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हेरंब चतुर्वेदी की पुस्तक ‘सुल्तान रज़िया’ पर परिचर्चा

“सुल्तान रज़िया औपनिवेशिक इतिहास दृष्टि पर गहरी चोट है’:
प्रो. प्रणय कृष्ण
उपन्यास एक काल सापेक्ष विधा है। इतिहास को उपन्यास के फार्म में लिखने पर लेखक रचनात्मक छूट लेगा ही, तभी उपन्यास संभव होगा। ‘रज़िया सुल्तान’ में लेखक प्रो. हेरंब चतुर्वेदी ने मध्यकालीन इतिहास (सल्तनत काल) को हिंदू- मुस्लिम बाइनरी में नहीं देखा है, उसे सत्ता- संबंधों के संघर्ष में देखा है। यह उनकी इतिहास दृष्टि की आधुनिकता है। यह औपनिवेशिक इतिहास दृष्टि पर गहरी चोट है। मध्यकालीन इतिहास की पेचीदगियों को समझने के लिए यह उपन्यास बहुत महत्वपूर्ण है। यह सरलीकृत इतिहासबोध को धक्का देता है। यह उपन्यास एक खूबसूरत ट्रैजेडी की तरह बुना गया है।
उक्त उद्गार प्रो. प्रणय कृष्ण ने प्रो. हेरंब चतुर्वेदी की पुस्तक ‘रज़िया सुल्तान’ पर हिंदी विभाग – इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आयोजित परिचर्चा में विशिष्ट वक्ता के रूप में बोलते हुए व्यक्त किया।
परिचर्चा के आरंभ में विभाग की ओर से प्रो. भूरेलाल ने वक्ताओं का स्वागत किया। परिचर्चा का आरंभ डॉ. अमिता शीरीं के वक्तव्य से हुआ। उन्होंने विस्तार से रज़िया के महत्व को रेखांकित किया। वह पहली शासक थी जिसे लोकतांत्रिक तरीके से सुल्तान का तख्त मिला था। इतिहास की महान नायिकाओं और नायकों के बीच रज़िया भुला दी जाती है। उसे वह सम्मान नहीं मिला, जिसकी वह हकदार थी या है। प्रो. हेरंब चतुर्वेदी की किताब इतिहास की इस भूल को सुधारने की एक महत्वपूर्ण कोशिश है।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की शोधकर्ता और समाजवादी विचारों से प्रभावित डॉ. प्रज्ञा सिंह ने लोहिया जी के सूत्र से रज़िया को देखने और समझने की कोशिश की। उन्होंने यह रेखांकित किया कि लोहिया जी द्वारा कहे गये इस वाक्य – ‘ रज़िया की हत्या रानी ने की’ का सही अर्थ इस किताब को पढ़कर ही समझा जा सकता है।
डॉ हर्षमणि सिंह ने विस्तार से इतिहास और उपन्यास के संबंध पर बातचीत करते हुए प्रो. हेरंब चतुर्वेदी की कृतियों को इतिहास और साहित्य – दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बताया।
अध्यक्षता कर रहीं विभागाध्यक्ष (हिंदी) प्रो. लालसा यादव ने रज़िया को स्त्री विमर्श की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण कृति बताया। उन्होंने कहा कि हिंदी मुहावरों के रचनात्मक प्रयोग के लिए भी यह किताब याद रखी जायेगी।
धन्यवाद ज्ञापन प्रो. संतोष भदौरिया ने किया। प्रो. हेरंब चतुर्वेदी ने सभी वक्ताओं का, वक्तव्यों के लिए आभार प्रकट किया।


संचालन/ संयोजन सूर्य नारायण ने किया।
विभाग के शिक्षकों के साथ मध्यकालीन इतिहास विभाग, राजनीति विज्ञान विभाग, ईश्वर सरन डिग्री कॉलेज, एस एस खन्ना डिग्री कॉलेज के शिक्षक और शोध छात्र उपस्थित थे।
#Suktanrazia #प्रणयकृष्ण #सुल्तानरज़िया #हेरंबचतुर्वेदी Herambchaturvedi 2026-04-28
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