
‘सांस्कृतिक संचार है समाज की धुरी’
डॉ. धीरज कुमार
बरेली।
सांस्कृतिक संचार से ही समाज का विकास संभव है। डिजिटल मीडिया ने इसमें सकारात्मक भूमिका निभाई है।
ये बातें कहीं जनसंचार पत्रकारिता एवं जनसंचार में आयोजित अतिथि व्याख्यान दे रहे यह डॉ. धीरज कुमार ने। वह मिजोरम विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग में बतौर सहायक प्रोफेसर कार्यरत हैं। 23 जनवरी, सोमवार को आयोजित इस अतिथि व्याख्यान में उन्होंने पत्रकारिता एवं जनसंचार के विद्यार्थियों को सांस्कृतिक संचार के संदर्भ में महत्वपूर्ण जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि सांस्कृतिक संचार के कई चरण होते हैं। परंपराएं स्थिर किंतु संस्कृति परिवर्तनशील होती हैं। मिजोरम की संस्कृति की उत्तर भारत की संस्कृति से तुलना करते हुए उन्होंने बताया की किस प्रकार सांस्कृतिक सह अस्तित्व से भारत सांस्कृतिक एवं सामाजिक विकास में तेजी से आगे बढ़ रहा है।


डॉ. धीरज कहा की इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के आधुनिकतम रूप डिजिटल मीडिया ने सांस्कृतिक संचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने डिजिटल मीडिया के दुष्प्रभाव के बारे में भी चर्चा की।

कुलाधिपति डॉ. उमेश गौतम की प्रेरणा से अयोजित इस कार्यक्रम का प्रारंभ पत्रकारिता एवं जनसंचार संकाय की डीन प्रोफेसर शीरीन अब्बास ने अतिथि व्याख्याता का स्वागत कर किया। उन्होंने सांस्कृतिक संचार की आवश्यकता और व्याख्यान के महत्व के बारे में बताया।


विभाग के अध्यक्ष संदीप कुमार दुबे धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा की सांस्कृतिक संचार समय की आवश्यकता है और पत्रकारिता एवं जनसंचार के विद्यार्थियों को समाज की इस आवश्यकता को समझना अनिवार्य है।
कार्यक्रम के अंत में अतिथि व्याख्याता डॉ. धीरज कुमार को प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में संकाय सदस्य कविता वर्मा मेहुल मृगेंद्र सहित विभाग के समस्त विद्यार्थी मौजूद रहे।


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