरोना के हवा के जरिए फैलने में मददगार हैं। खोज के मुताबिक वातानुकूलित जगहों पर कोरोना 30 मिनट तक जिंदा रह सकता है, जबकि 4.5 मीटर तक फैलने में भी सक्षम है। इस खोज के बाद अब दुनिया भर में सार्वजनिक परिवहन के वातानुकूलित साधनों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन के हुनान प्रांत में कोरोना के संपर्क में आए 15 से ज्यादा लोगों पर इस रिसर्च को अंजाम दिया गया।

ये सभी एक वातानूकूलित बस के जरिए यात्रा कर रहे थे। इस बस में मौजूद बिना मास्क वाले सभी लोगों को एक शख्स के जरिए कोरोना वायरस हो गया था। दरअसल कोरोना से पीड़ित इस व्यक्ति ने एक और शटल बस में यात्रा की और वहां भी मौजूद बिना मास्क वाले 2 लोगों को कोरोना हो गया।

चौंकाने वाली बात ये है कि इनमें से कुछ लोग इस व्यक्ति के बस में उतरने के 20 और 30 मिनट बाद बस में चढ़े थे, लेकिन एयर कंडीशंड की वजह से कोरोना नष्ट नहीं हुआ। इसी से साबित हुआ कि ये वायरस वातानुकूलित जगहों पर 30 मिनट से भी ज्यादा जिंदा रह सकता है। इसके अलावा बस में संक्रमित व्यक्ति से 4.5 मीटर दूर बैठे लोग भी इससे बच नहीं पाए। वैज्ञानिकों का कहना है कि बंद वातावरण जैसे वातानुकूलित कमरे, बस या मेट्रो में ये वायरस अपेक्षाकृत ज्यादा घातक स्तर पर फ़ैल रहा है।

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