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कहानी “चली गई”: रेनू मिश्रा “दीपशिखा”

चली गई….!

रेनू मिश्रा “दीपशिखा”

जया अपने माता-पिता की लाडली बेटी है।उसके तीन भाई उसे बहुत मानते है।जया से जब कोई पूछता कि तुम्हारी शादी कब होगी।वह हंसती और कहती ,”मंगल को जन्मी हूँ,मंगल को शादी होगी। “सुनकर लोग उसकी मासूमियत पर हंसते।

कुछ वर्षो बाद जया का विवाह मंगलवार के दिन हुआ। मजाक में कही हुई बात सच हो गई। इक लौती बेटी होने के कारण मायके वालों ने बहुत समान दिया।

ससुराल में पति राजेश ,बहन मीना तथा सास-ससुर ने जया को बहुत लाड प्यार से रखा । कुछ महीनों बाद ससुराल वालों ने जया से नित नये समान की फ़रमाइश शुरु कर दी। जया मायके आकर माता-पिता से अपनी सारी बात बताई ।माता-पिता जया की बात से दुखी थे।पर माँ ने सामान देकर जया को ससुराल भेज दिया। कुछ दिनों बाद ससुराल वालों ने पैसे के लिए जया से कहा। जया ने विरोध किया ।पति ने बहुत मारा।जया को पूर्ण विश्वास हो गया कि मेरा विवाह दहेज के लोभी के साथ हुआ। मायके आई पर माँ से उसने कुछ नहीं बताया। हमेशा की तरह मजाक में मुहल्ले की चाची ने कहा,”शादी तो तुम्हारी मंगल को हुई पर ?जया हमेशा की तरह हसकर बोली,”मंगल को ही मरूंगी। “इस बार जया ससुराल नहीं जाना चाह रही थी।

मायके से डोली और ससुराल से अर्थी भावना के कारण उसे जाना पड़ा। पैसा न मिलने के कारण ससुराल वालों ने उसे बहुत यातना दी।भाई ससुराल में बहन से मिलने आया, बहन की स्थिति सही न देखकर वह ज़िद करके मायके ले आया।

बहन ने आपबीती बताई और अबकी गई तो ? माँ ने कहा,”ऐसा नहीं कहते बेटी।” माता-पिता ने सामान के साथ बेटी को विदा कर दिया।

पैसा न देख ससुराल वालों ने जया से बहुत अच्छा व्यवहार किया। जया को लगा सब बदल गयें है।रात 12 बजे एकाएक ससुराल वालों ने जया का मुँह बंद कर पीटा और आग लगा दी। जया की चीख़ सुनने वाला कोई नहीं था। हंसने वाली जया मंगल को दुनिया से चली गई।

दहेज के लोभी आज भी घूमते हैं।
जया सी बेटियाँ आज भी मरती हैं।

रेनू मिश्रा “दीपशिखा”
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

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