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इमरान खुद फंस गए धार्मिक कट्‌टरता के जाल में !

संयुक्त राष्ट्र संघ अधिवेशन के मंच के जरिए पाकिस्तान ने भारत समेत दुनिया के बड़े देशों पर लगाया था ज्यादती का आरोप। इस मंच से विश्व के मुस्लिम देशों को एकजुट करने की अपील कर मुसलमानों को बचाने का किया था आह्वान।

 वरिष्ठ पत्रकार रामानुज

लगता है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान खुद ही धार्मिक कट्टरता के जाल में फंस गए हैं । दुनिया के बड़े देशों पर पाकिस्तान पर ज्यादती का आरोप लगाने वाले इमरान की आवाज अब मद्धम पड़ गई है । विश्व में पाकिस्तान को अमन पसंद, शरीफ और आतंकवाद तथा दहशतगर्दी से जूझने वाला मुल्क बताने वाले इमरान धार्मिक कट्‌टरता के ऐसे दलदल में घिरे नजर आ रहे हैं जिससे उनका निकल पाना बहुत मुश्किल लग रहा है ।

जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के नेता और मुखर मौलाना फजलुर रहमान ने जिस तरह से देशभर के लोगों को एकत्र किया और ‘आजादी मार्च’ निकाला है । इससे पाकिस्तान में आम लोगों के बीच धार्मिक नेता मौलाना फजलुर रहमान की पहुंच और उनकी ताकत को बाखूबी समझा जा सकता है।

सबसे बड़ी धार्मिक पार्टी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई-एफ) के नेता मौलाना फजलुर रहमान अपने हजारों समर्थकों के साथ अपने पिछले माह अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से राज्य के सिंध प्रांत से इस ‘आजादी मार्च’ को निकाल इमरान खान को सत्ता छोड़ने का अल्टीमेटम दिया है ।

हजारों लोग की भीड़ इमरान से गो नियाजी, गो के नारे लगा उन्हें तत्काल सत्ता छोड़ने का फरमान सुना रही है। साथ ही मौलाना फजुलर ने चेतावनी दी है कि अगर प्रधानमंत्री इमरान खान ने ऐसा नहीं किया तो उनके लोग उन्हें सत्ता बेदखल कर देंगे । हालांकि इस्लामाबाद पहुंचने के बाद उनके दो दिन के अल्टीमेटम की अवधि रविवार को शाम समाप्त हो गई है।

पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने विश्व के बड़े देशों पर पाकिस्तान के साथ अन्याय करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि पाकिस्तान तो खुद ही आतंकवाद झेल रहा है । भारत और दुनिया के अन्य देश उस पर बेवजह आतंकवाद फैलाने का आरोप लगा रहे हैं । भारत लंबे अर्से से कश्मीर के लोगों के पर जुल्म और ज्यादती कर रहा है। अब उसने अनुच्छेद 370 और 35ए का खात्मा कर जम्मू कश्मीर को जेल खाना बना दिया है। वहां के लोगों के नवजवानों को बेवजह मारा जा रहा है। जेलों में डाला जा रहा है।

जम्मू कश्मीर पर मुंह की खा चुका है पाकिस्तान

कश्मीर के पुलवामा में सेना के काफिले पर आतंकवादी घटना को अंजाम देने के बाद भारत की ओर से सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट पर हमले से बौखलाए पाकिस्तान को तब और भी मुंह की खानी पड़ी, जब भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 और 35ए को एक झट्‌टके में समाप्त कर दिया। पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाने वाले अलगाववादी और कश्मीर के ऐसे नेता भी हाथ मलते रहे गए । घाटी में खून बहाने की धमकी देने वाले उनके आकाओं की भी हर चाल नाकाम हो गई। अब उन्हें कुछ भी सूझ नहीं रहा है।

वैश्विक मंचों पर इमरान रो चुके हैं अपना दुखड़ा

भारत सरकार के जम्मू कश्मीर पर लिए गए निर्णय के बाद से पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय, संयुक्त राष्ट्र संघ सुरक्षा परिषद तथा संयुक्त राष्ट्र संघ के सलाना अधिवेशन में जम्मू कश्मीर समेत अपने साथ ज्यादती का खूब दुखड़ा रोया लेकिन किसी भी वैश्विक मंच ने उस पर गौर नहीं किया । यहां तक कि इस बार उसके खास दोस्त चीन ने भी उसका साथ नहीं दिया । गत 10 जुलाई 2019 में चीन की राजधानी बीजिंग में बेल्ट और रोड फोरम में भी पाकिस्तान को शर्मिंदगी उठानी पड़ी जबकि भारत ने अपनी कूटनीति और अपने संबंधों से दुनिया के बड़े और मित्र देशों यहां तक कि मुस्लिम राष्ट्रों को भी अपने पक्ष में करने में कामयाब रहा। सभी ने इसे भारत का आंतरिक मामला बताया ।

धर्म के नाम पर मुस्लिम देशों को एकजुट करने की थी अपील । इमरान ने जोर देकर मुस्लिम देशों का आह्वान किया था कि सब एकजुट नहीं हुए तो दुनिया के बड़े देश मुस्लिम मुल्कों को आतंक के नाम पर बर्बाद कर देंगे। इससे हम सबको सतर्क होने की जरूरत है। इसके बाद भी मुस्लिम देश इमरान के झांसे में नहीं आए और वह अपना सा मुंह लेकर बैठ गए । भारत ने राइट टू रिप्लाई के तहत जब पाकिस्तान को इसका करारा जवाब दिया तो वह और भी तिलमिला गया । पाकिस्तान ने भी इसके तहत फिर भारत को जवाब दिया लेकिन किसी भी देश ने उसका संज्ञान नहीं लिया।

इमरान खान ने जिस मकसद यानि धर्म के नाम पर वैश्विक मंच से दुनिया के मुस्लिम देशों को एकजुट होने को कह रहे थे आज वह खुद धार्मिक कट्‌टरता के जाल में फंस गए हैं ।

अब उन्हें कुछ सूझ नहीं रहा है कि वह क्या करें, क्या न करें। कहने का मतलब वह इस दलदल में फंसते हुए दिख रहे हैं । पाकिस्तान की आजादी का मार्च निकालने वाले (जेयूआई-एफ) के नेता फजुलर रहमान इस्लामाबाद पहुंचकर इमरान को ललकार रहे हैं और उन्हें जल्द सत्ता छोड़ने की चेतावनी दे रहे हैं। धार्मिक नेताओं और विपक्ष के नेताओं के समर्थन से उनका हौसला बहुत बढ़ा हुआ है। उनके समर्थकों के हजारों की भीड़ वाला यह ‘आजादी मार्च’ अपनी योजना के साथ इस्लामाबाद में डटा हुआ है।

पाकिस्तान सरकार की हिल गई हैं चूलें

इससे पाकिस्तान सरकार की चूलें हुई हैं, वह घबराई हुई है क्योंकि मौलाना फजलुर का इमरान का पीएम पद से इस्तीफा देने का दो दिन का अल्टीमेटम रविवार शाम को समाप्त हो गया। इसको लेकर इमरान ने साफ कर दिया है कि वे इस्तीफा नहीं देंगे। कहा, भ्रष्टाचार में लिप्त लोग ऐसा करवा रहे हैं। वे किसी कीमत पर झुकने वाले नहीं हैं। इसके बाद मौलाना फजलुर ने कहा कि वे इस्लामाबाद से हटने वाले नही हैं। क्योंकि सेना के बल पर भ्रष्टाचार कर यह सरकार बनाई गई है। इसे पाकिस्तान की जनता का बहुमत नहीं है।

उन्होंने सभी विपक्षी दलों की बैठक बुलाई है। हालांकि इसमें पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के बिलावल भुट्टो जरदारी और नवाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के शहबाज शरीफ ने इसमें हिस्सा लेने से इंकार कर दिया है। इसके बावजूद भी मौलाना फजलुर ने कहा कि वे इस्लामाबाद से जाने वाले नहीं हैं। उन्होंने धमकी दी कि अगर इमरान अपना इस्तीफा नहीं देते हैं तो वे रेड जोन में भी घुसने से नहीं हिचकेंगे।

सियासी परिवार से हैं मौलाना फजुलर रहमान

पाकिस्तान में सबसे बड़ी धार्मिक पार्टी (जेयूआई-एफ) चलाने वाले मौलाना फजुलर रहमान सियासी परिवार से हैं। बड़े धार्मिक नेता होने के साथ उन्हें राजनीति में अच्छा खासा अनुभव है। उनके पिता खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के सीएम रह चुके हैं। वहां की सियासत में उनके परिवार का अच्छा दबदबा रहा है। वह पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में नेता विपक्ष भी रह चुके हैं। वे संसद में विदेश नीति पर स्टैंडिंग कमेटी के चीफ, कश्मीर कमेटी के मुखिया भी रह चुके हैं। वे पिछले साल राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की ओर से उम्मीदवार भी थे।

27 अक्टूबर को शुरू किया था आजादी मार्च

मौलाना फजलुर ने गत 27 अक्टूबर को सिंध प्रांत से आजादी मार्च अन्य विपक्षी पार्टियों के नेताओं के साथ मिलकर शुरू किया था। उन्होंने इमरान पर धांधली कर चुनाव जीतने का आरोप लगाने के साथ उन पर आर्थिक कुप्रबंधन, अकुशल एवं खराब शासन के चलते आम लोगों की जिंदगी को दुष्कर बनाने का आरोप भी लगाया है।

मुशर्रफ के विरोध में भी उठाया था झंडा

मुखर धार्मिक नेता मौलाना फजलुर ने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के खिलाफ भी विरोध के स्वर बुलंद कर चुके हैं। वर्ष 2001 में अमेरिका में हुए 9/11 के हमले के बाद जब पाकिस्तान को मजबूरन तालिबान के खिलाफ अमेरिकी ऑपरेशन में साथ होना पड़ा तो मौलाना फजलुर ने मुशर्रफ के खिलाफ मोर्चा खोला था ।

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