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माघ मेला में कैंसर जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन

प्रयागराज

“सही समय पर स्क्रीनिंग से कैंसर का इलाज सम्भव” : प्रो.(डा.) जी.एस तोमर

माघ मेला में आयुर्वेद चिकित्सालय में कैंसर जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन

आयुर्वेद विभाग प्रयागराज एवं विश्व आयुर्वेद मिशन के संयुक्त तत्वावधान में विश्व केंसर दिवस के अवसर पर आज 4 फ़रवरी को माघ मेला शिविर में “ कैंसर जागरूकता एवं स्वास्थ्य संगोष्ठी” का आयोजन किया गया । जिसका उद्घाटन अपर मेला अधिकारी डॉ विवेक चतुर्वेदी एवं जगतगुरु वैदेही वल्लभाचार्य ने किया। डॉ चतुर्वेदी ने वर्तमान परिदृश्य में आयुर्वेद की बढ़ती लोकप्रियता को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय कार्यक्रमों के प्रचार प्रसार में आयुर्वेद चिकित्सकों को आगे आने का आह्वान किया । जगद्गुरु वैदेही बल्लभाचार्य ने अपने आशीर्वचन में विश्व केंसर दिवस के स्थान पर केंसर मुक्त दिवस मनाने की सलाह दी ।

इस अवसर पर रीजनल केंसर सेन्टर, कमला नेहरू मेमोरियल हॉस्पिटल के वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ सपन बी श्रीवास्तव बतौर मुख्य वक्ता ने कहा कि धूम्रपान व तंबाकू का अधिक सेवन करने से मुंह का कैंसर अधिक हो रहा है। युवावर्ग इससे अधिक पीड़ित है। वहीं पित्त की थैली में दूषित पेयजल व खाद्य सामग्रियों का सेवन करने से पत्थर एकत्रित होता जाता है। यही आगे चलकर कैंसर का स्वरूप ले लेता है। शरीर में कहीं दर्द है तो उसकी जांच कराएं, क्योंकि वह कैंसर का शुरुआती लक्षण हो सकता है।
विश्व आयुर्वेद मिशन के अध्यक्ष प्रो(डॉ०) जी एस तोमर ने कहा कि हर दो मिनट पर एक कैंसर मरीज की मौत हो जाती है, यह अत्यंत दुखद है । कैंसर से होने वाली अधिकतर मौतें तंबाकू और तंबाकू जनित पदार्थों के सेवन की वजह से होती हैं ।स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कैंसर से बच सकते हैं। कैंसर के प्रति जागरूकता एवं बचाव ही सबसे बेहतर इलाज है। तम्बाकू युक्त गुटका की लत को छुड़ाने के लिए डॉ तोमर ने धनिया, सोंफ, काली मिर्च, दालचीनी, छोटी व बड़ी इलायची आदि औषधियों को मिलाकर हर्बल गुटका तैयार किया है जिससे सैकड़ों लोग तम्बाकू युक्त गुटके से मुक्त हो सके हैं ।

वरिष्ठ सर्जन डॉ राजकिशोर अग्रवाल ने कहा कि सर्जरी कैंसर का प्राचीनतम इलाज है। कैंसर शरीर के अन्य भागों में न फैला हो तो कैंसर सर्जरी से सबसे ज्यादा कैंसर के ठीक होने की संभावना रहती है‌। कैंसर सर्जरी का उपयोग कई प्रकार से कैंसर रोग में किया जाता है।

पूर्व शोध अधिकारी डॉ शांति चौधरी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर के मामले अधिक आने की प्रमुख वजह लड़कियों की कम उम्र में शादी कर देना है। वहीं शहरी क्षेत्रों में कामकाजी महिलाएं बहुत विलंब से शादी करती हैं और बच्चे को पर्याप्त स्तनपान नहीं करा पाती हैं जिससे उनमें स्तन कैंसर के मामलों में वृद्धि देखने को मिली है।

आयोजन सचिव डॉ अवनीश पाण्डेय ने बताया कि जानलेवा रोग कैंसर इंसान की अज्ञानता व लापरवाही से भयावह रूप धारण करता है।अध्यक्षता कर रहे क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ शारदा प्रसाद ने बताया कि कैंसर जैसी भयावह बीमारी के नियंत्रण का जागरूकता ही महत्वपूर्ण उपाय है । इस कार्यक्रम का उद्देश्य मेले में आने वाले लाखों तीर्थयात्रियों को इसकी जानकारी प्रदान करना है।प्रदेश सरकार के लोक कल्याणकारी कार्यक्रमों को जन जन तक पहुँचाने के लिए हम कृत संकल्प हैं ।

इस अवसर पर डॉ भरत नायक, डा एम डी दुबे, डा अलका रावत, डा जय प्रकाश, डा ज्योतिर्मय सिंह, डा अशोक, डा राजेंद्र कुमार, कौशल किशोर, डॉ राजतिलक तिवारी, डॉ क़ामता प्रसाद, डॉ पवन मिश्रा, डॉ हेमन्त सिंह, डा आशीष मौर्य ने भी अपने विचार व्यक्त किए ।

कार्यक्रम के अंत में डॉ राजेन्द्र कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया । कार्यक्रम में मुक्तेश मोहन शुक्ला, राजेन्द्र कुमार सिंह एवं ज्वाइटिक फ़ार्मा के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे ।

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