बर्खास्त बीएसएफ जवान तेजबहादुर ने दी थी चुनौती
प्रयागराज।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी से निर्वाचन को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका खारिज कर दी है। याचिका वाराणसी से नरेंद्र मोदी के खिलाफ पहले निर्दलीय और फिर सपा से प्रत्याशी बनाए गए बर्खास्त बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव ने दाखिल की थी।
चुनाव याचिका खारिज करते हुए न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने कहा कि बीते लोकसभा चुनाव में वाराणसी संसदीय सीट से प्रत्याशी न होने के कारण याची तेज बहादुर यादव को चुनाव याचिका दाखिल करके प्रधानमंत्री के निर्वाचन को चुनौती देने का अधिकार नहीं है।
हाईकोर्ट ने कहा कि याची न तो नरेंद्र मोदी के निर्वाचन क्षेत्र (वाराणसी) का मतदाता है और न ही चुनाव लड़ा है। ऐसे में उनकी याचिका पोषणीय नहीं है।
यादव द्वारा दायर चुनाव याचिका पर नरेंद्र मोदी की तरफ से इसकी पोषणीयता पर सवाल उठाए गए थे, जबकि याची का कहना था कि उनको गलत प्रक्रिया अपना कर चुनाव लड़ने से रोका गया और उनका नामांकन पत्र खारिज कर दिया गया। चुनाव आयोग ने भी उसकी अपील खारिज कर दी थी।
बीएसए को अध्यापकों का वेतन रोकने का अधिकार नहीं -हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी किसी अध्यापक का वेतन नहीं रोक सकता। इसके बावजूद पूरे प्रदेश में बड़ी संख्या में बीएसए ऐसे आदेश कर रहे हैं। ऐसे आदेशों के खिलाफ याचिकाएं दाखिल हो रही हैं। कोर्ट ने सचिव बेसिक शिक्षा उप्र एवं बेसिक शिक्षा परिषद को आदेश दिया है कि वह देखें कि कानून के विपरीत बीएसए अध्यापकों के वेतन का भुगतान अवैध रूप से न रोकें।
हाईकोर्ट ने कहा कि अनिवार्य शिक्षा कानून की धारा-24 व नियम-19 का कड़ाई से पालन कराया जाए। इस धारा में अध्यापकों व बीएसए के कर्तव्य निर्धारित किए गए हैं। कोर्ट ने कानून का उल्लंघन करने वाले बीएसए व अध्यापकों की जवाबदेही तय करने का भी आदेश दिया है और सचिव को दो सप्ताह में इस आशय का निर्देश जारी करने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने सचिव बेसिक शिक्षा को प्रदेश के सभी बीएसए से हर छ: माह में अध्यापकों द्वारा कर्तव्य पालन की रिपोर्ट लेकर अनुपालन कराने के लिए कहा है। साथ ही बीएसए व अध्यापकों के कार्यों की मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया है। 18 दिसंबर को अनुपालन रिपोर्ट के साथ हलफनामा मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केशरवानी ने संतोष कुमार राय की याचिका पर दिया है।
बीएसए आजमगढ़ ने कार्य में लापरवाही करने पर याची का वेतन रोक दिया। याची सहायक अध्यापक है। उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही नहीं की गई। कोर्ट ने पूछा किस कानून से वेतन भुगतान रोका गया है। कहा गया कि पेनाल्टी के खिलाफ अपील का वैकल्पिक अधिकार प्राप्त है। फिलहाल, वेतन रोकने का आदेश वापस ले लिया गया।
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