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50 लाख की पेन से लिखने वाले आईएएस नेतराम शिकंजे में

मायावती के खास रहे नेतराम के पास से 230 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति ज़ब्त की गयी है। नेतराम की 230 करोड़ रुपए की संपत्तियों को किया अटैच। 

 

नयी दिल्ली। बसपा सुप्रीमो मायावती के कार्यकाल के दौरान उत्तर प्रदेश के महत्वपूर्ण विभागों के सचिव रहे नेतराम पर दिल्ली बेनामी निषेध ईकाई ने शिकंजा कसते हुए 19 संपत्तियों को अटैच कर दिया है। इन संपत्तियों की कीमत 230 करोड़ रुपये बताई जाती है। ये सभी संपत्तियां दिल्ली, नोएडा, कोलकाता और मुंबई में हैैं।

आईएएस नेतराम हुई कार्रवाई के दौरान जो खुलासे हुए उन्हें देखकर सब हैरान हैं। विभिन्न स्थानों पर इतनी मात्रा में बेनामी संपत्ति होना भ्रष्टाचार के प्रत्यक्ष प्रमाण की तरह है। बसपा के शासनकाल में मायावती के सचिव रहे नेतराम की हैसियत व उनका कद इतना बड़ा था कि कैबिनेट मंत्रियों को भी उनसे पूछकर मायावती से मिलने की इजाजत मिलती थी। नेतराम उत्तर प्रदेश में आबकारी, चीनी उद्योग और गन्ना विभाग, स्टांप एवं पंजीकरण, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग जैसे प्रमुखों के पद पर रहे थे।

इससे पहले आयकर विभाग ने नेतराम के दिल्ली कोलकाता, लखनऊ समेत 12 ठिकानों पर छापे मारे थे, जिसमें करोड़ों प्रॉपर्टी का खुलासा हुआ था। रिटायर्ड़ आईएएस अधिकारी नेतराम के परिसरों पर आयकर विभाग के छापों में 1.64 करोड़ रुपये की नकदी, 50 लाख रुपये मूल्य के ‘मो ब्लां’ पेन, चार आलीशान कारें और 300 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज जब्त किये गये थे।

सूत्रों के अनुसार नेतराम लगभग 50 लाख रुपये की कीमत के पेन से फाइलों पर हस्ताक्षर करते थे।

नेतराम के पास से 230 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्ति ज़ब्त की गयी है। नेतराम 2003-05 के दौरान उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री के सचिव थे। वह उत्तर प्रदेश में आबकारी, गन्ना उद्योग विभाग, डाक एवं पंजीकरण, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभागों के प्रमुख रह चुके हैं।

इसी साल मार्च में नेतराम के घर पर आयकर विभाग ने छापेमारी की थी और तब घर से 1.64 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की गई थी. इसके अलावा छापेमारी के दौरान 50 लाख रुपये की कीमत के मोबाइल, चार कारें और 300 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज भी कब्जे में लिए गए थे।

पहले हुई छापेमारी में अधिकारियों ने कहा था कि पूर्व नौकरशाह उत्तर प्रदेश की एक पार्टी से लोकसभा चुनाव की टिकट पाने की ‘‘बातचीत’’ में लगे थे और इसीलिए वह आयकर विभाग की जांच के दायरे में आये ।

 

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