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“आधारशिला (रंगमंडल) प्रयागराज” द्वारा आयोजित तीन दिवसीय १३ वां राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव २०२२

आधारशिला (रंगमंडल) प्रयागराज द्वारा आयोजित तीन दिवसीय १३ वां राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव २०२२ उत्तर मध्य सांस्कृतिक केंद्र के प्रेक्षागृह में जयवर्धन कृत मस्त मौला की शानदार प्रस्तुति के साथ शुरू हुवा। महोत्सव के पहले दिन दिनांक 20 नवंबर 2022 को आधारशिला रंगमंडल प्रयागराज की बेहतरीन प्रस्तुति को देख सभागार में मौजूद दर्शकों ने भी बेहतरीन संवाद अदायदी को देख जमकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया और जमकर तालियां बजाईं। जयवर्धन द्वारा लिखित नाटक मस्तमौला का सफल निर्देशन किया अजय केशरी ने।इस नाटक मैं हमें कलाकारों द्वारा यह दिखाया गया है की बेटियां कभी भी पिता पर बोझ नहीं होती वही कुछ लोग समाज में ऐसे होते हैं जो अपनों से बढ़कर हो जाते हैं……।

नाटक की कहानी में पंडित पंजीरी लाल (अजय केशरी)अपनी बेटी आरती(दिव्या शुक्ला) के साथ एक मकान में रहते जरूर हैं पर इन्हें अपने एकांत को दूर करने के लिए कुछ अच्छे किराएदार की तलाश रहती है और ये अपने घर के बाहर किराए पर कमरा खाली होने का बोर्ड लगवा देते हैं। इस बोर्ड को देख कर दो कलाकार सुरीले ( सुधीर सिन्हा) और रंगीले( अमित यादव) किसी तरह से जुगत भिड़ा कर कमरा प्राप्त कर लेते हैं वहीं तीसरे कलाकार छबीले( संकल्प गुप्ता) को भी कमरा प्राप्त करने के लिए ढोंग का सहारा लेना पड़ता है और अंत में वो भी पंडित जी के घर में कमरा प्राप्त करने में सफल हो जाता है।

वहीं पंडित जी के घर पर तीनों कलाकार घर में परिवार के सदस्यों की तरह से रहने लगते हैं ।यह देख पंडित जी भी उन्हें अपने बच्चों की तरह रखते हैं।एक दिन बेहतरीन अभिनय के लिए बंद कमरे में छबीले जब अपने संवाद पड़ रहा होता है तो पंडित जी के घर का नौकर फोकट( अनुराग केसरी) आश्चर्य से सुरीले और रंगीले से बोल देता है कि ये तो कमरे के भीतर शराब को पी रहा है और बडबडा रहा है ये बात पंडित जी को पता चलेगी तो वो तुम सभी को घर से निकल देंगे ये सुनकर सुरीले फोकट को समझता है कि ऐसी कोई बात नही है दर असल उसके नाटक का शो होने वाला है उसी की रिहल्सल कर रहा है इसी बीच उस संवाद को सुनकर पंडित जी और आरती दंग रह जाते हैं, पंडित जी इसे अपना अपमान समझकर छबीले से तुरंत कमरा खाली करने को कहते हैं यह सुनकर जब छबीले उन्हें सत्य बताता है तो दोनों को बड़ा पछतावा होता है और पंडित जी अफसोस जताते हुए तुरंत उसके पिताजी से मिलने का फरमान सुनाते हैं। दरअसल पंडित जी भी छबीले को आरती के लिए बेहतर मानकर उसके पिताजी से मिलना चाहते हैं ।वही पंडित जी के इस फरमान को छबीले दूसरे रूप में लेकर एक पान बेचने वाले को अपना बाबू जी (सुधीर सिन्हा) बनाकर पंडित जी के यहां पर अपना पिता बना कर ले जाता है।

वही ₹100 की लालच में नकली बाप बने पान वाले से पंडित जी भी अपनी बेटी के लिए छबीले के रिश्ते के लिए हामी भरवा लेता है ।यह देखकर आरती भी प्रसन्न हो जाती है।वही जब एक दिन इसका भंडा फूटता है तो पंडित जी गुस्से में तीनों किराएदार के साथ-साथ अपने नौकर फोकट को भी तुरंत घर से निकाल देते हैं और अपना मकान एक सेठ( नरेंद्र यादव) के हांथ बेच कर कहीं और चले जाने की बात करते हैं। चारों बड़े दुखी मन से घर छोड़कर खुले आसमान के नीचे भूखे प्यासे रहते हैं। दूसरी तरफ घर खाली हो जाने पर पंडित जी भी बेचैन हो जाते हैं इसी बीच अखबारवाला( अमित श्रीवास्तव) और दूधवाला( कल्याण सिंह) घर पर आते और तीनों के बारे में पूछते है तब इन दोनो को भी तीनो को घर से भगा दिया जाने की जानकारी मिलती है तो ये लोग पंडित जी से कहते हैं कि तीनो लोग बहुत ही भले आदमी थे और वो गलत नही हो सकते हैं।इसके बाद पंडित जी को भी थी लगता है कि उन्होंने गुस्से में गलत फैसला ले लिया है इसके बाद पंडित जी को काफी पछतावा होता है और वो चारों को खोजते हैं और उस जगह पहुंच जाते हैं जहां भूख और प्यास को बुझाने के लिए चारो सड़क पर भीख मांग रहे होते हैं ये देख पंडित जी का मन भर जाता है और फिर वो उनकी दशा देख कर डांटते हुवे सभी से हांथ जोड कर उन्हें वापस घर चलने को कहते हैं…..।

मस्तमौला में सुरीले और बाबू जी की दोहरी भूमिका निभाने वाले कलाकार सुधीर सिन्हा ने अपनी बेहतरीन संवाद अदायगी से दर्शकों के के दिलो में अलग छाप छोड़ी ।वहीं एक एक चुटकुले संवाद पर प्रेक्षा गृह में बैठे नाट्य प्रेमियों ने भी जमकर तालियां बजा कर सभी कलाकारों का जमकर उत्साहवर्धन किया। नाटक अंत तक दर्शकों को बांधने में सफल रहा।

कलाकारों में पंडित की भूमिका में( अजय केशरी) फोकट-(अनुराग केसरी,) रंगीले- (अमित यादव), सुरीले और बाबू जी( सुधीर सिन्हा)छबीले- (संकल्प गुप्ता,) आरती- (दिव्या शुक्ला,) दुकानदार/डॉक्टर बेदर्द व सेठ- (नरेंद्र कुमार), पेपर वाला-(अमित कुमार श्रीवास्तव) ढाबे वाला / आदमी व दूधवाला (कल्याण सिंह) के चुटकुले संवादों ने भी दर्शकों को काफी प्रभावित किया।

डॉक्टर जी एल गुप्ता (वरिष्ठ फिजिशियन) वरिष्ठ कलमकार श्री स्नेह मधुर और राजीव मेहरा वरिष्ठ कलाकार ( एक्टर,डायरेक्टर और राइटर) द्वारा समारोह का दीप प्रज्वलन कर उद्घाटन किया गया। नाटक की समाप्ति पर रंगमंच के कलाकारों को अतिथियों ने सम्मनित किया।

नाटक में कोरस- नाजिम ,सलीमुद्दीन, इंदल सिंह कुशवाहा, हरि नारायण, राजवीर सिंह, नरेंद्र कुमार यादव, कल्याण सिंह व अमित कुमार श्रीवास्तव।

प्रकाश संचालन _सुजय घोषाल, रूप सज्जा- संजय चौधरी, वेशभूषा-श्रीमती गीता केशरी ,
पंडित/संगीत संचालन एवं निर्देशन-अजय केशरी संचालन सुधीर सिन्हा।
प्रस्तुति-आधारशिला (रंगमंडल) प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

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