
रक्षा शौर्य का सन्दे
डॉ दिलीप अग्निहोत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुरू से भारत के रक्षा क्षेत्र को नया आयाम देने का प्रयास कर रहे है। इस संबन्ध में दो सौ नए स्टार्ट अप का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पचास नई तकनीक का उत्पादन व स्वदेशीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा।

भारत दुनिया का एक प्रमुख एयरोस्पेस रिपेयर व ओवरहाल हब बनाने की क्षमता रखता है। बाहरी अंतरिक्ष में अपने हितों की सुरक्षा क्षमता बेहतर बनाई जाएगी।भारत केवल एक बाजार नहीं है, बल्कि एक बड़ा अवसर भी है। आगामी पांच वर्षों में डेढ़ हजार से अधिक रक्षा क्षेत्र में एमएसएमईएस की संख्या हासिल करने का प्रयास होगा। पिछले डिफेंस एक्सपो में डिसेंट्रालाइजड एथेरियम एसेट एक्सचेंज शुरू किया गया था। भारतीय रक्षा संगठन के स्टार्ट अप, एमएसएमई, व्यक्तिगत इनोवेटरों को जोड़ने के लिए आवश्यक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण का लक्ष्य था। स्पेस तकनीक के मामले में भारत की रुचि वॉर फेयर के लिए नहीं, वेलफेयर के लिए है। इसरो भारत पूरी दुनिया के लिए आउटर स्पेस को एक्सप्लोर कर रहा है। डीआरडीओ इन एसेट्स को गलत ताकतों से बचाने के लिए डिफेंस की दीवार खड़ी कर रहा है।

भारत में दो बड़े डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें से एक तमिलनाडु में और दूसरा यहीं उत्तर प्रदेश में हो रहा है। अगले पांच वर्षों में यहां बीस हजार करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य है। अब डिफेंस सेक्टर में शत प्रतिशत एफडीआई का रास्ता साफ हुआ है। विगत पांच वर्षों डिफेंस सेक्टर में सत्रह सौ करोड़ के एफडीआई आना तय हुआ है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्रीअफेयर्स के बनने से डिमांड और मैन्यूफैक्चरिंग की प्रक्रिया और आसान होने वाली है। इसका निश्चित लाभ डिफेंस सेक्टर्स से जुड़े उद्योगों को होगा। निजी क्षेत्र की भागीदरी भी सुनिश्चित की जाएगी।

इसमें संदेह नहीं कि नरेंद्र मोदी सरकार ने बड़े नीतिगत सुधार किए हैं। इससे इज ऑफ डूइंग बिजनेस,मेक इन इंडिया, फॉर इंडिया और फॉर द वर्ल्ड की विकास यात्रा आगे बढ़ी है। यूपीए सरकार के मुकाबले रक्षा उत्पाद का निर्यात व डिफेंस लाइसेंस देने के काम मे उल्लेखनीय प्रगति हुई है। यह बढोत्तरी लगातार जारी है। आज भारत में आर्टिलरी गन,एयरक्राफ्ट कैरियर,सबमरीन, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट और लड़ाकू हेलीकॉप्टर जैसे उपकरणों के कई रक्षा टुकड़े बना रहे हैं। आतंकवाद व साइबर अपराध के मद्देनजर नई तकनीक को विकसित की जा रही हैं। मेक इन इंडिया से भारत की सुरक्षा बढ़ेगी। वहीं डिफेंस सेक्टर में रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे। इससे भविष्य में डिफेंस एक्सपोर्ट को भी बल मिलेगा। डिफेंस एक्सपो का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। उन्होंने कहा कि भारत में डिफेंस हब बनने की पर्याप्त क्षमता है। सरकार ने निवेश के अनुकूल माहौल बनाया है। इज ऑफ डूइंग बिजनेस में भारत की स्थिति बहुत सुधरी है। मोदी ने दुनिया के निवेशकों को विश्वास दिलाया कि यहां उनका निवेश करना सुरक्षित रहेगा। उद्घाटन समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और तीनों सेनाओं के प्रमुख समेत देश विदेश के प्रतिनिधि उपस्थित थे। इस समय यह एशिया की सबसे बड़ी हथियार मंडी है।

लखनऊ के वृंदावन योजना इलाके में दो सौ एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में इस डिफेंस एक्सपो का आयोजन किया जा रहा है। यहां चालीस देशों के रक्षा मंत्री पहुंच चुके हैं। भारत में छोटे कल पुर्जे बनाने वाली कम्पनियां भी यहां प्रदर्शनी लगा चुकी है। सीडीएस जनरल रावत ने यहां डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन डीआरडीओ कैंप का निरीक्षण किया। उन्होंने तैयारियों व सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इससे पहले जनरल रावत ने तीनों सेना प्रमुखों और मध्य कमान सेनाध्यक्ष के साथ बैठक की।

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