
श्री महालक्ष्मी पूजन पद्धतिः
प. पू. आचार्य श्री अमिताभ जी महाराज

जनसाधारण की नैमित्तिक- धार्मिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु प. पू. आचार्य श्री अमिताभ जी महाराज द्वारा विगत (25 वर्षों) से अपनी संस्था “डॉ देवी प्रसाद गौड़ प्राच्य विद्या अनुसंधान संस्थान” तथा “श्री कृष्ण मानव संचेतना सेवा फाउंडेशन ट्रस्ट” के तत्वावधान में “वत्स तिथि एवं पर्व निर्णय पत्र” प्रकाशित किया जा रहा है l न केवल भारतवर्ष अपितु विदेशों में भी उसका नि:शुल्क वितरण संपन्न होता है l
पंचांग प्रकाशन के कतिपय प्रारंभिक वर्षों में विशिष्ट धार्मिक पद्धतियों का क्रमबद्ध रूप से व्याख्यान किया जाता रहा है l उसी में से (सन 1999- 2000) के पंचांग में “श्री महालक्ष्मी पूजन पद्धति” या “विधि” का व्याख्यान किया गया था l घूमता आईना के इस अंक में उसी विधि का पुनः चरण बद्ध विवरण उनके द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है l
सनातन परम्परा में श्री महालक्ष्मी पूजन का विशेष विधान एवं परम्परा है। ऋद्धि-सिद्धि प्राप्ति हेतु यह अनिवार्य विधान है। विद्वतजन एवं जनसाधारण दोनों के हितार्थ में यह पूजन प्रक्रिया क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत कर रहा हूँ।
सर्व प्रथम आचमन कर श्री गणेश जी के सम्मुख हाथ जोड़कर निम्न श्लोकों से प्रार्थना करें।
सुमुखश्चैकदन्तश्च कपिलो गजकर्णकः l
लम्बोदरश्च विकटो विघ्न नाशो विनायकः ||१||
धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजाननः l द्वादशैतानि नामानि यः पठेच्छृणुयादपि २ । ।
विद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा l
संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते।।३।।
अभीप्सितार्थ सिद्धयर्थं पूजितो यह सुरासुरैः l
सर्व विघ्नहरस्तस्मै गणाधिपतये नमः ।।४।।
विनायकं गुरुं भानुं ब्रहम विष्णु-महेश्वरान् l
सरस्वतीं प्रणम्यादौ सर्वकार्यार्थसिद्धये ५ ।
इसके उपरांत अपने दाहिने हाथ में चन्दन, पुष्प, चावल, दूर्वा तथा जल लेकर संकल्प करें। तदुपरांत निम्न मंत्र से श्री गणेश जी का आवाहन करें।
ॐ गणानांत्वा गणपति (उच्चारण ग्वंग) — हवामहे
प्रियाणान्त्वा प्रियपति — हवामहे
निधीनान्त्वा निधिपति — हवामहे व्वसोमम ।।
आहमजानि गर्भधमात्वमजासि गर्भधम् ll1ll
ॐ भूर्भुवः स्वः श्री गणपतये नमः श्री गणपतिमावाहयामि स्थापयामि ॐ श्री गणपते इहागच्छ इह तिष्ठ इत्यावाह्य
ॐ मनोजूतिरिति प्रतिष्ठाप्य l
तत्पश्चात ॐ श्री गणपतये नमः इस मंत्र से समर्पयामि कहते हुये क्रमशः षोडशोपचार पूजन सम्पन्न करें।
इसका क्रम इस प्रकार है आसन (पुष्प समर्पण), पाद्य (जल समर्पण), अर्घ्य, आचमन, स्नान, पंचामृत स्नान (दुग्ध, दधि, घृत, मधु शर्करा), शुद्धोदक स्नान (शुद्ध जल), यज्ञोपवीत, आचमन, गंध (इत्र), कुंकुम (रोली), रक्त चंदन, अक्षत, पुष्प (माला), बिल्व पत्र, दूर्वा, धूप, दीप, नैवेद्य (भोग). आचमन, मोदक, पूंगीफल, तांबूल, ऋतुफल, आचमन, दक्षिणा, आरती, मंत्र पुष्पांजलि।

इस षोडशोपचार पूजन के अनन्तर श्री गणपति को प्रणाम करें व हाथ में जल लेकर यह कहे ॐ एतत्कृत यद्गणपति पूजन तेन श्री महागणपतिः प्रीयतामित्युत्सृजेत् l तदुपरांत जल भूमि पर छोड़ दें।
कलश स्थापन के अनन्तर श्री महालक्ष्मी पूजन आरंभ होगा।
सर्वप्रथम श्री महालक्ष्मी का ध्यान करें।
यासा पद्मासनस्था विपुलकटितटीपद्मपत्रायताक्षी गम्भीरावर्त्तनाभिस्तनभरनमिता शुभ्र वस्त्रोत्तरीया ।
या लक्ष्मीर्दिव्यरुपैर्मणिगणखचितैः स्नापिता हेमकुम्भः सा नित्यं पद्महस्ता मम वसतु गृहे सर्वमाङ्गल्ययुक्ता ।।१।।
इसके उपरान्त निम्न मंत्र से आवाहन करें :—-
ॐ सर्व लोकस्य जननीं शूल हस्तां त्रिलोचनाम्।
सर्वे देवमयीमीशां देवीमावाहयाम्यहम् । । २ । ।
इसके उपरान्त षोडशोपचार पूजन प्रारम्भ होता है।
ॐ तप्त कांचन वर्णाभां मुक्तामणिविराजितम् । अमलं कमलं दिव्यमासनं प्रतिगृह्यताम्।।(इत्यासनम्)
आसन (पुष्प समर्पण) प्रदान करें।
ॐ गंगादितीर्थ सम्भूते गंधपुष्पाक्षतैर्युतम्।
पाद्यं ददाम्यहं देवी गृहाणाशु नमोस्तुते।। इति (पाद्यम्) लाजा (खील), कुमकुम , चावल, पुष्प, सर्वौषधी युक्त जल इत्यादि सामग्री से पाद्यदान (जल समर्पण) करें।
अष्टगंधसमायुक्तं स्वर्णपात्रप्रपूरितम् । अर्ध्य गृहाण मद्दत्तं (मद्दत्तं) महालक्ष्मि नमोस्तु ते।।
(इत्यर्घम) (चंदन, अगर, कस्तूरी, रक्त चंदन, कुंकुम इत्यादि) अष्टगंध युक्त अर्घ पात्र से अर्घ्य प्रदान करें।
ॐ सर्वलोकस्य या शक्तिर्ब्रह्मविष्णादिभिः स्तुता ।
ददाम्याचमनं तस्यै महाकाल्यै मनोहरम्।। (इत्याचमनम्)
महाकाली को आचमन करायें।
ॐ पञ्चामृतसमायुक्तं जाहनवीसलिलं शुभं l
गृहाण विश्वजननि स्नानार्थं भक्त वत्सले ।। (इति स्नानम्) पंचामृत (दुग्ध, दधि, घृत, मधु, शर्करा) तथा शुद्ध जल से स्नान करायें।
ॐ दिव्यांबरं नूतनं हि क्षौमं त्वति मनोहरम्।
दीयमानं मया देवि गृहाण जगदम्बिके ।।
( इति वस्त्र युग्यम्)
उत्कृष्ट वस्त्र अर्पण करें।
कापिलं दधिकुन्देन्दुधवलं मधु संयुतम्।
स्वर्ण पात्र स्थितं देवि मधुपर्क गृहाण भोः ।।
(इति मधुपर्कम्)
मधुपर्क प्रदान करें।
ॐ रत्नकंकणवैदूर्यमुक्ताहारादिकानि च सुप्रसन्नेन मनसा दत्तानि स्वीकरुष्व भोः। (इत्याभरणानि )l
आभूषण अर्पण करें।
श्री खण्डागरुकर्पूरमृगनाभिसमन्वितम्।
विलेपनं गृहाणाशु नमोस्तु भक्तवत्सले ।।
चन्दन समर्पित करें।
ॐ रक्त चन्दनसम्मिश्रं पारिजातसमुद्भवम् l
मया दत्तं गृहाणाशु चन्दनगन्धसंयुतम्।।
( इति रक्त चन्दनम्) महालक्ष्मी को रक्त चन्दन अर्पित करें।
ॐ सिन्दूरं रक्तवर्ण च सिन्दूरतिलकप्रिये l
भक्त्या दत्तं मया देवि सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम् ।।
(इति सिन्दूरम्)
सिन्दूर अर्पित करें।
ॐ कुंकुमं कामदं दिव्य कुंकुमं कामरूपिणम् l अखण्डकामसौभाग्यं कुंकुमं प्रतिगृह्यताम् ll
( इति कुंकुमम्)
रोली (केशर) अर्पित करें।
ॐ तैलानिच सुगंधानि द्रव्याणि विविधानी च l
मया दत्तानि लेपार्थ गृहाण परमेश्वरी ।।
(इति सुगन्धितैलम्)
इत्र अर्पित करें।
ॐ मन्दारपारिजातादीन्पाटली केतकी तथा l
मरुवामोगरं चव गृहाणाशु नमोऽस्तु ते।।
(इति पुष्पाणि)
पुष्प (विशेषतः कमल) अर्पण करें।
ॐ विष्णवादि सर्वदेवानां प्रियां सर्वसुशोभनाम्। क्षीरसागरसंभूते दूर्वा स्वीकुरु सर्वदा ।
(इति दूर्वाः)
दूर्वा का अर्पण करें।
ॐ पद्मशंखजपापुष्पैः शतपत्रैर्विचित्रताम्। पुष्पमालां प्रयच्छामि गृहाणत्वं सुरेश्वरि ।।
(इति पुष्पमालाम्)
पुष्प माला का अर्पण करें।

अथांग पूजा :
ॐ चपलायै नमः पादौ (चरण) पूजयामि ||1||
ॐ चंचलायै नमः जानुनी पूजयामि । २ । ।
ॐ कमलायै नमः कटि पूजयामि ।।३।।
ॐ कात्यायिन्यै नमः नाभि पूजयामि ।।४।।
ॐ जगन्मात्रे नमः जठरं पूजयामि ।।५।।
ॐ विश्ववल्लभायै नमः वक्षः स्थलं पूजयामि ।। ६ ।।
ॐ कमलवासिन्यै नमः नेत्रत्रयं पूजयामि।।७।।
ॐ थियै नमः शिरः पूजयामि।।८।।
इत्यंगपूजा l
इसी पूर्वक्रमानुसार अष्ट सिद्धियों का पूजन सम्पन्न करें।
ॐ अणिम्ने नमः ||१||
ॐ महिम्ने नमः ||२||
ॐ गरिम्णे नमः ।। ३ ।।
ॐ लघिम्ने नमः ।।४।।
ॐ प्राप्त्यै नमः ।।५।।
ॐ प्राकाम्याय नमः ||६||
ॐ ईशिताय नमः ।।७।।
ॐ वशिताय नमः ।।८।।
इति अष्टसिद्धि पूजनम् ।
इसी पूर्वक्रमानुसार अष्ट लक्ष्मी पूजन होगा l
ॐ आद्यलक्ष्म्यै नमः ||१||
ॐ विद्यालक्ष्म्यै नमः ।।२।। ॐ सौभाग्य लक्ष्म्यै नमः ।।३।।
ॐ अमृतलक्ष्म्यै नमः ।।४।। ॐ कामलक्ष्म्यै नमः ।। ५ ।। ॐ सत्यलक्ष्म्यै नमः ।।६।। ॐ भोगलक्ष्म्यै नमः ।।७।। ॐ योगलक्ष्म्यै नमः ।।८।। इति ।
इसके उपरांत
ॐ वनस्पतिरसोत्पन्नो गन्धादयः सुमनोहरः l
आघ्रेयः सर्वदेवानां धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम्।।
(इति धूपं ।)
धूप-अगरबत्ती अर्पित करें।
ॐ कर्पूरवर्तिसंयुक्तं घृतयुक्तं मनोहरम्।
तमोनाशकरं दीपं गृहाण परमेश्वरि (इति दीपम्) ।।
दीपक समर्पण करें।
ॐ नैवेद्यं गृह्यतां देवि भक्ष्यभोज्यसमन्वितम्। षडरसैरन्वितं दिव्यं लक्ष्मि देवि नमोऽस्तुते।।
(इति नैवेद्यं) ।।
षड् रस भोज्य पदार्थ भोग लगायें।
शीतल निर्मलं तोयं कर्पूरेण सुवासितम्।
आचम्यतां मम जलं प्रसीद त्वं महेश्वरि।।
( इत्याचमनम्)।
कपूर से सुवासित जल से आचमन कराये।
ॐ एलालवंगकर्पूरनागपत्रादिभिर्युतम्।
पूगीफलेन संयुक्तं तांबूलं प्रतिगृह्यताम् ।।
( इति तांबूलं) ।
सुपाड़ी, इलायची, लौंग युक्त तांबूल अर्पित करें।
ॐ फलेन फलित सर्व त्रैलोक्य सचराचरम् । तस्मात्फलप्रदानेन पूर्णाः सन्तु मनोरथाः ।।
(इति फलम्) ।
ऋतु फल अर्पित करें।
ॐ हिरण्यगर्भगर्भस्थं हेमबीजं विभावसो l अनन्तपुण्यफलदमतः शांतिं प्रयच्छ में।।
(इति दक्षिणाम्)।
दक्षिणा समर्पित करें।
ॐ चक्षुदं सर्वलोकानां तिमिरस्य निवारणम् l आर्तिक्यं कल्पितं भक्त्या गृहाण परमेश्वरि ।।
( इति नीराजनम्)
आरती करें।
ॐ यानि यानि च पापानि ब्रह्महत्यासमानि च। तानितानि विनश्यन्ति प्रदक्षिणपदेपदे ।।
(इति प्रदक्षिणा) ।
प्रदक्षिणा करिये।
ॐ केतकीजातिकुसुमैर्मल्लिकामालतीभवैः l
पुष्पांजलिर्मया दत्तस्तव प्रीत्यै नमोस्तु ते।
(इति मंत्र पुष्पांजलिम्) ।
इस उपासना प्रक्रिया के अनन्तर निम्न प्रार्थना करिये।
ॐ सुरासुरेन्द्रादिकिरीटमौक्तिकैर्युक्त सदा यत्तव पादपंकजम्।
परावरंपातुवरं सुमंगलं नमामि भक्त्या तव कामसिद्धये ।।
भवानि त्वं महालक्ष्मि सर्वकामप्रदायनी l
सुपूजिता प्रसन्नास्यान्महालक्ष्म्यै नमोस्तुते ।।
नमस्ते सर्व देवानां वरदासि हरिप्रिये l
या गतिस्त्वत्प्रपन्नानां सा मे भूयात्वदर्चनात् ।।
अंततः
ॐ यान्तु देव गणाः सर्वे पूजामादाय मामकीम।
इष्टकामप्रसिध्यर्थं पुनरागमनाय च।।
॥ इति श्री महालक्ष्मी पूजनं ओम तत्सत।।
ll शुभम भवतु कल्याणम ll
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