
हमीदिया गर्ल्स डिग्री कॉलेज में आज दिनांक 30.09. 2022 को पोषण माह के समापन समारोह पर राष्ट्रीय सेवा योजना, सेंटर फॉर वुमन स्टडीज एवं राजकीय यूनानी मेडिकल कॉलेज प्रयागराज के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम “पोषण और इसकी कमी से होने वाले रोग के बारे में जागरूकता” पर आधारित था।

अतिथि प्रोफेसर मोहम्मद आसिफ हुसैन उस्मानी ने यूनानी और आयुर्वेद मेडिसिन के महत्व पर प्रकाश डाला। अतिथि डॉक्टर उसामा अहमद ने कहा कि हम जो भी खा रहे हैं, उसमें न्यूट्रिशन है भी कि नहीं यह जानकारी होना हमारे लिए बहुत ही आवश्यक है। सबसे पहले उन्होंने यह कहा की यूनानी और आयुर्वेद हमारे शास्त्रों में मौजूद है। हमारे धार्मिक ग्रंथ हमें पोषण और जीवन जीने के तरीके बताते हैं, वहां कहा गया है कि हमको हर जाएज़ चीज़ खाना चाहिए, परंतु किसी भी चीज़ की अति हानिकारक है। पानी 8 से 12 गिलास प्रतिदिन पीना जरूरी है, और 8 घंटे की पूरी नींद हमारे स्वास्थ्य के लिए अति आवश्यक है। अगर इन बातों को हम अपनी जिंदगी में उतार लें तो अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने वर्तमान समय में दूध, गरममसाले, तेल,दाल, सब्जियां, आइसक्रीम, केक आदि भोज्य पदार्थ की वस्तुओं में होने वाली मिलावट और उसकी पहचान करने के विभिन्न तरीके बताएं। उन्होंने कहा कि जो भी सामान हम मार्केट से ले रहे हैं उसमें एफएसएसएआई मार्क, जो कि भारत सरकार का है उसको देखकर ही खरीदें।

प्रोफेसर निकहत सज्जाद ने कहा कि वर्तमान समय में वजन बढ़ना, कमर दर्द, पैरों में दर्द, बाल झड़ना, नींद नहीं आना, ल्योकोरिया आदि ऐसी बीमारियां हैं जिससे हर आम आदमी जूझ रहा है, यह सब हमारे दैनिक जीवन में परिवर्तन होने के कारण है, स्वस्थ जीवन जीना जरूरी है। हमें अपने आहार में सब्जी, फल, नट्स, नींबू, आंवला आदि का प्रयोग रोजाना करना चाहिए, प्रतिदिन व्यायाम करना चाहिए। व्यायाम ऐसा हो जिसमें पसीना आए।
डॉक्टर समीउल्लाह ने कहा कि इलाज कराने से पहले बीमारी का अच्छी तरह से पहचान करालें। बिना जांच के कोई भी दवा लेना हानिकारक है। आजकल शुगर की बीमारी के लक्षण का पता चलते ही लोग दवा लेना शुरू कर देते हैं। पहले अच्छी तरीके से उसकी जांच करा लें क्योंकि कभी-कभी खानपान को नियंत्रित करके भी डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है। लेकिन प्रारंभिक स्तर में ही दवा लेने के बाद फिर कुछ नहीं हो सकता। डॉक्टर रज़िया ने कहा कि पोषण माह में हमें संतुलित डाइट को जानना भी जरूरी है क्योंकि जब हमारा भोजन संतुलित होगा, तभी वह पोषण से भरपूर होगा।
उन्होंने कहा कि महिलाओं एवं पुरुषों का पोषण अलग-अलग है। 0 से 6 माह के बच्चों की न्यूट्रीशन अलग है, 6 से 12 माह के बच्चों का न्यूट्रीशन अलग है। गर्भावस्था के दौरान मां को मिलने वाला पोषक तत्व अलग होता है। आवश्यकता के अनुसार अगर पोषण नहीं मिलता तो यह हमें अनेक परेशानियों में डाल देता है। उन्होंने कहा कि हमें अपने भोजन में गुड़, चना, मखाना आदि को शामिल करना चाहिए। यदि हम संतुलित डाइट नहीं लेते हैं तो अनेक बीमारियां होती हैं। आयरन और कैल्शियम को एक साथ नहीं लेना चाहिए। कम से कम 12 घंटे का अंतराल होना चाहिए। डॉक्टर रूवैदा ने स्तनपान और इससे संबंधित विभिन्न लाभों के बारे में विस्तार पूर्वक बताया उन्होंने स्तनपान कराने के सही तरीके के बारे में भी जानकारी दी और गलत तरीका पर होने वाली अनेक बीमारियों के बारे में भी बताया। डॉक्टरों की टीम ने उपस्थित छात्राओं की विभिन्न समस्याओं से संबंधित प्रश्नों के उत्तर भी दिए।
राजकीय यूनानी मेडिकल कॉलेज की ओर से आयुर्वेदिक एवं यूनानी दवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए महाविद्यालय परिसर में एक कैंप भी लगाया गया जिसमें छात्राओं ने उपस्थित चिकित्सकों की परामर्श से दवाएं प्राप्त कीं।
कार्यक्रम प्राचार्या की शुभकामनाओं के साथ प्रारंभ हुआ।
अतिथियों का स्वागत, कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन राष्ट्रीय सेवा योजना की कार्यक्रम अधिकारी डॉ इरम फरीद उस्मानी ने किया। उपस्थित प्रवक्तागणों में डॉ नासेहा उस्मानी, डॉ नुदरत महमूद, कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती हिना फरहीन, कार्यक्रम प्रभारी श्रीमती शरमीन फातमा के साथ यूनानी मेडिकल कॉलेज से आए डॉक्टर हमज़ा, डॉक्टर मुकर्रम, डॉक्टर ज़ेबा आदि उपस्थित रहे।
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