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“कोरोना द ब्राइटर साइड”: हर सभ्यता हर महामारी अपना पद चिह्न छोड़ जाती है…

Prayagraj.

कहानी kritikaar के वास्तविक अनुभव एवं कल्पना की अभिव्यक्ति है। कहानी में घटनाक्रम धीरे-धीरे बढ़ता है। हर सभ्यता हर महामारी अपना पद चिह्न छोड़ जाती है। कोरोना महामारी ने हमारा बहुत कुछ छीना लेकिन हमें बहुत दिया भी भावनात्मक संवेदनात्मक रूप से परिवार में पारस्परिक स्नेह बढ़ा। इसी का ज्वलंत उदाहरण है शालिन खरे का कहानी संग्रह ॓ “कोरोना द ब्राइटर साइड”। ॔॔

अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथाकार, उपन्यासकार डॉ नीलम सरन गौढ़ ने बतौर मुख्य अतिथि पुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम में आज हिंदुस्तानी अकादमी सभागार में ये उद्गार व्यक्त किए। पूर्व चेयरमैन रेलवे बोर्ड जीके खरे ने उनकी पुत्री शालिनी की पुस्तक के लोकार्पण समारोह में आए सभी अतिथियों का स्वागत किया।

विशिष्ट अतिथि डॉ हेरम्ब चतुर्वेदी ने शालिनी की पुस्तक की कुछ चुनिंदा पंक्तियों का उदाहरण देते हुए उन्हें भाषा शैली एवं भावों की अभिव्यक्ति में कुशल बताया। उन्होंने कहा की इस संग्रह की पांच कहानियां पंचतंत्र की कहानियों की याद दिलाती हैं जो उपदेशात्मक न होकर भी कुछ सीख अवश्य देती हैं।

सम्मानित अतिथि डॉ अनिन्दा चटर्जी ने कहा की शालिनी की कहानियों से जमीन की खुशबू आती है। उन्होंने लेखिका को हिंदी में अपनी पुस्तक का रूपांतरण करने की सलाह दी।

कार्यक्रम संयोजक डॉ शान्ति चौधरी ने संचालन के द्वारा कहा कि कोरोना काल में जब 60 फ़ीसदी लोग अवसाद या दुष्चिंता से पीड़ित थे , शालिनी ने अपनी कहानी संग्रह की रचना कर डाली, जो निश्चित रूप से सराहनीय है। धन्यवाद ज्ञापन डॉ अंजना खरे ने किया।

इस अवसर पर डॉ दिलीप चौरसिया, डॉक्टर आलोक खरे, रवि प्रकाश, सुषमा कपूर, माया खरे, अरिंदम घोष, डॉ एन सी अग्रवाल, अशोक खरे, विवेक एवं प्रगति खरे समेत अनेक शुभचिंतक उपस्थित रहे।

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