
प्रयागराज।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लॉकडाउन का उल्लंघन करते हुए चिकन मीट ले जाने के पाचं आरोपियों की जमानत याचिका स्वीकार कर ली।
आरोपी मो असजद गाज़ी, इरशाद रज़ा, निहालुद्दीन, मो अकील और मो शाहिद को लॉकडाउन के नियमों और शर्तों का उल्लंघन करते हुए 13 अप्रैल को एक चौपहिया लोडर में 3 क्विंटल चिकन मीट ले जाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। तदनुसार, आरोपियों पर आईपीसी की धारा 188, 268, 269, 270, 467, 468, 420, 471, महामारी रोग अधिनियम, 1897 की धारा 3 और आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 51 के तहत मामला दर्ज किया गया।
याचिका नं -बीए नंबर 2833/2020, मो असजद गाज़ी और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में याचियों ने उन्हें झूठे आरोप में फंसाने के आधार पर जमानत मांगने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। आरोपियों ने यह तर्क दिया कि लॉकडाउन के दौरान “चूजों, अंडे और मांस” ले जाना उन गतिविधियों में से एक थी जिन्हें लॉकडाउन में छूट दी गई थी। आवेदकों के वकील ने कहा कि भारत सरकार के मत्स्य, पशुपालन, पशुपालन मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने 10.02.2020 से पहले जारी अपनी एडवाइज़री के अनुसार स्पष्टीकरण जारी किया कि कई राज्यों ने जीवित चूजों, अंडों और मांस को लॉकडाउन में छूट दी गई गतिविधियों में नहीं माना है, इसलिए, 30मार्च 2020 को मंत्रालय ने राज्यों से अनुरोध किया कि छूट दी जाने वाली गतिविधियों की सूची में जीवित चूजों, अंडे और मांस को शामिल करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
यू.पी पशुपालन विभाग के निदेशक ने दिनांक 03.अप्रैल 2020 को एक स्पष्टीकरण वीडियोग्राफी पत्र भी जारी किया था कि “चूजों, अंडे और मांस” को भी आवश्यक वस्तु के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इसलिए उपरोक्त धाराओं के तहत कोई अपराध नहीं किया गया है।
इन परिस्थितियों मेंजस्टिस राजीव सिंह की पीठ ने व्यक्तिगत बांड प्रस्तुत करने पर आरोपियों की जमानत स्वीकार कर ली।
जस्टिस राजीव सिंह ने कहा किपक्षकारों के काबिल वकील के तर्कों , रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री और तथ्यों और परिस्थितियों की समग्रता को ध्यान में रखते हुए, और मामले के गुणों पर कोई राय व्यक्त किए बिना, मैं समझता हूं कि आवेदक जमानत पर रिहा किए जाने का हकदार हैं।
गौरतलब है कि राज्य के वकील ने भी इस तथ्य को स्वीकार किया था कि चिकन मांस लॉकडाउन से छूट वाली वस्तु है। उन्होंने हालांकि इस बात पर जोर देते हुए जमानत की अर्जी का विरोध किया कि आवेदक “जाली पास” के आधार पर चिकन मांस ले जा रहे थे।
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