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इलाहाबाद में छात्रसंघ की मांग कर रहे छात्रों पर लाठी चार्ज, पथराव, उपद्रव

इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर पुलिस छावनी में तब्दील, छात्र संघ की मांग कर रहे छात्रों पर मंगलवार को पुलिस का लाठीचार्ज, पथराव, तोड़फोड़

घूमता आईना।

पूरब का ऑक्सफोर्ड कहे जाने वाली इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र परिषद के गठन की प्रक्रिया शुरू होते ही छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर छात्र नेताओं ने आंदोलन तेज कर दिया है।

छात्रसंघ बहाली की मांग को लेकर चल रहा छात्रों का आंदोलन मंगलवार को हिंसक हो गया। छात्रसंघ भवन पर अपनी मांगों को लेकर नारेजाबी कर रहे छात्रों ने वीसी कार्यालय के सामने धरना देने की कोशिश की। इसी दौरान हुई पुलिस के साथ उनकी झड़प हिंसक हो गयी।छात्रों द्वारा किये गये पथराव के बीच दर्जन भर से अधिक वाहन टूटे और कई पुलिस कर्मियों को भी चोटें आयीं। इसके बाद पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज कर दिया जिसमें कई छात्र घायल हुए।

पुलिस ने बवाल के बाद दो दर्जन छात्रों को हिरासत में लिया। विश्वविद्यालय परिसर में अब भी भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात है। पूरा परिसर पुलिस छावनी में बदल गया है। सुरक्षा की दृष्टि से छात्रों की सभी हरकतों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

छात्रसंघ बहाल करने की मांग को लेकर सोमवार को गधे के साथ कैंपस में जुलूस निकाल रहे समाजवादी छात्रसभा से जुड़े छात्रों और पूर्व छात्रसंघ पदाधिकारियों को रोके जाने पर विश्वविद्यालय के सुरक्षा कर्मियों से भिड़ंत हो गयी, जिसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने छात्रों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा।छात्रों पर लाठीचार्ज के बाद प्रदर्शन कर रहे छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारी और समाजवादी छात्रसभा से जुड़े छात्र कैंपस में ही धरने पर बैठ गए।दरअसल इलाहाबाद विश्वविद्यालय में जून 2019 के कार्यपरिषद के फैसले के बाद इस वर्ष से छात्र परिषद व्यवस्था लागू की गई है, जिसका छात्र विरोध कर रहे हैं।

विश्वविद्यालय में अब छात्र परिषद के गठन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है, जिसे देखते हुए लगभग सभी छात्र संगठनों के प्रतिनिधि एकजुट होकर पूरी ताकत से विरोध में जुट गए हैं। मंगलवार को फिर छात्रसंघ भवन पर एकत्र हुए छात्र प्रतिनिधियों ने नारेबाजी और सभा शुरू कर दी।

सोमवार की घटना को देखते हुए परिसर और आसपास पुलिस बल तैनात था। छात्रों ने जब वीसी कार्यालय पर धरना देने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें रोकना चाहा। इस दौरान दोनों पक्षों में झड़प हुई और फिर पुलिस ने छात्रों को हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग किया। इसके जवाब में छात्रों ने पथराव शुरू कर दिया। पथराव में 14 वाहन क्षतिग्रस्त हुए और कई पुलिस कर्मियों को भी चोटें आयीं।

इसके बाद पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज कर दिया। छात्रों पर लाठीचार्ज का आदेश मिलने के बाद जवानों ने प्रदर्शनकारियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। इसके बाद पुलिस ने मौके से 23 छात्रों को हिरासत में भी लिया। देर शाम कैंपस के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिए गए। पांच छात्रों को नामजद करते हुए कई अज्ञात के खिलाफ कर्नलगंज थाने में एफआईआर दर्ज करा दी है। तनाव को देखते हुए यूनिवर्सिटी परिसर और आसपास के इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय समेत इससे संबद्ध डिग्री कॉलेजों में इन दिनों छात्र परिषद पोल की तिथि घोषित हो गई है। वहीं इविवि समेत इससे संबद्ध डिग्री कॉलेजों में चुनाव आचार संहिता भी लागू कर दी गई है। इसके बाद से छात्रों का विरोध तेज हो गया है।

दरअसल जून में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की बैठक में छात्र संघ की जगह छात्र परिषद का मॉडल लागू किये जाने पर अंतिम मुहर लग गयी थी। विधि विभाग में हुई बैठक में कुलपति प्रोफेसर रतन लाल हांगलू की अध्यक्षता में हुई बैठक में सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी थी । इस फैसले के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय का 96 साल पुराना छात्र संघ खत्म हो गया।

गौरतलब है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ का बेहद गौरवशाली इतिहास रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन की दलील है कि छात्रसंघ की वजह से कैंपस में आये दिन अराजकता का माहौल रहता था इसलिए इसे खत्म किया जा रहा है। छात्रसंघ प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली है जिसमें छात्र अपने मत का इस्तेमाल कर सीधे अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और महामंत्री आदि का चुनाव करते हैं, जबकि छात्र परिषद अप्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली है। इसमें पहले कक्षावार प्रतिनिधि चुने जाते हैं और यही प्रतिनिधि पदाधिकारियों का चुनाव करते हैं।

इस बीच उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रसंघ बहाली के लिए चल रहे आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। उनका आरोप है कि सूबे की भाजपा सरकार पूरे प्रदेश में छात्र राजनीति की पाठशाला को खत्म करना चाहती है।इलाहाबाद, आगरा, गोरखपुर विश्वविद्यालय सहित हर जगह छात्रों का दमन इसका उदाहरण है। सरकार छात्रसंघ से क्यों डरी हुई है? कांग्रेस पार्टी छात्रों की इस लड़ाई में उनके साथ है।

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