
प्रदर्शनी में प्रकृति व कृषि

डॉ दिलीप अग्निहोत्री

भारतीय चिंतन में प्रकृति को दिव्य रूप में चित्रित किया गया। इसके संरक्षण व संवर्धन के सन्देश दिया गया। इस चिंतन में उपभोगवाद नहीं था। प्रकृति पर आधारित अनेक पर्व समाज जीवन में शामिल हुए। बसंत अपने में प्रकृति के सौंदर्य बोध की अनुभूति कराता है। इसी की आहट के बीच लखनऊ राजभवन में पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राजभवन में प्रादेशिक फल,शाकभाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल भी उपस्थित थीं। फल शाकभाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी की स्मारिका का विमोचन भी किया।


योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने दो हजार बाइस तक किसानों की आय दोगुना करने के संकल्प लिया है।

इसको साकार करने में औद्यानिक फसलों की बड़ी भूमिका है। परम्परागत फसलों के मुकाबले आधुनिक फसलें उगाकर किसान अपनी आय तेजी से बढ़ा सकते हैं। पाॅली हाउस का उपयोग करके प्रत्येक मौसम की फसलें उगाना संभव हुआ है। आधुनिक तकनीक व साधनों का उपयोग से कृषि आय बढाई जा सकती है। समाज के अन्य लोगों को भी प्रकृति के निकट रहने का प्रयास करना चाहिए। इससे मानसिक शांति मिलती है। तनाव और अवसाद से मुक्ति मिलती है। किसानों की आय वृद्धि व प्रकृति के प्रति आमजन की रुचि जागृत करने के दृष्टिगत प्रदर्शनी का आयोजन सराहनीय है।
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