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महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे को गच्चा, फडणवीस फिर बने सीएम

मुम्बई ।

महाराष्ट्र की राजनीति में सत्ता का सिहासन लगातार डांवाडोल बना हुआ तो था ही, रात में अचानक सबको पटखनी देते हुए आज सवेरे सवेरे फडणवीस ने मुख्य मंत्री पद की शपथ ले ही ली। उनका साथ दिया एन सी पी के अजित पवार ने, उन्हें बनाया गया उप मुख्यमंत्री।

चुनाव पूर्व के गठबंधन के आधार पर भाजपा और शिवसेना को महाराष्ट्र की जनता ने सत्ता में वापसी का जनादेश दिया था पर नई सरकार के गठन से पहले ही शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद की मांग करके भाजपा को मुश्किल में डाल दिया था । शिवसेना 50-50 का कार्यकाल चाहती थी पर भाजपा के इनकार से शिवसेना नई चाल चलते हुये अलग वैचारिक धरातल पर राजनीति करने वाले गठबंधन के साथ सत्ता  की देहरी लाँघने की कोशिश करने लगी।

राज्यपाल ने भाजपा के इनकार के बाद शिवसेना को सरकार बनाने का आमंत्रण दिया पर समय रहते कांग्रेस और एन सी पी से समर्थन पत्र ना प्राप्त कर पाने की वजह से वह अपना दावा नही पेश कर पाई, बाद में राज्यपाल ने तीसरी बड़ी के रूप में एनसीपी को भी बुलाया पर एन सी पी के भी इनकार करने पर राज्यपाल ने प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की अनुशंशा कर दी।

तब से ही लगातार महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन को लेकर उठा पटक जारी है। इसी परिप्रेक्ष्य में मुम्बई के नेहरू सेंटर में शुक्रवार को शिवसेना, कांग्रेस और एन सी पी के नेताओं ने  बैठक करके लगभग-लगभग नई सरकार के गठन का रस्ता साफ कर लिया था।

ऐसी संभावना पूरी तरह बन चुकी थी कि रात  या कल दिन में तीनों पार्टियां जो अब से महाविकास अघाड़ी के साझे मोर्चे के रूप में अपनी पहचान दर्ज करवायेंगी प्रेस कांफ्रेस करके नई सरकार बनाने का एलान कर सकती हैं।

मुख्यमंत्री के रूप में उद्धव ठाकरे के नाम पर तीनों पार्टियों ने सहमति  भी जताई थी।

लेकिन रातों रात हुए उलटफेर बन ने शिव सेना को किंकर्तव्यविमूढ़ सा कर दिया। उनकी भारी थाली को खींच कर फडणवीस ले गए और आज सरकार बनाकर सबको चौंका दिया। इसे कहते हैं राजनीति जो क्रिकेट के छक्के के समान ही था।

वैसे यह सब किस गणित से हुआ, इसको समझने की कोशिश की जा रही है। हालांकि शरद पवार ने इस सरकार से अपने को अलग रखते हुए कहा है कि वह अजित पावर से बात करेंगे। सिर्फ कुछ ही विधायक अजित पवार के साथ हैं।

जानकारों के अनुसार अगर ऐसा कुछ हुए तो महाराष्ट्र में अजित पवार की दलबदल में जा सकती है सदस्यता!

अजित को दलबदल कराने के लिए 54 में से कम से कम 36 विधायकों को जोड़े रखना होगा।
सूत्रों के मुताबिक 30 विधायकों को साथ लेकर चलने वाले अजित पवार के साथ अब सिर्फ़ 7 विधायक रह गए हैं।
क्या वाक़ई सरकार टिकेगी? या फिर पर्दे के पीछे कुछ और ही खिचड़ी पक रही है ?

 

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