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सेवानिवृत्ति न्यायाधीशों को आजीवन सुरक्षा देने की मांग

*ऑल इंडिया बार एसोसिएशन ने सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट एवं हाई कोर्ट के न्यायाधीशों को आजीवन सुरक्षा तथा सेवानिवृत्त जिला न्यायपालिका अधिकारियों को 10 वर्षों की सुरक्षा देने की मांग की*
नई दिल्ली।
कई सेवानिवृत्त न्यायाधीश लगातार भय और मानसिक तनाव में जीवन व्यतीत करते हैं तथा उन्हें इस बात की आशंका बनी रहती है कि प्रभावित वादकारी उन पर हमला कर सकते हैं,” यह बात ऑल इंडिया बार एसोसिएशन (AIBA) ने कही। एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को आजीवन सुरक्षा तथा जिला न्यायपालिका के सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों को कम-से-कम 10 वर्षों तक सुरक्षा प्रदान करने की जोरदार मांग की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए एक पत्र में AIBA के चेयरमैन एवं वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. आदिश सी. अग्रवाला ने कहा कि न्यायाधीश अत्यंत संवेदनशील न्यायिक एवं संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करते हैं और कई बार ऐसे निर्णय देते हैं जो वादकारी पक्षों, आपराधिक तत्वों या प्रभावशाली व्यक्तियों को अप्रिय लग सकते हैं। परिणामस्वरूप, कई न्यायाधीशों को सेवानिवृत्ति के बाद भी धमकियों, शत्रुता और खतरे का सामना करना पड़ता है।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व उपाध्यक्ष बार काउंसिल ऑफ दिल्ली के पूर्व उपाध्यक्ष रहे डॉ. अग्रवाला ने सरकार से आग्रह किया कि न्यायाधीशों की सेवा शर्तों और सुरक्षा संबंधी नियमों में संशोधन कर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को संस्थागत रूप से आजीवन सुरक्षा प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि ऐसी सुरक्षा केवल समय-समय पर होने वाले “सुरक्षा आकलन” या “थ्रेट परसेप्शन” रिपोर्ट पर निर्भर नहीं होनी चाहिए।
एसोसिएशन के अनुसार, न्यायिक पद की प्रकृति ही ऐसी है कि न्यायाधीशों को आजीवन जोखिम बना रहता है, क्योंकि उनके द्वारा दिए गए निर्णय शक्तिशाली व्यक्तियों, संगठित समूहों या असंतुष्ट वादकारियों को प्रभावित कर सकते हैं, जो वर्षों तक शत्रुता रख सकते हैं।
डॉ. अग्रवाला ने आगे कहा कि अनेक सेवानिवृत्त न्यायाधीश सरकार या सुरक्षा एजेंसियों को अपनी सुरक्षा संबंधी आशंकाएं बताने में संकोच महसूस करते हैं, जबकि वे भीतर ही भीतर भय और मानसिक तनाव में जीते हैं। इसके कारण कई न्यायाधीश राष्ट्र की अमूल्य सेवा करने के बावजूद एक सीमित और घुटनभरा जीवन जीने को विवश हो जाते हैं।
एसोसिएशन ने यह भी मांग की कि जिला न्यायपालिका के सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों को भी कम-से-कम 10 वर्षों तक उपयुक्त सुरक्षा प्रदान की जाए, क्योंकि उन्होंने अपने कार्यकाल में अनेक संवेदनशील आपराधिक एवं दीवानी मामलों का निपटारा किया होता है।
इस प्रतिनिधित्व की प्रति भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्य कांत को भी भेजी गई है। पत्र में कहा गया है कि “भारतीय न्यायाधीशों को निर्भय, स्वतंत्र और बाहरी दबाव से मुक्त होकर कार्य करने की आपकी दृष्टि तभी प्रभावी रूप से पूरी हो सकती है जब इन सुझावों को स्वीकार कर लागू किया जाए।”
पत्र में सरकार के उस हालिया निर्णय की भी सराहना की गई है, जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 की गई है। एसोसिएशन ने इसे न्याय प्रणाली को मजबूत करने और लंबित मामलों को कम करने की दिशा में एक प्रगतिशील एवं दूरदर्शी कदम बताया।
एसोसिएशन ने कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को संस्थागत सुरक्षा प्रदान करने से न्यायपालिका की स्वतंत्रता और न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास और अधिक मजबूत होगा तथा न्यायाधीश हर स्तर पर निर्भय एवं स्वतंत्र होकर अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।
*(डॉ. आदीश सी. अग्रवाला)*
वरिष्ठ अधिवक्ता
चेयरमैन, ऑल इंडिया बार एसोसिएशन
पूर्व अध्यक्ष, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन
पूर्व उपाध्यक्ष, बार काउंसिल ऑफ इंडिया
पूर्व चेयरमैन, बार काउंसिल ऑफ दिल्ली
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