
चार साल बाद मुठभेड़ में एक और बदमाश मारा गया
खरगापुर रेलवे क्रासिंग के पास शूटर एनकाउंटर का मामला
ए अहमद सौदागर
लखनऊ।
राजधानी लखनऊ में करीब साढ़े चार साल बाद एक बार फिर मुठभेड़ में पुलिस की गोली किसी बदमाश के सीने को भेद सकी है। इससे पहले पुलिस ने कई बार मुठभेड़ का दावा किया, लेकिन हर बार बदमाशों को पकड़ने में कामयाब रही है।
बताया जा रहा है की अजीत सिंह की हत्या के मामले नामजद होने पर गिरधारी दिल्ली की अदालत में सरेंडर किया था।
लखनऊ पुलिस उसे पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेने के लिए दिल्ली अदालत में अर्जी दाखिल की और मंजूरी मिलने के बाद लखनऊ ले आई।
पूछताछ के बाद पुलिस उसे ले जा रही थी कि वह पुलिस अभिरक्षा से भाग निकला।
विभूतिखंड में आपराधिक इतिहास वाले गिरधारी को दबोचने के पुलिस ने काफी सक्रियता दिखाई।
पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर ने बताया कि विभूतिखंड क्षेत्र स्थित खरगापुर रेलवे क्रासिंग के पास पुलिस पर हमला करके भाग निकले गिरधारी को पकड़ने के लिए इंस्पेक्टर विभूतिखंड चन्द्र शेखर के अलावा अन्य पुलिस कर्मियों को लगाया गया।
उन्होंने ने बताया कि जैसे ही पुलिस उसे पकड़ने के लिए घेराबंदी की कि वह पुलिस दल पर फायरिंग झोंकना शुरू कर दिया।
पुलिस टीम भी जवाबी फायरिंग शुरू की और गोली लगते ही गिरधारी गिर पड़ा।
पुलिस उसे घायल अवस्था में अस्पताल भेजा जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस आयुक्त अपराध नीलाब्जा चौधरी का दावा है कि गिरधारी को पकड़ने के लिए और आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया, लेकिन गिरधारी को मुठभेड़ के दौरान गोली लग गई।
राजधानी में इससे पहले दो सितंबर 2017 तत्कालीन इंस्पेक्टर सरोजनीनगर डीके शाही और इंस्पेक्टर गाजीपुर रहे गिरजा शंकर त्रिपाठी की टीम ने इनामी बदमाश सुनील शर्मा को शहीद पथ के किनारे मुठभेड़ में मार गिराया था।
आतंक का पर्याय बने पूर्वांचल गैंग की रंगदारी और ठेके पर हत्या करने वाला किला ढहा
गैंग की कमान के और भी हैं दावेदार
ए अहमद सौदागर
यूपी के आजमगढ़ जिले के अलावा वाराणसी, जौनपुर, मऊ व राजधानी लखनऊ सहित कई जिलों रंगदारी व ठेके पर हत्या का जिम्मा वाराणसी के लाखन पुर निवासी गिरधारी उर्फ डॉक्टर उर्फ कन्हैया के पास था।
आजमगढ़ निवासी कूंटू सिंह का दाहिना हाथ माने जाने वाला गिरधारी के मारे जाने के बाद गैंग की कमान संभालने के बाद निचले पायदान के शूटरों में होड़ मच गई है। हालांकि प्रबल दावेदारी जेल में बंद एक कुख्यात की मानी जा रही है।
जानकार सूत्र बताते हैं कि किसी समय में जनपद मऊ के मोहम्मदाबाद गोहना निवासी पूर्व ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह और मोहर सिंह कूंटू सिंह करीब माने जाते थे और गिरधारी उर्फ डॉक्टर भी कूंटू का बेहद वफादार था।
लेकिन आजमगढ़ जिले के जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र स्थित अमुआरी गांव निवासी पूर्व विधायक सर्वेश सिंह उर्फ सिपू की हत्या कराने के लिए कूंटू ने अजीत को दी, लेकिन अजीत सिपू सिंह की जान लेने से मना कर दिया। नतीजतन अजीत सिंह और कुंटू सिंह में ऐसी दरारें पड़ी कि एक दूसरे के दुश्मन बन गए।
वहीं अजीत सिंह के इतिहास पर नजर डालें तो इसके खिलाफ भी कई ऐसे संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज था, जिसके चलते वह जिला बदर भी किया जा चुका था।
वहीं पूर्व ब्लॉक प्रमुख अजीत सिंह हत्याकांड के मामले में आजमगढ़ जिले के जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र स्थित छपरा गांव निवासी कूंटू सिंह और अखंड प्रताप सिंह को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ करने के बाद सलाखों के पीछे भेजकर दिल्ली में सरेंडर करने वाले शूटर गिरधारी को लखनऊ की कमिश्नरेट पुलिस रिमांड पर लखनऊ लेकर आई और गहनता से पूछताछ तथा जांच-पड़ताल करने के पुलिस का एक दल भारी सुरक्षा के बीच लेकर निकली कि रविवार की देर रात खरगापुर रेलवे क्रासिंग के पास पहुंचते ही पुलिस से बचने के लिए गिरधारी पुलिस पर हमला कर पुलिस की सरकारी वाहन से कूद कर भागने लगा, लेकिन पुलिस की घेराबंदी के बाद वह पुलिस मुठभेड़ में मारा गया।
सूत्र बताते हैं कि जेल में बंद कूंटू सिंह गैंग के सदस्य गिरधारी के बाद अखंड पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं।
गैंग की कमान के और भी हैं दावेदारॽ
जानकार सूत्रों की मानें तो रविवार की रात अजीत हत्याकांड में शामिल रहा 19 आपराधिक वाले मुठभेड़ में मारे जाने वाले गिरधारी के गिरोह के अन्य सदस्यों में बौखलाहट सी मच गई है। जिसके लिए वह बड़ी घटना को अंजाम दे सकते हैं। इसकी भनक लगते ही फिलहाल कमिश्नरेट पुलिस के मुखिया पुलिस आयुक्त डीके ठाकुर भी आतंक का पर्याय बने अपराधियों को घुटने टेका ने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं।
इसकी नज़ीर तो रविवार की देर रात खरगापुर रेलवे क्रासिंग के पास देखने को मिली।
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