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“एक वर्ष में देश के बारह सौ से ज्यादा उच्च शिक्षण संस्थानों ने स्किल इंडिया से जुड़े कोर्सों की शुरुआत की है”

नई शिक्षा नीति से सार्थक सुधार

डॉ दिलीप अग्निहोत्री
नई शिक्षा नीति में ज्ञान के साथ ही कौशल विकास का भी समावेश किया गया। विद्याथियों के समग्र विकास के इस मनोविज्ञान को समझने का प्रयास पहली बार हुआ है। वर्तमान केंद्र सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक सुधार किए हैं। इसके दृष्टिगत गत वर्ष नई शिक्षा नीति लागू की गई थी। विगत एक वर्ष में इस दिशा में प्रभावी प्रगति हुई है, जबकि इस अवधि में कोरोना संकट का प्रकोप रहा। इससे शिक्षण संस्थाओं को बंद करना पड़ा था। फिर भी बड़ी संख्या में शिक्षाविदों एवं अनेक विश्वविद्यालयों ने नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन का उल्लेखनीय कार्य किया है।

विगत एक वर्ष में देश के बारह सौ से ज्यादा उच्च शिक्षण संस्थानों ने स्किल इंडिया से जुड़े कोर्सों की शुरुआत की है। ग्यारह भाषाओं में इंजीनियरिंग की पढ़ाई संभव होगी। ग्यारह अन्य भाषाओं में इंजीनियरिंग के कोर्स का अनुवाद शुरू हो चुका है। मातृभाषा में पढ़ाई से गरीबों का बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। प्रारंभिक शिक्षा में भी मातृभाषा को देने का काम शुरू हो गया है। यह माना गया कि किसी भी देश की शिक्षा व्यवस्था वहां के परिवेश के अनुकूल होनी चाहिए। इसमें उसकी भाषा,सभ्यता,संस्कृति, सामाजिक मूल्यों को समुचित स्थान मिलना चाहिए। ऐसी शिक्षा नीति ही राष्ट्रीय स्वाभिमान का जागरण करती है। अंग्रेजों द्वारा भारत में शुरू की गई शिक्षा राष्ट्रीय स्वाभिमान को हीनता में बदलने वाली थी। शिक्षा केवल बाबू बनाने के लिए थी।


यह भारतीय परिवेश के अनुकूल नहीं थी। वर्तमान सरकार ने इस तथ्य को पहचाना। इसके अनुरूप सुधार किए गए है। भारत में तो जीवन का अंतिम लक्ष्य मोक्ष बताया गया। उसी के अनुरूप सभी कार्यों का संदेश दिया गया। आधुनिक युग में होने वाले सकारात्मक बदलाव की स्वीकार करना अनुचित नहीं। लेकिन यह सब अपनी महान विरासत के प्रतिकूल नहीं होना चाहिए। वर्तमान सरकार ने इस दिशा में कदम उठाया है। तीन दशकों बाद केंद्र में शिक्षा नाम प्रतिष्ठित हुआ। मानव संसाधन इसका विकल्प नहीं था। शिक्षा स्वयं में बहुत व्यापक अनुभूति का शब्द है। व्यक्ति समाज व राष्ट्र के सम्पूर्ण संचालन को यह प्रभावित करने वाला शब्द है। नाम में सुधार के साथ समय के अनुकूल व्यापक सुधार किए गए है।

अगले दशक तक पूर्व विद्यालय से माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा का सार्वभौमिकरण किया जाएगा। स्कूल से दूर रह रहे दो करोड़ बच्चों को फिर से मुख्य धारा में लाया जाएगा। प्राथमिक शिक्षा में बड़े बदलाव किए गए। स्कूली पाठ्यक्रम को व्यवहारिक बनाया गया है। बुनियादी योग्यता को महत्व दिया गया। क्लास छह से व्यावसायिक शिक्षा प्रारंभ हो जाएगी। पांचवीं कक्षा तक मातृभाषा क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई होगी। उच्च शिक्षा में अवसर बढ़ेंगे। पाठ्यक्रम में विषयों की विविधता होगी। नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश प्रमुख है। राज्यपाल आनन्दी बेन पटेल,मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा स्वयं इस कार्य में दिलचस्पी लेते रहे है। समय समय पर क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। संबंधित अधिकारियों व शिक्षण संस्थानों को दिशा निर्देश दिए गए।

उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा के पास उच्च शिक्षा विभाग का भी दायित्व है। उन्होंने शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार और मेधावी छात्रों को प्रोत्साहित करने संबन्धी योजनाओं का शुभारंभ किया। इस दौरान दस हजार शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा।ढाई हजार राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कैरियर परामर्श एवं मार्गदर्शन दिया जाएगा। तीस विद्यालय में स्मार्ट क्लास का संचालन किया जाएगा। छात्रों के लिए एक हजार स्टडी टेबल का वितरण किया जाएगा। कार्यक्रम में अनेक मेधावी छात्रों को टेबलेट वितरित किए गए। डॉ दिनेश शर्मा ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर दिया गया है। रोजगार परक शिक्षा पर फोकस किया गया है। जिससे बच्चे पढ़ाई के दौरान ही विद्यार्थी स्वावलंबी बन सकते है। बच्चों में प्रारंभ से ही नैतिकता के विकास पर ध्यान दिया गया। पहले इस महत्वपूर्ण तथ्य को नजरअंदाज किया गया। शिक्षा में शोध, प्रोफेशनल कोर्सेज, टीचर्स के प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में शिक्षण संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका का निर्धारण किया गया है। आदिकाल से गुरु अथवा शिक्षक की भूमिका को अत्यधिक महत्व दिया गया। शिक्षण संस्थान की भौतिक सुविधाओं से अधिक महत्व शिक्षक की योग्यता का रहता है। उसके मार्ग दर्शन से विद्यार्थी को सर्वाधिक लाभ मिलता है। यहीं से उसे जीवन को सकारात्मक मार्ग पर चलाने की प्रेरणा मिलती है। डॉ दिनेश शर्मा ने कहा कि शिक्षक की गुणवत्ता में कमी होगी तो हजारों विद्यार्थियों का नुकसान करेगा। उनका भविष्य खराब हो जाएगा। इसके लिए शिक्षकों का नियमित रूप से प्रशिक्षण भी आवश्यक है। विगत साढ़े चार वर्षों के दौरान उत्तर प्रदेश ने शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। विश्व के कई बड़े विश्वविद्यालय प्रदेश में अपने संस्थान खोलने की योजना बना रहे हैं। दुनिया के बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों में संस्कृत पर शोध किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में पहले माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षाएं महीनों तक चलती थीं। अब हाईस्कूल की बोर्ड परीक्षा बारह दिनों में व इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा पन्द्रह दिनों में संपादित कराई जा रही हैं। वर्तमान सरकार माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को गुणवत्ता परक शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए दृढ़ संकल्प है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार विद्यार्थियों को माध्यमिक स्तर की शिक्षा के साथ।साथ कौशल विकास आधारित शिक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया है। निजी क्षेत्र के शैक्षिक संस्थाओं द्वारा किए जा रहे नवाचार तकनीकी विशेषज्ञता और निवेश की उपलब्धता से प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा की गुणवत्ता में उन्नयन होगा। विद्यार्थियों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए एनसीईआरटी के अनुरूप पाठ्य पुस्तकें लागू की गई हैं। प्रदेश की माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षण के न्यूनतम दो सौ बीस दिवस निर्धारित किए गए हैं। जिससे शिक्षण अवधि में शिक्षक विद्यालयों में लगातार उपस्थित रहे। विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित ना हो। वर्तमान सरकार ने परीक्षा अवधि को कम किया है।

परीक्षा केंद्रों की संख्या सीमित करने और पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण में सुगमता लाई गई है। प्रदेश के समस्त जनपदों में क्रमांक की उत्तर पुस्तिकाओं की व्यवस्था,परीक्षा केंद्रों पर वॉइस रिकॉर्डर युक्त सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था,राज्य स्तर पर बनाए गए कंट्रोल रूम से लगभग दो लाख सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से सभी केंद्रों की निगरानी की व्यवस्था की गई। माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा नकल विहीन परीक्षा संपन्न कराई जा रही है। पारदर्शी और नकल विहीन बोर्ड परीक्षाओं हेतु ऑनलाइन केंद्र निर्धारण की व्यवस्था की गई है। कक्षा नौ व ग्यारह के छात्र छात्राओं का आधार लिंक ऑनलाइन अग्रिम पंजीकरण विद्यालयों को ऑनलाइन मान्यता के माध्यम से व्यवस्था को पारदर्शी बनाया गया है। वर्तमान प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश के राजकीय एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों में लगभग बीस हजार शिक्षकों का चयन एवं पदस्थापन पारदर्शी एवं ऑनलाइन प्रणाली से किया गया। पहली बार ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से राजकीय हाई स्कूल इंटर कॉलेजों में कार्यरत अध्यापकों का स्वच्छ एवं पारदर्शी तरीके से स्थानांतरण किया गया। मेधावी विद्यार्थियों को स्नातकोत्तर स्तर तक शिक्षा ग्रहण करने हेतु पंडित दीनदयाल उपाध्याय विशेष छात्रवृत्ति तथा बोर्ड परीक्षाओं में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रथम बार एक लाख रूपये,एक टेबलेट व प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। इसी प्रकार उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रयागराज की हाई स्कूल इंटरमीडिएट परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त मेधावी विद्यार्थियों को उनकी इच्छा अनुसार लोक निर्माण विभाग के माध्यम से गौरव पथ संपर्क मार्ग के निर्माण का प्रावधान किया गया है। प्रदेश के निजी विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों से दी जाने वाली फीस को विनियमित करने के लिए उत्तर प्रदेश स्वतंत्र विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम लागू किया गया है। कोरोना के दृष्टिगत लगातार दो वर्षों से कोई भी शुल्क वृद्धि नहीं की गई।

वर्तमान सरकार के कार्यकाल में लगभग ढाई सौ नए स्कूलों की स्थापना की गई। जिनमें डेढ़ सौ से अधिक दीनदयाल राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज की स्थापना की गई है।राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में वृद्धि हुई है। वर्तमान सरकार द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि एवं उनमें सुदृढ़ता लाने के उद्देश्य से व्यापक सुधार किए जा रहे हैं।

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