
मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह की विपक्ष से अपील
संविधान के तहत सब मिलकर कानून बनाएं
स्नेह मधुर
लखनऊ।
संविधान दिवस पर आज उत्तर प्रदेश के मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने संविधान के अक्षरशः पालन की बात उठाकर सभी दलों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर उन सभी अनछुए महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी कानून बनाने की मांग कर विपक्ष के सामने एक तरह से संकट पैदा कर दिया है। हालांकि इसे एक अच्छी और सकारात्मक पहल के रूप में भी देखा जा सकता है। सिद्धार्थ नाथ सिंह का कहना है कि संविधान में पंथ निरपेक्ष समाजवादी शब्द को जोड़ा गया है, जो सही नहीं है। यह संविधान की मूल आत्मा के साथ छेड़ छाड़ है।
अब देखना यह है कि आज उठाई गई इस संवैधानिक आवाज पर विपक्ष किस तरह से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करता है। हमेशा संविधान की दुहाई देने वाले क्या अपनी गुफाओं से निकलकर बाहर आकर वास्तव में संविधान की मूल भावना को जनजन तक पहुंचाने का काम करेगें?

संविधान दिवस पर उत्तर प्रदेश विधान सभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए सिद्धार्थ नाथ सिंह ने एक तरह से सम्पूर्ण विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि जब हम हमेशा संविधान की बात करते हैं, तो क्या विपक्ष के सहयोग से उत्तर प्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य बनेगा जो परिवार नियोजन और यूनिफॉर्म सिविल कोड पर संविधान की मूल आत्मा के तहत कानून बनाकर एक नज़ीर पेश कर सके?
सिद्धार्थ नाथ सिंह ने सदन में व्यक्तिगत रूप से अपनी बात रखते हुए स्पीकर से अनुरोध किया कि क्या यह सदन राजनीतिक विषयों से ऊपर उठकर संविधान में जो कुछ लिखा है, उन पर कानून बनाएगा?
बाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सिद्धार्थ नाथ सिंह ने सदन में रखी अपनी बात का हवाला देते हुए बताया कि यूनिफार्म सिविल कोड संविधान के अंदर लिखा हुआ है। तो इसे लाने में किसी को भी आपत्ति नहीं होनी चाहिए?
कांग्रेस की तरफ इशारा करते हुए सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि भाजपा ने संविधान का कभी उलंघन नहीं किया। जो दल आज मौजूद नहीं है, वे ही देश में एमरजेंसी लाए।
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