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कोरोना, फेसबुक और धर्म -3

कुमार विजय

कोरोना का कहर हर अगले दिन के साथ भारत में बढ़ता ही जा रहा है , डाक्टर और प्रशासन अपनी पूरी क्षमता के साथ देश को इस घातक बीमारी से बचाने में लगे हुए हैं ।पर हमारे इस देश में यह लड़ाई सिर्फ कोरोना से ही नहीं लड़ी जा रही है बल्कि समानांतर तौर पर यह लड़ाई राजनीति और धर्म के मोर्चे पर भी लड़ी  जा रही है । रूढ़ियों में जकड़े हुए समाज की तमाम विसंगतियां इस महामारी से लड़ने में अवरोध बन रही हैं ।   डाक्टर तमाम असुविधाओं के बावजूद इलाज करने में लगे हुए हैं। पर फेसबुक जो भारत की सबसे ज्यादा पसंदीदा सोशल नेटवर्क साईट है, उस पर कोरोना के परिप्रेक्ष्य में सबसे गंभीर मसविदे के तौर पर अभी धर्म ही है। …..मीडिया और सोशल मीडिया दोनों जगह धर्म की फसल बखूबी उग रही है।  कोई किसी धरम को सूली पर चढ़ा देने को आतुर है, तो कुछ लोग बेहद मानवीय तौर पर इस धार्मिक घृणा से बाहर निकालने की अपील भी कर रहे हैं।  कुछ अच्छी कविताँए लिखी जा रही हैं तो कही नफरती इश्तहार भी चस्पा किये जा रहे हैं। हम आपको भी फेसबुक की कुछ ऎसी ही तकरीर, सुझाव और टिप्पणियों से रूबरू करवा रहे हैं –  यहाँ मानवीयता की ऊंचाई भी है और सरहद विहीन मानसिक पतन का किस्सा भी … पिछली दो श्रंखला से आगे बढते हुए आज तीसरी किश्त –

  एस आर हरनोट

असुरी और अमानुषी प्रवृत्तियां

तबलीगी जमात की रुग्ण व मानवघाती मानसिकता समझने में प्रख्यात अभिनेता व निर्देशक अरशद वारसी द्वारा निर्मित नई वेब सीरीज “असुर” बहुत मदद करती है। वूट सेलेक्ट पर रिलीज हुई इस वेब सीरीज का निर्देशन ओनी सेन ने किया है। इसके आठ एपिसोड है। इस कर्फ्यू समय में इसे देखते हुए बार बार तबलीगी असुरों की करतूतें आंखों के सामने घूम रही थी।

इस घातक महामारी समय में ऐसी अवांछित मिसालें अमानुषी और असुरी प्रवृत्तियों वाले लोग ही पेश कर सकते हैं कि अपना जीवन दाव पर लगाते, बिना प्रयाप्त सुरक्षा कवच के जो डॉक्टर और नर्सें तथा अन्य चिकित्सा कर्मी रातदिन मानवता की सेवा में हैं, उन्हें बचाने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं, आप बजाए उनका सम्मान करने के उन पर थूक रहे हैं,, गालियां दे रहे हैं और पत्थर चला रहे हैं……उन्हें बेरहमी से पीट रहे हैं………अमानुषिक व असुर प्रवृति का यह उदाहरण शायद ही कहीं मिले।

हमारे ग्रंथों में घोर कलियुग की परिकल्पना इन्हीं आसुरी प्रवृत्तियों से की गई है। एक मस्तिष्क मानवता के लिए काम करता है और एक मस्तिष्क उसके विनाश के लिए, नफरत फ़ैलाने के लिए….निःसंदेह ऐसे मस्तिष्कों की संख्या आज बहुत है और निरन्तर बढ़ती जा रही है।

ऐसी बेहूदा जमात को बेगूसराय के नसीम अहसन (रवीश जी की वाल से साभार) से सबक लेना चाहिए जो अपने घर के बाहर ही ग़रीबों के लिए राशन वितरण कर रहे हैं। ऐसे लोग जिन्हें सरकारी मदद नहीं मिल पा रही है, उन्हें 5 किलो चावल, 5 किलो आटा,1 किलो दाल,1 किलो चीनी, 500 ग्राम करू तेल,1 किलो नमक, ढाई किलो आलू, 1 किलो प्याज़ एक साबुन के साथ 200 रूपया नगद हरी सब्जी खरीदने के लिए दे रहे हैं। उन्होंने कहा है कि अगर ज़िला प्रशासन लोगों की सूची देगा तो उनके घर भी यथासंभव मदद पहुँचाने का प्रयास करेंगे। नसीम जी ने प्रधानमंत्री राहत कोष में दस लाख, मुख्यमंत्री राहत कोष तथा रेड क्रॉस बेगूसराय में एक-एक लाख रुपए कोरोना आपदा से निपटने के लिए डोनेट किया है।

दादा नसीम अहसन में भी वही मस्तिष्क है जो इन जाहिलो में हैं लेकिन वे इसका इस्तेमाल इस घोर संकट की घड़ी में मानवता के लिए कर रहे हैं न कि किसी विशेष कौम के लिए। आप मस्जिदों को अल्लाह का घर मानते हैं और वहीं से बाहर निकल कर जब चिकित्साकर्मी आपकी जान बचाने के लिए आगे आते हैं तो उन पर थूका जाता है, उन्हें मारा पीटा जाता है…..आपका पता नहीं ये कौन सा जाहिल “अल्लाह” होगा जिससे आप इन असुरी हरकतों की प्रेरणा लेते हैं….?

यह घोर निंदनीय और अक्षम्य अपराध है जिसकी सजा कड़ी से कड़ी होनी चाहिए।

ऋतु तिवारी

ग़लत को ग़लत कहने के पहले भी जो मुस्लिम तुष्टिकरण में उलझे हैं…उनके लिए सिर्फ़ इतना कहना है कि वो भी देश की जड़ में तेज़ाब डाल रहे हैं।सरकार की लापरवाही की आड़ में इस गुनाह को जस्टिफ़ाई करना बंद कीजिये।डॉक्टर्स को मारना,विदेशों से आकर जमायत करना,बिना टेस्ट करवाये पूरे देश में घूमकर दीन की शिक्षा देना।आपसब इसको जस्टिफ़ाई कैसे कर सकते हैं? 

इतनी गैरजिम्मेदाराना हरकत पर क्यों इन्हें डिफ़ेंड किया जा रहा है?

ये लोग बबुआ हैं क्या देश के…कि कुछ भी करेंगे और हम इन्हें सेक्युलर होने के नाते इन्हें डिफ़ेंड करेंगे।

ग़लत को ग़लत बोलने का नैतिक साहस तो आप सब में भी नहीं है क्योंकि मुस्लिम तुष्टिकरण से आपको सोशल मीडिया के फ़ोलोअर्स चाहिये जैसे नेताओं को वोट।

इस समय आप सबके चेहरे से नक़ाब उतर गया।आप मुसलमानों के हिमायती नहीं हैं।अल्पसंख्यक हमेशा तुष्टिकरण का हथियार रहा है और कोरोना ने आकर सबके चेहरे उजागर कर दिये।

और हाँ..एक बात और,ये विचारधारा की बात नहीं,बात सही और ग़लत की है तो मैं हिंदू,मुस्लिम सबको कहूँगी कि यदि भावनाएँ आहत हुई हैं तो मुझे अलग कीजिये क्योंकि

“मैं आइना हूँ,दाग़ दिखाऊँगा!”

जय हिंद!

एम इकराम फरीदी

या अल्लाह, कौम को खराब करने वाले इन कुछ मौलवियों को उठा ले।

 

तूने क्योंकर इन राक्षसों को हम पर मुसल्लत कर रखा है ? क्या मिज़ाज है तेरा मेरे माबूद ? इस खूबसूरत दुनिया को बनाकर तूने बदनुमा धब्बा भी बना दिया | क्या छोटी सी कालिख पोत दी कि दूसरे ग्रहों की नज़र ना लगे पृथ्वी को ?

मैं नहीं जानता तेरी  मसलेहत मगर उनकी ये हरकतें, अब क़ाबिले बर्दाश्त नहीं रहा | सारी दुनिया में इसने हाहाकार मचाई है | तू तो दूर बैठा तमाशा देख रहा है और तेरी कुदरत इन के मददे मुक़ाबिल सारी दुनिया पर क़हर बरपा रही है |

पाकिस्तान में देखो कुदरत का क़हर नाजि़ल हो रहा है | आदमी आदमी के खून का प्यासा है | वहां हर गली बम विस्फोट से गूंज रही है | मस्जिदें दहलाई जा रही हैं | छोटे-छोटे बच्चों पर बम बांधकर उनके चीथड़े उड़ाए जा रहे हैं |

मैं जानता हूं अल्लाह तेरी क़ुदरत से कुछ भी बाहर नहीं है |ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि तू ऐसा चाह रहा है और तू बेसबब कुछ भी नहीं चाहता | सीरिया में अल्लाह तूने क्या किया , मैं देख रहा हूं अल्लाह तूने 50 मुस्लिम देशों को जहन्नुम बना रखा है | भाई भाई को बम से उड़ा रहा है | मुझे पता है यह सब तेरे इशारे पर चल रहा है |आखिर तेरी कुदरत से कौन बाहर है , मखलूक़ तो छोड़ो एक पत्ता भी नहीं खड़क सकता |

और मैं तेरे दिल के भेद भी जानता हूं |तू भले अल्लाह ठहरा हर इंसान के दिल के भेद जानता है लेकिन मैं भी तुझसे ना वाकिफ नहीं हूं | आखिर तेरा ही एक अंश जो ठहरा | 

क्या सूअर को बनाकर तेरी उत्कंठा बाक़ी रह गई थी ? तूने इंसानों में ही वहशी दरिंदे पैदा कर दिए, यह तो तेरा कमाल है | मैं हैरान हूं तेरे कमाल देखकर | कोई यक़ीन नहीं कर सकता कि इंसान इतना बदमिज़ाज और बदकिरदार भी हो सकता है कि कोई ऐसी भूमिका अदा कर सके ? कोई इंसान इबादत की बुनियाद पर इंसानों से नफरत करता हो, ऐसी बदगुमानी तो इंसान में इंपासिबल थी  मगर तू तो जब भी करता है ,कमाल करता है और तूने इन्हें बनाकर एक नामुमकिन को मुमकिन कर दिया |

नवरात्र चल रहे हैं अल्लाह तो मैं अंत में तुझसे राम राम करता हूं | जय श्री राम |

कल मिलते हैं अगली किश्त में बने रहिये घूमता आईना के साथ 

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