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“स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान का सदैव स्मरण करना चाहिए”

आजादी के अमृत महोत्सव पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रुप में पधारे तेजपुर केंद्रीय विश्वविद्यालय, असम, के कुलसचिव डॉ. बीरेन दास ने कहा कि हमें हमारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान का सदैव स्मरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत के राज्यों से मध्य भारत के राज्यों में स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालयों से बौद्धिक व सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी कार्यक्रम चल रहा है, जिसमें इलाहाबाद विश्वविद्यालय का पूर्वोत्तर पर्वतीय केन्द्रीय विश्वविद्यालय के साथ मिलकर कार्यक्रम करना सुनिश्चित हुआ है।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रुप में पधारे केरल निवासी एवं वर्तमान में काशी हिन्दू विश्वविधालय के पत्रकारिता विभाग के प्रो. बाला लखेंद्र ने कहा कि अमृत महोत्सव, अमृतत्व के पुनः पुनः स्मरण का भी महोत्सव है। हमें स्वतन्त्रता सेनानियों को अंडमान की जेलों में दी गई यंत्रणाओ का भी संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्यभट्ट प्रथम सैटेलाइट का सामान साइकिल, बैलगाड़ी आदि पर ले जाया गया था वहां से शुरू कर आज हम 300 से ज्यादा सेटेलाइट वाले देश बन चुके हैं। जो पूरी दुनिया को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। भारत के हर नवयुवक को इस राष्ट्रीय गति में अपनी हिस्सेदारी तय करनी होगी। उन्होंने ‘एक भारत और श्रेष्ठ भारत’ का जिक्र करते हुए कहा कि हमें अपने देश बोध वाले ग्राम गीतों और संस्कारों को भी जानना चाहिए। इस अवसर पर बोलते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के डॉ. राजेश कुमार गर्ग ने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव प्रत्येक नवयुवक के लिए राष्ट्रीय बोध एवं स्वतंत्रता बोध को आत्मसात व हृदयंगम करने का भी अवसर है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता हिन्दी विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो. कृपा शंकर पाण्डेय ने की, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुरभि त्रिपाठी जी ने किया। इस अवसर पर ड़ा. बिजय कुमार रबिदास सहित अनेक छात्र-छात्रायें उपस्थित रहे।

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