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“शौकिया रंगमंच करने वाला रंगकर्मी के पास इतने पैसे नहीं की महंगा हॉल का पेमेंट दे सकें”

एक दूसरे के साथ भावनाओं को शेयर करने का माध्यम है रंगमंच- प्रोफेसर सत्यव्रत रावत (प्रसिद्ध सिनोग्राफी)
प्रयागराज। शाश्वत संस्थान द्वारा विश्व रंगमंच दिवस पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी फेसबुक पर लाइव आयोजित की गई जिसमें कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर सत्यव्रत राउत’ ने की, जो इंडियन थिएटर के डायरेक्टर हैं, थिएटर एकेडमी के विभिन्न संस्थाओं से जुड़े हैं। प्रसिद्ध ‘सिनोग्राफी’ और ख्याति प्राप्त नाट्य निर्देशक है। ने कहा कि रंगमंच का उद्देश्य हमेशा से रहा कि कम्युनिटी के साथ जन्म लिया एक दूसरे के साथ भावनाओं को शेयर करने का माध्यम है रंगमंच इसके अतिरिक्त उनकी लिखी किताब सीनोग्राफी पर काफी चर्चा किया जो काफी उपयोगी पुस्तक है ।


जयवर्धन (जेपी सिंह) जी एक नाटककार है और कहते हैं कि रण की समस्याएं पहले भी थी और आज भी हैं चाहे रिहर्सल की बात करें चाहे सभागार की बात करें समस्याएं वही है शौकिया रंगमंच करने वाला रंगकर्मी के पास इतने पैसे नहीं की महंगा हॉल का पेमेंट दे सकें।
विभांशु वैभव जी एक बेहतरीन नाटककार निर्देशक और संवाद लेखन में बहुत काम किया है कहते हैं अब हमारे शेर सुनने को कोई राजी नहीं आज की नवांकुर पीढ़ी से कहना चाहते हैं कि एक नाटक करके राइटर डायरेक्टर बन जा रहे हैं जिससे रंगमंच की गुणवत्ता खत्म हो रही है पहले रंगमंच पर उन्हें बचना होगा तभी एक अच्छा भविष्य बना पाएंगे।
डॉ विधु खरे दास जी महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा में प्रदर्शनकारी कला विभाग की लेक्चरर ने कहा कि बच्चों को ट्रेंड करना भी एक बड़ी चुनौती है। रंगमंच पर यदि समर्पित है तो चुनौतियों को भी स्वीकार करना होगा।
समन्वय रंगमंडल की सचिव रंग निर्देशिका सुषमा शर्मा ने कहा कि कोरोना काल ने रंगमंच को काफी क्षति पहुंचाई है जिसकी पूर्ति करने में भी समय लगेगा।
कार्यक्रम संयोजिका ऋतंधरा मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
लाइव बहुत से रंगकर्मी जुड़े और उन्होंने प्रश्न भी किए।
ऋतंधरा मिश्रा

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