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‌”स्वयं ईमानदार होने से भ्रष्टाचार रुकता है, उपदेश देने से नहीं”


‌ ‌”सिस्टम के संचालक पर निर्भर होती है सिस्टम की पारदर्शिता”: प्रधान आयकर आयुक्त

इफको में सतर्कता जागरूकता सप्ताह का उद्घाटन

दयाशंकर त्रिपाठी

प्रयागराज

‌” किसी भी संस्था, समाज और देश की सत्यनिष्ठा ईमानदारी से उसे चलाने वाले पर निर्भर करती है, न कि सिस्टम पर। सिस्टम बहुत पारदर्शी बनाए जाने पर भी भ्रष्टाचार कदाचार नहीं रुक सकता है जब तक कि उसका संचालक स्वयं ईमानदार एवं सत्य निष्ठ नहीं होगा। इसलिए सतर्कता और जागरूकता की  जरूरत संचालक को होनी चाहिए न कि उसके पालन करने वालों पर।”

यह बात इलाहाबाद मंडल के प्रधान आयकर आयुक्त सुवचन राम ने इंडियन फार्मर फ़र्टिलाइज़र फूलपुर इकाई में सतर्कता जागरूकताअभियान कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कही ।

‌मुख्य अतिथि श्री राम ने कहा कि कभी-कभी किसी बात पर हम ज्यादा सतर्क होकर सोचते हैं, जबकि दैनिक जीवन में हमें सदैव सतर्क रहना चाहिए। हमारी ईमानदारी और सत्यनिष्ठा आर्टिफिशियल है या ओरिजिनल, इस पर भ्रष्टाचार का जन्म होता है। मनुष्य जब पैदा होता है तो वह अपनी मां के  सानिध्य में रहता है जिसका असर खराब या अच्छा उसकी मां के आचरण और व्यवहार से पड़ता है। लेकिन जैसे ही वह बड़ा होता है, समाज का असर और वातावरण का प्रभाव पढ़ने लगता है। इसलिए उसके ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठा पर समाज के वातावरण और सिस्टम का प्रभाव दिखाई पड़ता है। ईमानदारी सिस्टम का सबसे नैतिक और मजबूत हथियार था, लेकिन उसमें भ्रष्टाचार डिशऑनेस्टी समाज और सिस्टम को संचालन व करने वाले लोगो ने डाल दिया जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला।

उन्होंने कहा कि पहले सत्य निष्ठा होनी चाहिए, ईमानदारी अपने आप आ जाएगी। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार आवश्यकता के कारण से पनपती है। भारत में भ्रष्टाचार का कारण ‘नीड बेस’ है जो बाद में ग्रीड बेस  हो गया।श्री राम ने कहा 113 देश विकासशील देश की श्रेणी में आते हैं जिसमें भारत भी है भ्रष्टाचार विकासशील देशों में ही अधिक होता है क्योंकि वहां सामाजिक सुरक्षा नहीं है जबकि विकसित देश में भ्रष्टाचार बहुत कम इसलिए है कि वहां सामाजिक सुरक्षा उस देश के सिस्टम और सरकार द्वारा दी गई है इसलिए वहां भ्रष्टाचार करने की आदमी की आदत या जरूरत नहीं होती है।


‌विकासशील देशों में शिक्षा स्वास्थ्य आवास की चिंता नागरिकों की नहीं रहती उसकी जिम्मेदारी सरकार ही होती है लेकिन भारत में सामाजिक सुरक्षा की गारंटी ना होने के कारण यहां काम करने वाले लोग अपने बच्चे की शिक्षा के खर्च रहने के मकान और स्वास्थ्य के प्रति सदैव सतर्क रहते हैं और उसका संग्रह करने की कार्य पद्धति अपनाते हैं।

‌प्रधान आयकर आयुक्त ने कहा की भारत में उपदेश की संस्कृति बहुत अधिक है लेकिन उपदेश देने वाला दूसरे को तो देता है लेकिन स्वयं में नहीं । जबकि जो उपदेश दूसरों को देता है पहले उसे स्वयं को पालन करना चाहिये।


मुख्य अतिथि ने कहा कि हमारे देश का हर व्यक्ति अपने बच्चे को आईएएस इंजीनियर डॉक्टर बनाना चाहता है लेकिन उस का बचपना छीन लेता है। सोचने वाली बात यह है कि हम देश को किस संस्कृत में ले जाना चाहते हैं। हम संयुक्त समाज बनाना  चाहते  हैंयाउपभोक्तावादी समाज बनाना चाहते हैं? उपभोक्तावादी समाज बनाने में भ्रष्टाचार निश्चित रूप से पैदा होगा और पिता की मृत्यु पर विदेश में काम करने वाला लड़का दाह संस्कार में शामिल नहीं हो सकेगा। क्योंकि पैसा उसके लिए महत्वपूर्ण है माता-पिता नहीं। संस्कार और मानवीय संवेदना और संबंधों वाला संस्कार और कमर्शियल संसार में यही। सबसे बड़ा अंतर है हम सब से गंदे और खराब व्यक्ति को कभी कभी महान व्यक्ति मान लेते हैं और उसके गुण और दुर्गुण पर जागरूक नहीं रहते जिससे देश में व्यभिचार और भ्रष्टाचार पनपता है अपने 1 घंटे के सारगर्भित उद्घाटन भाषण में प्रधान आयकर आयुक्त ने कहा कि हमारे देश में सबसे बड़ी विडंबना यह है कि हम मलेरिया की दवा करते हैं लेकिन मलेरिया कहां से पैदा हुआ उसकी जड़ पर प्रहार नहीं करते जिससे वक्ती तौर पर तो मलेरिया ठीक होगा लेकिन जड़ से खत्म नहीं होता है हमको उसके जड़ पर जहां से मलेरिया उत्पन्न होती है प्रहार करना चाहिए फिर चाहे भ्रष्टाचार हो या देश में फैली कुप्रथाएं। यह तभी संभव है जव दैनिक जीवन में सतर्क और जागरूक रहें।

इफको के वरिष्ठ महाप्रबंधक एम मसूद ने इस अवसर पर कहा कि हमारी संस्था में विजिलेंस अधिकारी नियुक्त है जो हमें समय-समय पर समय-समय पर सतर्क करता है और सिस्टम को सही रखने का प्रयास करता है लेकिन उन्होंने कहा कि यदि सिस्टम और इंस्टिट्यूशन ही भ्रष्ट हो जाए तो कोई क्या कर सकता है उन्होंने कहा कि सभी धर्मों में एक बात अस्पष्ट है कि मनुष्य पैदा होता है तो ईश्वर उसका भाग्य बना कर भेजता है कि उसे क्या मिलना है जीवन में और क्या बनना है और यही संसार रूपी परीक्षा गृह में परीक्षा देते समय भ्रष्टाचार से भाग्य को बदलना चाहता है तो यह उसकी भूल है और यदि वह भ्रष्टाचार से अधिक पैसे बना भी ले तो भी वह सुखी नहीं रह सकता इसलिए ईमानदारी और सत्य निष्ठ हो करके ही काम करना चाहिए तभी उसका जीवन सुखी रह सकता है।


महाप्रबंधक कार्मिक एवं प्रशासन संजय कुदेशिया संयुक्त महाप्रबंधक यूसी दुबे ने मुख्य अतिथि और सभागार में उपस्थित सभी को कर्मियों का स्वागत करते हुए सतर्कता जागरूकता कार्यक्रम के बारे में प्रकाश डाला कार्यक्रम का संचालन मुख्य प्रबंधक सिस्टम संतोष शुक्ला ने किया तथा मुक्त सतर्कता अधिकारी पीके शर्मा में धन्यवाद आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर संयुक्त महाप्रबंधक जीके गुप्ता, गिरधर मिश्रा, आरआर नारायणा सहित सभी विभागाध्यक्ष, उप महाप्रबंधक अजीत सक्सेना, आरती, आर्मी माहिती तथा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष रामसूरत पटेल, महामंत्री विनय यादव तथा मीडिया कर्मी उपस्थित थे

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