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“शलभ” साहित्यिक संस्था का साठवा “स्थापना समारोह”

*शलभ साहित्यिक संस्था का साठवा “स्थापना समारोह*

शलभ साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था का साठवा स्थापना दिवस समारोह नया बैरहना में आयोजित किया गया।

रविवार को काव्यगोष्ठी एवं संगीता भाटिया के साठवें जन्मदिन की अध्यक्षता देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव ‘देवेश’ ने की जबकि मुख्य अतिथि शिक्षाविद हेमलता भाटिया थी। संचालन शंभुनाथ त्रिपाठी ‘अंशुल’ नें किया ।

काव्यपाठ करते हुऐ रचना सक्सेना नें कहा आज फिर आँखों में नमी सी है/ सब कुछ मिला फिर भी कमी सी है संगीता भाटिया की यह पंक्तियाँ सराही गयी कि नम्र पलों पर चलके नक्श – ऐ- कदम नही बनतें /पत्थरों को कुचल, काँटों से उलझ फिर देख तेरे पाँवों में छालें होगें और राह पर नक्श-ऐ-कदम। संजय सक्सेना नें कहा दर्द नही होता अब भूखों को देखकर मैं जमाना हूँ यह रोज़मर्रा की बात हैं। देवयानी की भावपूर्ण कविता का तेवर काबिले तारीफ था- जीवन का सिगरेट सुलगकर बस हाथ में थोड़ा बचा है जिसे दो उंगलियों नें थोड़ा बचाकर पकड़ रखा हैं। ज्योतिर्मयी नें कहा – बनारस में लिखा है संस्कृति संस्कार और परम्परा का गठबंधन। संचालन करते हुऐ अंशुल नें रामलीला के पात्रों पर कविता सुनाई अध्यक्षीय काव्यपाठ में शलभ के अध्यक्ष देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव नें सुनाया स्वच्छ तन हो स्वच्छ मन हो स्वच्छ हो निज आचरण, स्वच्छ धरती स्वच्छ गगन हो स्वच्छ हो पर्यावरण, मुख्य अतिथि पूर्व उपशिक्षा निर्देशक हेमलता भाटिया नें कहा कि इस प्रकार के साहित्यिक आयोजन समाज के नवनिर्माण, हर क्षेत्र के उन्नयन में सहायक होते हैं।

अंत में धन्यवाद ज्ञापन संयोजक राकेश भाटिया नें किया ।जनकवि प्रकाश, संदीप पाण्डेय आदि रहे।

 

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