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“मेरे घर के सामने का कूड़ा कब साफ होगा?”

संस्मरण
अभी मैं अमेरिका यात्रा पर गया था। वहां मुझे मेरे मित्रों ने कैनेडी स्पेस सेंटर, नासा दिखाया। मेरे लिए यह एक बहुत ही अच्छा अवसर था। कैसे स्पेस में जाते हैं, इसकी कहानी वहां सुनने को मिली।
जब मैं लौटा वहां से और मैं अपने नाती अद्वय से बात कर रहा था, तो यहां नया कुछ ज्ञान प्राप्त हुआ। उसने मुझसे मेरा नालेज जानने के लिए पूछा, ‘नानू! एक सवाल करूं।‘
मैंने मुस्कराते हुए कहा, ‘करो बेटा, ज़्यादा मुश्किल ना करना।‘
तो उसने कहा ,’आसान है, पर आप जवाब नहीं दे पाओगे।‘


मैंने कहा, ‘अच्छा पूछो।‘ वह बोला, ‘यह बताइए कि आप भारत में पैदा हुए भारत के कहलाते हैं, जापान में पैदा हुए तो जापान के कहलाते हैं और चांद में पैदा होंगे तो चंद्रमा के कहलाएंगे, लेकिन यदि कोई बच्चा स्पेस में पैदा हो जाएं तो वह किस देश का कहलाएगा?’
प्रश्न तो उसका रोचक था, लेकिन मैं चकरा गया। इस बच्चे के मस्तिष्क में यह सवाल कैसे आ गया। क्या हम लोग रात-दिन हिंदुस्तान पाकिस्तान की बात करते रहते हैं, इसलिए; या अमेरिका इंग्लैंड जाने की बात करते रहते हैं, इसलिए। मुझे लगा उसी से ही यह प्रश्न इसके मस्तिष्क में उपजा होगा।
किन्तु मैं इस प्रश्न का क्या जवाब देता। मैंने कह दिया, ‘स्पेस में तो बेटा वह घूमता रहेगा चारों तरफ, तो उसको किसी भी देश का कह सकते हैं।‘ मुझे ऐसा लगा की गांधी जी का ‘यूनिवर्सल ब्रदरहुड’ का सपना शीघ्र ही स्पेस में ही पूरा हो सकता है। मैंने उसका नाम त्रिशंकु नगर बताया अपने नाती को, क्योंकि त्रिशंकु ही स्पेस में जाकर ठहर गया था।
अभी मैं यह सोच ही रहा था कि इस नगर की व्यवस्था कैसी होगी, तभी नाती ने एक प्रश्न और दाग़ दिया, ‘जैसे आपके घर के सामने कूड़ा पड़ा रहता है और सफाई नहीं होती, वहां भी पड़ा रहेगा, उसे कौन साफ करेगा।‘
मैंने सोचा, ’गूगल किया जाए। तभी इसका उत्तर में दे पाऊंगा।‘ फिर बात आई-गई हो गई।
और आज ‘अमर उजाला’ अख़बार के आख़िरी पन्ने पर एक खबर पर मेरी नजर पड़ी। इसमें अंतरिक्ष के कचरे को साफ करने के लिए दो एजेंसियों ने बीड़ा उठा रखा है। एक ऐस्टरोस्केल जो जापान की है, और दूसरी कंपनी क्लियर-स्पेस जो स्विट्जरलैंड में है। यह दो कंपनियां करीब 30000 वस्तुओं को स्पेस में ट्रैक करेंगे, जिसमें से लगभग 18500 सक्रिय उपग्रह है और बाकी पुराने निष्क्रिय हो चुके उपग्रह या टुकड़े। इनको साफ करने में दिक्कत यह है कि यह सारे टुकड़े या कूड़ा ७ से ८ किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से स्पेस में घूमते रहते हैं। और दिशाहीन हो छुट्टे साड़ के माफिक इधर उधर जा सकते हैं। अगर आपस में भिड़ गए, तो एक ऑर्बिट से वह दूसरे ऑर्बिट में भी जा सकते हैं। इनको पकड़ना इतना आसान नहीं होता। फिर भी ये दो कंपनियां, जो प्राइवेट कंपनियां हैं, इस कार्य को प्रारंभ करने की स्थिति में हैं। तो स्पेस से तो कूड़ा साफ हो जाएगा।
लेकिन तभी मेरे मन में एक यक्ष प्रश्न कौंध आया, ‘मेरे घर के सामने का कूड़ा कब साफ होगा, उसके लिए कौन सी विदेशी एजेंसी लगेगी।‘
कमलजीत सिंह
#कमलजीत सिंह Dr Kamaljeet Singh अमेरिका 2026-08-10
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