
इलाहाबाद संग्रहालय में आज 1 जून 2025 को संग्रहालय, भाषा संगम प्रयागराज, केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान चेन्नई एवं द हिंदू तमिल दिसे दैनिक चेन्नई के संयुक्त तत्वावधान में तमिल के संत कवि तिरुवल्लुअर और उनकी रचना तिरक्कुरल पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया।

दीप प्रज्जवलन, तिरुवल्लुवर वंदना व पुष्पांजलि से कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। निदेशक संग्रहालय श्री राजेश प्रसाद ने मंचस्थ अतिथियों तथा उपस्थित प्रबुद्ध जनों का स्वागत करते हुए कहा कि यह संस्थान के प्रति गौरव व सम्मान का दिन है कि महान तमिल संत कवि और उनकी कालजयी रचना तिरक्कुरल पर चर्चा करने के लिए यहाँ उपस्थित हैं और भाषा संगम अपने प्रयासों से देश को एकता के सूत्र में बांधने का सराहनीय प्रयास कर रहा है।
अतिथियों के औपचारिक स्वागत के पश्चात् तमिल साहित्य का हिंदी व अवधी भाषा में अनुबाद हेतु डॉ राजेश मिश्र, श्री लखन प्रतापगढी व दयाराम मौर्य को भाषा संगम द्वारा पुष्प गुच्छ, अंगवस्त्रम, तिरुवल्लुवर की प्रतिमा व हिंदी में अनुदित तिरुक्कुरल ग्रंथ प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके पूर्व भाषासंगम के संस्थापक के. सी. गौड जी की धर्मपत्नी श्रीमती रेखा गौड का सम्मान किया गया।
अपने संबोधन में श्री शफीमुन्ना वरिष्ठ पत्रकार तमिल दिसै ने कहा कि जिस तरह से कबीर उत्तर भारत के लिए प्रासंगिक हैं वही भूमिका दक्षिण मे संत तिरुवल्लुअर की रही है जिन्होंने समाज को सही दिशा देने के लिए तमाम सार्थक ग्रंथों की रचना की।
विशिष्ट अतिथि डॉक्टर एन. कोलंजी ने कहा की तिरुवल्लुवर एवं उनकी रचना तिरुक्कुरल कर्तव्य पथ पर डटे रहने का संदेश देती है। इसका मुख्य संदेश यही है कि अगर ऊपर वाले की इच्छा जो भी हो हम अपने लक्ष्य को अपने पराक्रम से प्राप्त कर सकते हैं।
अध्यक्षीय संबोधन में मुख्य अतिथि मंडलायुक्त वाराणसी एस.राजलिंगम ने कहा कि यह एक वैश्विक दर्शन की पुस्तक है जो किसी धर्म- संप्रदाय से ऊपर उठकर मानव मात्र को कर्तव्य पथ पर डटे रहने का संदेश देती है। इसकी एक-एक शिक्षा को प्रतिदिन अगर हम स्मरण करें, पढ़ने का अभ्यास करें तो जीवन को नई दशा और दिशा दी जा सकती है।

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