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यूपी सरकार व एएमयू प्रशासन से जवाब तलब

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में छात्रों के साथ नृशंसता
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार व एएमयू प्रशासन से किया जवाब तलब

घायल छात्रों को सभी आवश्यक चिकित्सा और आर्थिक सहायता सुनिश्चित करने का निर्देश

विधि विशेषज्ञ जे.पी. सिंह की कलम से

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आज अलीगढ के डीएम को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) परिसर में 14 और 15 दिसम्बर को और उसके बाद हुई घटनाओं में लाठी चार्ज या किसी अन्य तरीके से घायल छात्रों और व्यक्तियों को सभी आवश्यक चिकित्सा सहायता और आर्थिक सहायता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

चीफ जस्टिस गोविंद माथुर और जस्टिस विवेक वर्मा की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार और एएमयू प्रशासन को भी नोटिस जारी किया और जवाब तलब किया है। इस मामले में अगली सुनवाई 2 जनवरी 2020 को होगी ।
याचिका में तमाम अनुतोष माँगा गया है, जिनमें कोर्ट की निगरानी में न्यायिक जाँच की मांग भी शामिल है।

याचिका में आरोप है कि 12दिसम्बर 2019 से 15दिसम्बर 2019 तक अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में राज्य पुलिस और पैरा मिलिट्री फोर्सेज ने छात्रों के साथ हिंसा और मनमानी निरोधक गिरफ्तारियां की।
याचिका में कहा गया है कि 15 दिसंबर, 2019 को पैरा मिलिट्री फोर्स और राज्य पुलिस ने बिना किसी जायज और वैध कारणों के लाठी चार्ज के साथ भारी मात्रा में टियर गैस, रबर बुलेट और पेलेट की फायरिंग की। बलों ने गेस्ट हाउस संख्या 2 और 3 में भी प्रवेश किया, जहाँ छात्र छिपे हुए थे। 

पूरी घटना सीसीटीवी में रेकार्डेड है। इस बात की आशंका है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के परिसर में हुई इस घटना के साक्ष्य से छेड़छाड़ और रिकार्डिंग मिटाई जा सकती है।

15 दिसंबर की देर शाम में, नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 के खिलाफ छात्रों के विरोध को कुचलने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों ने एएमयू के परिसर में प्रवेश किया था और आंसू गैस के गोले दागे थे। लाठीचार्ज और गोलीबारी के परिणामस्वरूप कई छात्र घायल हो गए और उन्हें अस्पतालों में भर्ती कराया गया।
छात्रों के विरोध और हिंसा के बीच, एएमयू के कुलपति ने विश्वविद्यालय को बंद करने का आदेश दिया था और छात्रों को निर्धारित शीतकालीन अवकाश से पहले हॉस्टल खाली करने के लिए कहा था।

17 दिसंबर, 2019 को, कुलपति ने एक बयान जारी किया था कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि वाहनों को नुकसान पहुंचाने सहित पुलिस की ज्यादती के आरोपों की पूरी जांच सक्षम अधिकारियों द्वारा की जाए ।

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