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“दस्तावेजों में हमारा सांस्कृतिक इतिहास सुरक्षित होता है”

राष्ट्रीय सेवा योजना, इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित विशेष शिविर में बोलते हुये इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. आलोक प्रसाद जी ने कहा कि अगर इतिहासबोध गलत हो जाए तो कई पीढ़ियां गुलाम बन जाती हैं। हमारी इतिहास बोध विषयक असंपृक्ति भी हमारी गुलामी का एक कारण थी।
उन्होंने कहा कि भारत में सबसे ज्यादा पांडुलिपियां मौजूद हैं। उन्हें संरक्षित व संरक्षित करने की बहुत आवश्यकता है।
उन्होंने 1993 में आए ‘लोक दस्तावेज अधिनियम’ का हवाला देते हुए कहा कि दस्तावेजों में हमारा सांस्कृतिक इतिहास संरक्षित एवं सुरक्षित होता है। वह किसी की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं हैं। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि हमारे देश की बहुत सारी पांडुलिपियों को अंग्रेज अपने देश में लेकर चले गए, जहां वे आज भी सुरक्षित और संरक्षित हैं। यदि हमारे भीतर इतिहासबोध नहीं है तो हमें यह पता ही नहीं चलेगा की ‘मैं कौन हूं’। असल में इतिहास को जानना अपने अस्तित्व को जानना है। स्वतंत्र होना है। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. राजेश कुमार गर्ग जी ने कहा कि आज प्रकृति को बचाने की बहुत आवश्यकता है। यदि हम क्षिति,जल, पावक, गगन, समीर को नहीं बचा पाएंगे तो आने वाले समय में हमें कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। कहीं ऐसा न हो कि हमें वायु को खरीदना पड़े।

विशेष कार्य अधिकारी एवं राज्य संपर्क अधिकारी डॉ मंजू सिंह जी ने कहा कि सफलता प्राप्त करने के लिए अपने आप को गलाना पड़ता है। एक नहीं अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। तब जाकर जीवन में सफलता प्राप्त होती है।

धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम अधिकारी डॉ शिव कुमार यादव जी ने किया।
Drrajeshkumargarag NSS AU राष्ट्रीय सेवा योजना राष्ट्रीय सेवा योजना इलाहाबाद विश्वविद्यालय 2024-02-26
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