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बुद्ध दार्शनिक न होकर दृष्टा हैं: राज्यपाल

“बुद्धिज़्म की बातें” पुस्तक का विमोचन किया राज्यपाल ने। पुस्तक लिखी है सांसद डा. संघमित्रा मौर्य व पत्रकार दीपक के.एस ने संयुक्त रूप से 

बुद्ध धर्म ही इकलौता ऐसा धर्म है जो भारत के बाहर गया :

आनंदी बेन पटेल

लखनऊ।

भगवान तथागत बुद्ध के संदेश अर्थात शील, शांति, मैत्री, दया व करुणा के भाव को समाहित किये और सरलतापूर्वक मानव जीवन को सफल बनाने के उद्देश्य से, लेखकद्वय डा. संघमित्रा मौर्य व दीपक के.एस. द्वारा रचित पुस्तक “बुद्धिज़्म की बातें” का विमोचन उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल ने किया।

इस अवसर राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री जी भी कहते हैं कि हमें युद्ध नहीं बल्कि बुद्ध चाहिए। बुद्ध धर्म ही इकलौता ऐसा धर्म है जो भारत के बाहर गया और कई देशों में स्थापित हुआ। चूंकि, बुद्ध के पीछे तर्क था, इसलिए वह नास्तिक को धार्मिक बनाने का महती कार्य कर पाए। बुद्ध ने महानास्तिकों और असामाजिक तत्वों को भी सरलता से अपनी ओर आकर्षित किया है, इसलिए वह दार्शनिक न होकर दृष्टा हैं।

स्वामी प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार), ने कहा कि बुद्ध ने कर्म को ही प्रधान माना है और स्वयं के भीतर परमार्थ – प्रज्ज्वल दीपक के मार्ग पर अग्रसर होने का मूलमंत्र प्रदान किया है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मुख्य महंत, भगवान बुद्ध महापरिनिर्वाण स्थल, कुशीनगर के परमपूज्य अग्गमहापण्डित भदंत ज्ञानेश्वर जी ने कहा कि समाज में व्याप्त पाखंड, रुढ़िवादी विचारधारा, अराजकता और अज्ञानता रूपी विष को धारण कर बुद्ध ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसे प्रतिष्ठा दी है। तथागत बुद्ध की दया व करुणा अंत तक निर्विघ्न बनी रहे ताकि अंतर्मन का यह दीपक जलता रहे।

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