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गिद्धकूट..! बन सकता है अच्छा पर्यटक स्थल

गिद्धकूट चलो..
आज अपने गांव से लगे एक ऐसे स्थान की चर्चा जो अच्छा पर्यटक स्थल बन सकता है.. ये स्थल है गिद्धकूट..!
रामनगर से रीवा के रास्ते में आजू बाजू दो बड़े पहाड़ हैं अंदइला और गिधइला… इसी गिधइला पहाड़ की चोटी पर स्थित है गिद्धकूट. ये पौराणिक महत्व का धर्मस्थल है रामायण के अनुसार गृद्धराज जटायु के भाई सम्पाती का जन्म इसी पर्वत पर हुआ था। आज भी यहां बड़ी तादाद में गिद्ध पाए जाते है जबकि पूरी दुनिया में विलुप्तता की कगार पर है ..महाकवि कालिदास ने इस पर्वत का बखान अपनी रचना “गृद्धराज महात्म्य” में करा। उन्होंने कहा कि यहाँ से उत्पन्न मानसी गंगा नदी में स्नान से शुद्धि प्राप्त होती है।
. स्थानीय लोग इसे सिद्धन कहते है यानि कि सिद्ध स्थान…ये स्थान अति दुर्गम है.. यहां पहुंचने के लिए पहले पगडंडियों वाले जंगली रास्ते में चलना पड़ता है और पहाड़ की खड़ी चढ़ाई चढ़नी पडती है.. पहले बाँसों के गट्ठर बांधकर रखे जाते थे.. इनकी टहनियों के सहारे लोग चढ़ते थे.. अब लोहे की नसेनियां लगा दी गई है.. धार्मकार्यों में अग्रणी रहने वाले गुरु प्रसन्न सिंह कृष्णम भइया ने शुरुआत की थी.. बाद में कुछ और लोगों ने इस काम को आगे बढ़ाया.
[ लम्बी खड़ी चढ़ाई के बाद गिद्धकूट पहुँचते है.. जहां कई गुफाएँ हैं.. नीचे की गुफाओं में साधु संतों के रहने के स्थान है और ऊपर की गुफा में एक झरना है.. पहाड़ो के अंदर से पानी रिसकर आता है जो एक कुंड में जमा होता है.. कुंड से लगी गुफा में देवस्थान है. इस कुंड का पानी बिल्कुल गंगाजल जैसा है जो कभी खराब नहीं होता..इसी को महाकवि कालिदास ने मानसी गंगा कहा है.
[दंतकथा है कि कभी यहां सिद्ध संत सिद्धि बाबा रहते थे.. वो योगबल से रोज गंगा स्नान करने प्रयगराज जाते थे.. उनकी इस भक्ति से प्रसन्न होकर गंगा जी यहीं अवतरित हो गईं..
सिद्धबाबा को इस इलाके में ईश्वररूप माना जाता है. उनके बारे में कई कथाएं कही जाती है.. जैसे एक ग्वाला उन्हें रोज दूध पहुँचाता था.. उन्होंने उससे कहा तुम्हारा आधा दिन तो यहीं आने जने में बीत जाता है परिवार कैसे चलता होगा. उसने कहा आपकी कृपा से. सिद्धबाबा ने उसे चावल और और गेंहू के दाने दिए.. कहा अन्न में रख देना.. कभी खत्म न होगा.. उसने काम -धाम करना ही छोड़ दिया.. गांव में किसी के भी घर चोरी होती तो उस पर लांन्छन लगता कि जब कमाता नहीं तो खाता कैसे है पुलिस से पकड़वा दिया तब उसने सिद्धबाबा के दिए दानों की महिमा बताई.. इसी तरह की एक कथा है कि एक बार इलाके के गांव देउरा मोलहाई में सम्पन्न व्यक्ति के घर चोर डकैत घुस गए.. चीख पुकार मच गई.. परिवार सिद्धबाबा का भक्त था. उनसे करुण पुकार लगाई कुछ देर बाद ही जंगल से दहाड़ते दो शेर घर पहुंच गए.. डकैत भाग खडे हुए.. इसी तरह की कहानी सिद्ध बाबा के विलोप होने की भी है कहते है वो अपने भक्त के बेटे की बारात में गए थे.. यहां बारात के भोजन के समय उनके सम्मान में गारी गई गई जो बेहद फूहड थी… रहत रहे वृंदावन मां ओटत रहे भभूत.. यहां आय के निरखय लागें……… कहते हैं सिद्धबाबा इस पर क्रोधित हो गए.. रात में ही नाराज होकर चल पड़े. पीछे -पीछे उनके भक्त थे.. गिद्धकूट आने के बाद सिद्धबाबा एक गुफा के अंदर चले गए. भक्त विलाप करने लगे तो उन्होंने कहा कि वो तपस्या करने जा रहे है आत्मरूप में सदा उनके साथ रहेंगे.. सिद्धांबाबा ने गुफा के मुहने पर अंदर से एक पत्थर लगा दिया जो आज भी है और टस से मस नहीं होता.. क्षेत्र के लोगों का मानना है कि सिद्धबाबा आज भी यहां विद्यमान है और लोगों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं..
[ इस स्थान की एक और खासियत ये भी है यहां जीव अपना हिंसक स्वाभाव भूल जाते है.. गिद्धकूट की चढ़ाई. में मधु मक्खीयों के बड़े -बड़े छत्ते हैं लेकिन आज तक किसी को मधुमक्खीयों ने नहीं काटा.. लोगों की सिद्धबाबा से ऐसी आस्था है कि वो डरते भी नहीं.. एक घटना का तो मैं प्रत्यक्षदर्शी हूं..बसंत पंचमी को यहां मेला लगता है.. एक बार कुंड में स्नान के लिए धक्कामुक्की शुरू हो गई.. इसी दौरान गुफा की एक दरार से नागदेवता प्रकट हो गए.. वो फूफाकरने लगे. भीड़ शांत.. वो वही बने रहे जैसे हीं धक्कामुक्की बढ़ती वो फूफकार कर क्रॉउड़ कंट्रोल कर देते.. महिलाओं उन पर जल -अक्षत चढ़ाने लगीं.. उन्हें सिद्धबाबा का दूत मान लिया. मैं वर्षो से वहां नहीं गया.. पहले एक संत यहां रहते थे.. हम्म लोग जब भी जाते थे रात में वहीं रुकते थे. यहां देवलोक सी अनुभूति होती है..
कहते है कि रीवा के राजा मार्टण्ड देव सिंह से एक बार देवरहा बाबा ने कहा था कि मार्टण्ड हम तुम दोनों पिछले जन्म में संत थे. गिद्धकूट में साथ तपस्या की थी.. मैं फिर जोगी बन गया तुम राजा.. राजा मार्टण्ड सिंह रीवा राज्य के लक्ष्मण बाग़ ट्रस्ट से गिद्धकूट में मैहर की तर्ज पर सीढियाँ बनवाना चाहते थे लेकिन फॉरेस्ट की एनओसी नहीं मिली.. लोकल नेताओं ने कभी ध्यान हीं नहीं दिया. अब जब बाणसागर में जल पर्यटन की सुविधा के लिए सरकार काम कर रही.. वाइट टाइगर सफारी स्थापित हो चुकी..टूरिस्ट को डायवर्ट करने इस स्थान को रिलीजियस एंड इकोटुरिज्म स्पॉट के तौर पर विकसित किया जा जा सकता है.. लेकिन सवाल वही सवाल उठाये कौन??
#Giddhkoot #गिद्धकूट 2025-07-07
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