
“देशहित से पीछे नहीं हटेगी सरकार”

डॉ दिलीप अग्निहोत्री
लखनऊ।
देश के गृह मंत्री अमित शाह ने आज यहां सीएए का विरोध कर रहे राहुल,ममता,अखिलेश, मायावती आदि पर जम कर निशाना साधा। अहमदाबाद, जोधपुर,नई दिल्ली,जबलपुर, वैशाली में जनसभाएं करने के बाद लखनऊ में भी उन्होंने राहुल,प्रियंका, अखिलेश,ममता बनर्जी जी,को सार्वजनिक बहस की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि इस कानून से किसी की भी नागरिकता नहीं जाएगी। सीएए के खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है। शाह ने डंके की चोट पर कहा कि जिसे विरोध करना हो करे,सीएए वापस नहीं होगा।
प्रजातंत्र ही बेहतरीन प्रणाली है
यह सन्योग था कि लखनऊ में राष्ट्रमण्डल संसदीय संघ सम्मेलन के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जनसभा हुई। इन दोनों के बीच सीधे तौर पर कोई संबन्ध नहीं था। लेकिन संसदीय व्यवस्था के संदर्भ में दोनों पर एक साथ विचार करना दिलचस्प है। राष्ट्रमण्डल संसदीय संघ सम्मेलन में संसदात्मक व्यवस्था पर विस्तृत विचार विमर्श हुआ था। यह माना गया कि यह प्रजातंत्र की बेहतरीन प्रणाली है। जिसमें किसी विधेयक पर पर्याप्त विचार विमर्श होता है, उसके बाद बहुमत से निर्णय होता है। राष्ट्राध्यक्ष के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बनता है। भारत सहित अनेक देशों में न्यायिक समीक्षा की भी व्यवस्था है। यदि कोई कानून संविधान के प्रावधानों के अनुकूल नही होता,उसे न्यायपालिका निरस्त कर सकती है। इसके अलावा नागरिकों को शांतिपूर्ण ढंग से असहमति दर्ज कराने का अधिकार होता है।

इस संदर्भ में अमित शाह की लखनऊ यात्रा को देखने की आवश्यकता है। यहां वह नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में जनसभा को संबोधित करने आये था। सम्पूर्ण संवैधानिक व्यवस्था का पालन करते हुए यह कानून बनाया गया था। गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा और राज्यसभा में नागरिकता संशोधन पेश किया था। दोनों सदनों में पर्याप्त चर्चा हुई। बहुमत से विधेयक पारित किए गए। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह कानून बना। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया। विद्वान न्यायधीशों ने कहा कि इसके विरोध में जब तक हिंसक उपद्रव नहीं रुकेंगे,तब तक इस पर विचार नहीं किया जाएगा। लेकिन विपक्ष ने इसे अपनी वोटबैंक सियासत का मुद्दा बना दिया है। इस पर गलत प्रचार किया गया। लोगों को उकसाया गया। कहा गया कि यह वर्ग विशेष को देश से निकालने का कानून है। अमित शाह सच्चाई बताने के लिए सम्मेलन जनसभा कर रहे है।
घुसपैठियों को कोई देश बर्दास्त नहीं करता
अमित शाह का दावा है कि यह कानून किसी की नागरिकता छीनने के लिए नहीं, केवल तीन देशों के उत्पीड़ित शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए है। अवैध घुसपैठियों को दुनिया का कोई देश बर्दास्त नहीं करता। ये राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते है। भारत को ऐसे लोगों के लिए पनाह स्थल नहीं बनने दिया जाएगा। अमित शाह की राहुल को चेतावनी। कहा कि मोदी का विरोध कर लो।लेकिन भारत माता का विरोध बर्दास्त नहीं किया जाएगा। कांग्रेस का विरोध देशहित की सीमाएं पार कर जाता है। उन्हें विजयदशमी पर शस्त्र पूजा करना खराब लगता है। उन्हें अलगाववादी अनुच्छेद को हटाने पर आपत्ति होती है।

अमित शाह कहते है कि कांग्रेस से पूछा जाना चाहिए कि वह तीन तलाक, आर्टिकल तीन सत्तर और पैंतीस ए को हटाने के विरोध में क्यों थे। उन्होंने एनआरसी का विरोध क्यों किया। राहुल गांधी ने आर्टिकल तीन सौ सत्तर के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त करने का विरोध किया। किसी पूर्ववर्ती सरकार ने जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त करने का साहस नहीं किया। लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार ने सत्ता में वापस आते ही संसद के पहले सत्र में यह कर दिखाया। यह देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला था। फिर भी इसका विरोध हो रहा है। कांग्रेस तो भाजपा सरकार द्वारा लिए गए हर निर्णय का विरोध करती है। जबकि देश में लोगों में ऐसी भावना थी कि अनुच्छेद तीन सौ सत्तर और पैंतीस ए के कारण जम्मू कश्मीर राज्य का भारत में पूर्ण एकीकरण नहीं हो सका था।
ब्रू शरणार्थियों के लिए भी लिया बड़ा फैसला
इस कानून के मानवीय परिणाम दिखाई देने लगे है। देश में नागरिकता संशोधन कानून को लागू करने के बाद मोदी सरकार ने ब्रू शरणार्थियों के लिए भी बड़ा फैसला लिया है।
दिल्ली में हुई बैठक के दौरान गृह मंत्री अमित शाह और ब्रू शरणार्थियों के प्रतिनिधियों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर हुए। गृह मंत्री ने कहा कि त्रिपुरा में लगभग तीस हजार ब्रू शरणार्थियों को बसाया जाएगा। इसके लिए छह सौ करोड़ का पैकेज निर्धारित किया गया है। उन्नीस सौ सत्तानबे में जातीय तनाव के कारण लगभग पांच हजार ब्रू रियांग परिवारों के करीब तीस हजार लोगों ने मिजोरम से त्रिपुरा में शरण ली था। अब विस्थापित परिवारों को आवासीय प्लॉट दिया जाएगा। आर्थिक सहायता के लिए प्रत्येक परिवार को पहले समझौते के अनुसार चार लाख रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट,दो साल तक पांच हजार रुपये प्रतिमाह नकद सहायता, दो साल तक फ्री राशन व मकान बनाने के लिए करीब एक लाख रुपये दिये जाएंगे। त्रिपुरा सरकार भूमि की व्यवस्था करेगी।
सीएए वापस नहीं होगा
अमित शाह ने सीएए का विरोध कर रहे राहुल, ममता, मायावती, अखिलेश आदि पर जम कर निशाना साधा। वह अहमदाबाद, जोधपुर,नई दिल्ली,जबलपुर, वैशाली में जनसभाएं कर चुके हैं। लखनऊ में भी उन्होंने सीएए के विरोधियों पर जम कर निशाना साधा। उन्होंने राहुल,प्रियंका, अखिलेश,ममता बनर्जी जी,को सार्वजनिक बहस की चुनौती दी। इस कानून से किसी की भी नागरिकता नहीं जाएगी। सीएए के खिलाफ दुष्प्रचार किया जा रहा है। शाह ने डंके की चोट पर कहा कि जिसे विरोध करना हो करे,सीएए वापस नहीं होगा।
सीएए में किसी की नागरिकता छीनने का नहीं बल्कि नागरिकता देने का प्रावधान है। पाकिस्तान बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धर्म आधारित उत्पीड़न के दर्द को सुना है। सामूहिक बलात्कार किया जाता है,जबरन निकाह, धर्म परिवर्तन कराया जाता है। हजारों मंदिर, गुरुद्वारे तोड़े जाते हैं। अफगानिस्तान में भगवान बुद्ध के पुतले को गोले दागकर जीर्ण शीर्ण करने का पाप हुआ है। कांग्रेस के पाप के कारणदेश के दो टुकड़े हो गए। जब विभाजन हुआ तब पाकिस्तान में तेईस अल्पसंख्क थे, लेकिन आज तीन प्रतिशत बचे हैं।
शरणार्थियों को उनका हक मिलना चाहिए
कहां गए वो लोग? या तो मार दिया गया या फिर भारत में शरण ली। तब आपका ह्यूमन राइट्स कहां सो रहा था? कश्मीर से पांच लाख से ज्यादा कश्मीरी पंडितो को अपने देश के भीतर विस्थापित होना पड़ा। जिन कश्मीरी पंडितो की हवेलियां थीं, आज उनके पास खाने को खाना नहीं है। महात्मा गांधी जी ने विभजन के समय कहा था कि शरणार्थियों को उनका हक मिलना चाहिए। जवाहर लाल नेहरू ने कहा था कि केंद्रीय राहत कोष से जो करना पड़े वो करना चाहिए। इंदिरा गांधी ने कहा था कि बांग्लादेश के शरणार्थियों के लिए भारत की भूमि खुली है। लेकिन आज की कांग्रेस पार्टी वोट बैंक की लालच में अंधी है।दलित बंगालियों को नागरिकता मिल रही है,उसमें ममता बनर्जी को तकलीफ क्यो है। राजस्थान चुनाव में कांग्रेस के घोषणा पत्र में लिखा कि शरणार्थियों को नागरिकता मिलनी चाहिए। कांग्रेस कहे तो ठीक,भाजपा करे तो गलत। यह सब जनता देख रही है। देश हित में जो भी हो,उसका तो स्वागत होना चाहिए। तीन सौ सत्तर हटने के बाद आज कश्मीर में तिरंगा आसमान की ऊंचाइयों को छू रहा है। कांग्रेस जब तक सत्ता में थी, तब तक अयोध्या में प्रभु श्रीराम का मंदिर नहीं बनने दिया। कोर्ट में कपिल सिब्बल खड़े होकर केस में अड़ंगा लगाते थे। मोदी सरकार बनने के बाद सुप्रीम कोर्ट में केस तेजी से चला और अब अयोध्या में आसमान छूने वाला श्रीराम का मंदिर बनने वाला है।

कांग्रेस भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही
दो साल पहले जेएनयू के अंदर देश विरोधी नारे लगे। वर्तमान सरकार देश विरोधी नारे बर्दास्त नहीं करेगी। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नागरिकता कानून से किसी को नुकसान नहीं है। कांग्रेस इस पर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है,उनके हथकंडों से सावधान रहने की जरूरत है।
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