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डॉ अशोक त्रिपाठी का असामयिक निधन: मीरा फाउंडेशन के सदस्यों में से थे

प्रयागराज।

साहित्य भंडार और मीरा फाउंडेशन की एक ऑनलाइन शोक सभा डॉ अशोक त्रिपाठी के असामयिक निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने हेतु सम्पन्न हुयी। इस अवसर पर उनके साहित्यिक अवदान पर चर्चा की गई।

मध्यप्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन के कार्यकारी अध्यक्ष प्रोफ़ेसर विजय अग्रवाल में उनके आत्मीय संबंधों पर बातचीत करते हुए कहा कि वह प्रगतिशील साहित्यकार बाबू केदारनाथ अग्रवाल के अत्यंत निकट रहे। उन्होंने प्रसिद्ध आलोचक डॉ रामविलास शर्मा एवं केदार बाबू के पत्रों का संपादन मित्र संवाद पुस्तक के रूप में किया था जो अत्यंत चर्चित हुई।

डॉक्टर त्रिपाठी दूरदर्शन की सेवाओं से अवकाश प्राप्त करें इलाहाबाद में निवास कर रहे थे और पिछले कई वर्षों से समसामयिक आलोचना के क्षेत्र में सक्रिय थे। वे प्रगतिशील लेखक संघ से सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे तथा मध्य प्रदेश की वैचारिक पत्रिका वसुधा के प्रारंभिक अंकों के साथ जुड़े रहे।
उनका स्मरण करते हुए डॉ अशोक त्रिपाठी के मीरा फाउंडेशन के कार्यक्रमों की भी याद की गई । डॉ आनंद श्रीवास्तव ने कहा कि डॉक्टर अशोक त्रिपाठी एक अच्छे कार्यक्रम समन्वयक भी रहे जिनकी दूरदर्शिता से मीरा फाउंडेशन के कार्यक्रम पूरे देश में चर्चित हो सके।
इलाहाबादविश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रो संतोष भदौरिया ने साहित्य भंडार के स्वर्गीय सतीश अग्रवाल से उनकेआतमीय रिश्ते को भी रेखांकित किया तथा कहा कि यह एक वज्रपात जैसा है।

श्रीमती शांति चौधरी ने कहा कि डॉ अशोक त्रिपाठी मीरा फाउंडेशन के सदस्यों में से थे और मीरा पुरस्कार संयोजन समिति के निर्विवाद सदस्य रहे ।
साहित्य भंडार के श्री विभोर अग्रवाल ने कहा कि डॉ त्रिपाठी का निधन उनकी व्यक्तिगत क्षति है। वे हमारेपरिवार के सदस्य थे जो सदैव साथ खड़े रहते थे।

परिमल प्रकाशन के श्री शिवकुमार सहाय से उनका बेहद पारिवारिक जुड़ाव था और वे बाबू केदारनाथ अग्रवाल के भी अत्यंत निकट थे।
डॉक्टर त्रिपाठी के ही प्रयासों से परिमल प्रकाशन से प्रकाशित बाबू केदारनाथ अग्रवाल का संपूर्ण साहित्य बाद में साहित्य भंडार से प्रकाशित हुआ और अभी उनकी रचनावली का भी वे संपादन कर रहे थे।
डॉ वर्षा अग्रवाल ने बताया कि
प्रख्यात आलोचक श्री रामविलास शर्मा एवं केदार बाबू के पत्रों का प्रकाशन उनके संपादन में हुआ जो मित्र संवाद नाम से 2 वॉल्यूम में प्रकाशित है। वे एक अच्छे कथाकार और आलोचक थे।
उन्होंने प्रो आशा गुप्त के साथ इलाहाबाद विश्वविद्यालय से डी फिल की उपाधि प्राप्त कीथी और बांदा में प्राध्यापक रहे। बाद में दूरदर्शन मे चयन हुआ जहां से 5 वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त होकर प्रयागराज आ गये।
मीरा स्मृति समारोह में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहा करती थी उनके सद प्रयासों से देश के ख्याति लब्धि साहित्यकार इस समारोह में आमंत्रित होते रहे ।
वे प्रगतिशील लेखक संघ के सक्रिय सदस्य थे और जन कल्याणकारी भावनाओं से सदैव जुड़े रहते थे। सर्वहारा वर्ग के हितों की चिंता में उनका सारा जीवन गुजरा।
उनके निधन से हमने एक अच्छा साथी खो दिया।
साहित्य सरोकार के संपादक श्री गोपाल रंजन ने कहा कि वे एक ऐसी साहित्यिक प्रतिभा थे जो चुपचाप काम करने में विश्वास करते थे। उनका असमय निधन साहित्य जगत की एक अपूरणीय क्षति है ।
इस अवसर पर मध्य प्रदेश के कथाकार डॉ रमाकांत श्रीवास्तव, भोपाल, गीतकार शिवकुमार अर्चन, प्रगतिशील लेखक संघ के राजेंद्र शर्मा, जनवादी लेखक संघ के श्री राजेश जोशी, डॉक्टर दिनेश कुशवाहा, डॉक्टर सेवाराम त्रिपाठी रीवा, मध्य प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष एवं देशबंधु भोपाल के संपादक श्री पलाश सुरजन, प्रख्यात साहित्यकार श्रीकृष्ण कल्पित, श्री विष्णु नागर , आदि ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।
श्री शैलेन्द्र चौहान ने कहा कि उनकी सं 1983 से मित्रता थीऔर धरती के एक अंक का मिलकर सम्पादन किया था। उनके निधन से एक मित्र खो दिया।
देशबंधु की संपादक तरुशिखा सुरजन ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

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