
बच्चों में पुस्तक पढ़ने की आदत डालें- रामधनी द्विवेदी
प्रयागराज।
“आजकल लोगों में पुस्तक पढ़ने की प्रवृत्ति कम होती जा रही है। हमें अपने बच्चों में पुस्तकें पढ़ने की आदत डालनी होगी। उन्हें उनकी किसी सफलता पर या जन्म दिन पर अन्य गिफ्ट की जगह पुस्तकें देनी चाहिए। खुद पुस्तकें पढ़ें। बच्चों से पुस्तकों पर चर्चा करें और घर में एक जगह पुस्तकों की भी सुनिश्चित करें।। पुस्तकें हमें सही मायने में इंसान बनाती हैं। हम अपने कार्यक्षेत्र में चाहे जितने आगे हो जांए लेकिन हम अच्छे इंसान तब होंगें जब अच्छी किताबें पढ़ेंगे। क्योंकि किताबों में जो लिखा होता है, वह हमारे मन को प्रभावित करता है।”

ये विचार रविवार को इलाहाबाद के होटल आर्चड वन में लोकरंजन प्रकाशन द्वारा आयोजित पुस्तक विमोचन और लेखक सम्मान में वरिष्ठ पत्रकार रामधनी द्विवेदी ने व्यक्त किए। उनकी पुस्तक “ तिनका तिनका यादें “ भी लोकरंजन ने प्रकाशित की हैं। उन्हें इसके लिए सम्मानित भी किया गया। इसके अतिरिक्त 12 अन्य रचनाकारों को भी सम्मानित किया गया। यह पहली बार था कि किसी प्रकाशक ने लेखकों को इस तरह सम्मानित किया और उन्हें रायल्टी के नकद पैसे भी दिए।
इस अवसर सभी रचनाकारों ने अपनी पुस्तक की रचना प्रक्रिया पर भी चर्चा की। लोकरंजन प्रकाशन ने इस अवसर पर पुस्तकों का विक्री स्टॉल भी लगाया था जहां लोगों ने खूब खरीददारी की। सम्मान और विमाचन कार्यक्रम एक अच्छे बौद्धिक विमर्श में बदल गया।

श्री द्विवेदी ने कहा कि पुस्तकों के प्रति लगाव एक आदत है। बचपन से जब बच्चों में यह आदत डाली जाएगी तो आगे चलकर भी वे पुस्तक प्रेमी बने रहेंगे। उन्होंने हाल के महीने में प्रकाशित कुछ पुस्तकों की रचना प्रक्रिया की भी चर्चा की और इस पर दुख व्यक्त किया कि हिंदी में अच्छी रचनाएं कुछ कम आ रही हैं। इसीलिए दिल्ली में आयोजित विश्व पुस्तक मेले में अंग्रेजी के स्टॉलों पर तो भीड़ लगी थी लेकिन हिंदी के प्रकाशक हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। हिंदी की कुछ ही पुस्तकें चर्चा में रहीं।
इस अवसर पर रंजन पांडेय का पार्क की वह शाम शीर्षक उपन्यास और शिवानी चंद्रा की संस्मरणों की पुस्तक मिडिल रोड का विमोचन भी हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ग्वालियर भारतीय सूचना एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक डा एसएन सिंह थे। उन्होंने कहा कि साहित्य जहां समाज को दिशा दे सकता है, वहीं तकनीक का उपयोग समाज की स्थिति को बदल सकता है।

रंगमंच के निदेशक और अभिनेता डा अशोक शुक्ल ने कहा कि आज अच्छे नाटक नहीं लिखे जा रहे हैं, इसलिए नाटक लेखन की विधा पर भी काम करना चाहिए। कार्यक्रम का बहुत ही सुंदर संचालन रंजन पांडेय ने किया।
डा आदित्य कुमार सिंह ने लोकरंजन प्रकाशन की यात्रा पर प्रकाश डाला और आगे की योजना बनाई। लोकरंजन प्रकाशन की किताबों की साजसज्जा तो अच्छी होती ही है, उसमें प्रूफ आदि वर्तनी की गलतियां नहीं के बराबर होती हैं। इस कार्यक्रम में देश के बड़े होम्योपैथ डाक्टरों में एक डा एसएम सिंह भी उपस्थित थे।
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