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देशी असलहों पर अब भी भरोसा जता रहे अपराधी

हर साल बढ़ रही डिमांड

रिवाल्वर व राइफल दूसरी पसंद
असलहों की बरामदगी के बाद सच आया सामने

ए अहमद सौदागर

लखनऊ।

सूबे में अपराधी घटना करने के लिए देसी असलहों पर ही भरोसा जता रहे हैं।
स्टेटस सिंबल बन चुकी राइफल और रिवाल्वर अब उनकी दूसरी पसंद है। यही नहीं बेखौफ बदमाशों ने देसी बमों का भी खूब इस्तेमाल किया है।
पिछले वर्षों एवं हाल में देसी असलहों की बरामदगी से फिलहाल लखनऊ सहित कई जिलों में ऐसी ही तस्वीरें सामने आ रही हैं।
साल दर साल अवैध असलहों की बरामदगी के बाद अब ऐसे अपराधियों की धरपकड़ और असलहों कि तस्करी की रोकथाम के लिए पुलिस ने कमर कस ली है।
अपराध की दुनिया में पांव पसार चुके अपराधी फैक्ट्री मेड असलहों के बजाय देसी असलहों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
रविवार की देर रात राजधानी लखनऊ के गाजीपुर पुलिस के हत्थे चढ़े असलहा तस्कर व उसके पास से बरामद हुए 11 अवैध असलहों से यही सच सामने आ रहा है।
एक पुलिस अधिकारी का मानना है कि देसी पिस्तौल कम दाम में और आसानी से मिल रही है। कुछ इलाकों में गुपचुप तरीके से अवैध असलहों का कारोबार फल फूल रहा है।
राजधानी में अब अवैध असलहो का कारोबार घटा है, लेकिन तस्कर दूसरे राज्यों से तथा जिलों से असलहे लाकर खा पा रहे हैं।

सात से दस हजार रुपए में मिल रहे असलहे

जानकार सूत्रों की माने तो यूपी में मौजूदा समय मे भारी मात्रा में असलहा तस्कर सक्रिय है।


इन अवैध असलहों की तस्करी करने वाले देसी पिस्तौल 10000 से लेकर 30,000 40000 रुपयों में बेच रहे हैं।
इसके अलावा अन्य असलहे भी डिमांड के आधार पर आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं। रविवार की रात गाजीपुर पुलिस के हत्थे चढ़े एक गिरोह के सदस्य से इस पूरे सिंडिकेट का सच सामने आया है।
यही नहीं इससे पहले राज्य एसटीएफ व क्राइम ब्रांच तथा स्थानीय पुलिस की टीम भी अब तक अवैध असलहों के कई सौदागरों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है।

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