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दो दिन के “कहकशां साहित्योत्सव” का दीवाना हुआ प्रयागराज

कहकशां का दीवाना हुआ प्रयागराज

कहकशां साहित्योत्सव के पहले सत्र में यादों की गंगा जमुना में ममता कालिया ने कहकशां के विरले साहित्य समागम की तारीफ़ करते हुए संस्थापक आनंद कक्कड़ और उनकी टीम की जम कर तारीफ़ की। प्रयागराज में कुछ नया हो और ऊंचे स्तर का हो यह दुर्लभ है। ममता जी ने कुणाल सिंह को कथा कथेतर सम्मान से सम्मानित किया।

कहकशां फाउंडेशन का उमाकांत मालवीय कविता सम्मान गीतकार विनोद श्रीवास्तव को शिव ओम अंबर और ओम निश्चल ने प्रदान किया. 

देश के 12 कवियों और शायरो ने 4 घंटे का काव्यपाठ किया जिसका सैकड़ों दर्शकों ने जम कर मजा लिया। राजेश रेड्डी के इस शेर ने महफिल लूट ली….

मेरे दिल के किसी कोने में इक मासूम सा बच्चा

बड़ों की देखकर दुनिया बड़ा होने से डरता है। 

डॉ शिवबोम अंबर, ओम निश्चल, राजेश रेड्डी, प्रताप सोमवंशी, विनोद श्रीवास्तव, यश मालवीय, शाहिद अंजुम, अलोक अविरल, अंशु मालवीय, शिशिर सोमवंशी, उत्कर्ष अग्निहोत्री एवं भावना तिवारी .

अध्यक्षता: डॉ शिव ओम अम्बर

दो दिन के कहकशां साहित्योत्सव के अंतिम सत्र का शानदार समापन डॉ सोमा घोष कें गायन से हुआ। ग़ज़ल का सफ़र बेगम अख़्तर से सोमा घोष तक का संचालन कहकशां के संस्थापक व अध्यक्ष आनंद कक्कड़ ने किया। 

 हमारी अटरिया पे आजा रे सांवरिया, दीवाना बनाना है, उल्टी जो गई सब तड़बीरें, फैसले ऐसे भी होंगे इत्यादि प्रस्तुतियों के अलावा होली और कजरी के प्रस्तुतियों ने डॉ सोमा घोष को प्रयागराज के गुनी श्रोताओं का दिल जीतने में मदद की। पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित सोमा जी ने अपना सिक्का जमा दिया।

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