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गुरूद्वारा कमेटी : नये निजाम के सिर होगा ‘कांटो भरा ताज’
वरिष्ठ पत्रकार सुनील पाण्डेय
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के आम चुनाव बेशक संपन्न हो गए हैं, पर पीछे कई सवाल छोड़ गए हैं। रक्षाबंधन के दिन हुए मतदान के कारण 63 प्रतिशत लोग मतदान करने के लिए घर से नहीं निकले। इसलिए दिल्ली के गुरुद्वारों के निजाम का फैसला महज 1.25 लाख लोगों ने कर दिया। जबकि दिल्ली में सिखों की गिनती 8 से 10 लाख बताई जाती है। वहीं गुरुद्वारा चुनाव के लिए 3.42 लाख मतदाता दर्ज थे। इसके अलावा लगभग 92 हजार मतदाताओं के नाम 2017 की मतदाता सूची से 2021 में काट दिए गए थे। इन सबके कारण मतदान में लोगों की रूचि ना होने की वजह से माना जाता है कि सत्ता पक्ष के खिलाफ विरोध होने के बावजूद वह विरोध मत प्रतिशत में नजर नहीं आ पाया। इसका सीधा फायदा सत्ता पक्ष को मिला।
हालांकि कमेटी अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा अपनी पंजाबी बाग सीट से चुनाव हार गए। लेकिन, उनकी पार्टी के 27 सदस्य चुनाव जीतने में कामयाब रहे। चुनाव में शिरोमणि अकाली दल दिल्ली को 14, जागो पार्टी को 3, पंथक अकाली लहर एवं निर्दलीय को 1-1 सीट मिली है।
विरोधियों के हमले को बनाया ढॉल, किया पॉजिटिव प्रचार
दिल्ली कमेटी चुनाव के दौरान मुख्य रूप से भ्रष्टाचार एवं अन्य मुददे हावी रहे। लेकिन मनजिंदर सिंह सिरसा ने बड़ी चतुराई से उन मुददों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। बल्कि विपक्षी दलों के द्वारा बाला साहिब अस्पताल को रोकने एवं अन्य मामले में दायर की गई याचिकाओं को ही अपनी ढाल बनाते हुए पीडि़त कार्ड खेल दिया। जिस वजह से सिरसा को कही न कहीं संगतों की सहानभूति मिली। विपक्षी पार्टी शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली) का सारा चुनाव प्रचार सिरसा के इर्द गिर्द था, इस वजह से वह सिरसा को तो हराने में कामयाब रहे, पर दिल्ली में उसकी पाटी को जीत से नहीं रोक पाए। वहीं छोटे दलों, पंथक सेवा दल, सिख सदभावना दल, पंथक अकाली लहर ने बादल विरोधी वोटों में बंटवरा करके अकाली दल एवं सिरसा का काम आसान कर दिया। सिरसा ने पूरे चुनाव के दौरान 2 साल बेमिसाल का नारा देकर प्रचार किया और अच्छे कार्यों को संगत के बीच जाकर गिनाया। सिरसा ने पूरे चुनावी अभियान को पॉजिटिव लाइन लेकर चला, जिसकी वजह से सिखों ने विरोध होने के बावजूद उन्हीं तीसरी बार सत्ता की चाभी सौंपी।
आस्था की पहरेदारी के लिए चुनाव में बंटी वर्जित वस्तुएं
आस्था की पहरेदारी करने के लिए हुए इस चुनाव में वैसे तो ज्यादातर अमृतधारी एवं साबत-सूरत सिख ही भाग ले रहे थे। लेकिन, उनके बीच वर्जित वस्तुओं का प्रसार भी खूब किया गया। मसलन, शराब और पैसा बांटने का भी रिवाज चला। पैसा तो सार्वजनिक नहीं पकड़ा गया, लेकिन बांटने के लिए लाई गई शराब की बोतलें जरूर पुलिस के हाथ लगीं। इसके कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए। जिसका सीधा अर्थ है कि चुनाव में वोटरों को लुभाने के लिए शराब और पैसे का व्यापक इस्तेमाल हुआ है। इसकी पुष्टि जागो पार्टी के अध्यक्ष मंजीत सिंह जीके कर भी रहे हैं। अपनी पार्टी की हार का जिम्मेदार भी वह शराब और पैसे को बता रहे हैं। जीके का कहना है कि हमने पहले ही घोषणा कर दिया था कि चुनाव में वर्जित किसी भी वस्तु को हम नहीं बांटेंगे। अगर हमारा उम्मीदवार बांटता हुआ पकड़ा जाता है तो उसकी उम्मीदवारी रद कर देंगे। बावजूद इसके विभिन्न दलों ने शराब और पैसा पानी की तरह बहाया। पैसे की चर्चा चुनाव खत्म होने के बाद भी चल रही है।
चुनाव निदेशालय की खामियां
दिल्ली सरकार के अधीन आते गुरुद्वारा चुनाव निदेशालय ने 2021 के आम चुनाव के लिए बनाई गई फोटोयुक्त वोटर कार्ड में करीब 92 हजार वोट काटे थे। जबकि 48 हजार नए वोट जोड़े गए थे। काटे गए 92 हजार वोटों में से सैकड़ों मतदाता 22 अगस्त को अपनी पहचान पत्र लेकर जब वोट डालने पहुंचे तो पता चला कि उनके वोट कट चुके हैं। इससे साफ लगता है कि जिन अधिकारियों की ड्यूटी वोटर चेक करने की लगाई गई थी, उन्होंने सही तरीके से कार्य नहीं किया। सर्वेक्षण में बिना मकान को देखे ही उनके वोट काट दिए गए। वार्ड 16 में पड़ते मोतीनगर के 3/56 ए में रहते कुलजीत सिंह लगभग 40 साल से उसी मकान में रह रहे हैं, लेकिन वह वोट नहीं दे सके। इसी प्रकार सुदर्शन पार्क के ई-26 में एक ही परिवार के 25 सदस्यों के वोट काट दिए गए। वोटिंग लिस्ट में कोई कारण भी नहीं बताया है। इसी तरह लगभग हर वार्ड में लोग परेशान हुए। चुनाव निदेशालय को इस ओर भी गंभीरता से ध्यान देना होगा।
अकाली दल के सामने नई चुनौती होगी होगी
लगातार तीसरी बार दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की सत्ता पर काबिज होने जा रही शिरोमणि अकाली दल (बादल) के सामने अब पहले से ज्यादा चुनौतियां होंगी। पार्टी को कमेटी की सत्ता संभालने के बाद संगत में भरोसा दिलाने के लिए अब और अच्छा काम करना होगा। गुरूद्वारों में सुधार, शैक्षणिक संस्थानों का गिरता स्तर उठाने, कर्मचारियों का भरोसा जीतने, समय पर वेतन एवं अन्य भत्ते देने सहित संगत की सेवा को प्रमुखता से करना होगा। इसके अलावा गुरू हरिकिशन पब्लिक स्कूलों को घाटे से उबारन के लिए बड़ी मशक्कत करनी होगी। स्टाफ सातवां वेतन आयोग मांग रहा है, जबकि छठें वेतन आयोग का बकाया और अप्रैल 2020 से अप्रैल 2021 तक का बकाया वेतन और रिटायर हुए कर्मचारियों के भत्ते एवं फंड बाकी है। इसके साथ ही गुरुतेग बहादुर विश्वविद्यालय एवं मेडिकल कालेज खोलने का वायदा किया गय है वह कैसे पूरा होगा यह भी देखना होगा। उसके अलावा मामूली वोटों के साथ विजयी हुए कमेटी सदस्यों को संभाल कर रखना भी बड़ी चुनौती होगा। यदि 5 से 7 सदस्य इधर से उधर हो जाएं तो बहुमत गिर सकता है।
और अंत में…!
गुरुद्वारा कमेटी की सत्ता को हासिल करने के लिए अब नया सियासी खेल शुरू हो गया है। वैसे तो शिरोमणि अकाली दल को बहुमत मिल गया है, लेकिन विपक्षी दल भी जोड़-तोड़ कर कुर्सी पर बैठने की जुगत लगा रहा है। विपक्षी दल के पास फिलहाल सभी दलों को मिलाकर 20 सीट होती है। सत्ता पर काबिज होने के लिए 6 से 7 सदस्यों का और जुगाड़ करना होगा। इसके लिए दूसरे दल के सदस्यों को तोडऩा होगा, यही एक विकल्प बचता है। हालांकि, अकाली दल इस गुप्त खेल को भी कैश करने में जुट गया है। नई कमेटी के बनने में कई 25 दिन का वक्त है। तब तक सभी दलों को अपने सदस्यों को बचाकर रखना बड़ी चुनौती होगी।
सुनील पाण्डेय
वरिष्ठ पत्रकार
पंजाब केसरी ग्रुप
नई दिल्ली
9953090154
Sunilpandeyvip@gmail.com
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