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“भारत–सूरीनाम के बीच मित्रता पहले से मौजूद है”

भारत–सूरीनाम संबंधों को ऐतिहासिक मित्रता से रणनीतिक साझेदारी तक ले जाने का समय: राशिद डोखी

राष्ट्रपति सलाहकार बोले—संस्थागत सहयोग, निवेश और साझा विकास के नए अध्याय की जरूरत
लेखक: डी. पी. मिश्र

नई दिल्ली।

सूरीनाम के राष्ट्रपति सलाहकार और वरिष्ठ राजनेता राशिद डोखी का मानना है कि भारत और सूरीनाम के बीच दशकों पुरानी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक निकटता को अब ठोस आर्थिक सहयोग, संस्थागत साझेदारी और दीर्घकालिक निवेश में बदलने का समय आ गया है। उनका कहना है कि दोनों देशों के संबंध केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि साझा विकास के मजबूत आधार बन सकते हैं।
एमएनजे नेटवर्क्स को दिए एक विशेष साक्षात्कार में डोखी ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध सूरीनाम के सामने सबसे बड़ी आवश्यकता प्रभावी प्रबंधन, मजबूत संस्थानों और तकनीकी विशेषज्ञता की है। भारत इन क्षेत्रों में एक भरोसेमंद साझेदार की भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने भारत को सूरीनाम का “बड़ा भाई” बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों को अब व्यापार, निवेश, तकनीक और संस्थागत सहयोग के माध्यम से नई दिशा दी जानी चाहिए।
डोखी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मई 2026 में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की सूरीनाम यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को नई गति प्रदान की। उन्होंने इसे भारत की ओर से सूरीनाम के प्रति बढ़ती प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।
राष्ट्रपति जेनिफर गीरलिंग्स-साइमन्स के नेतृत्व पर विश्वास जताते हुए डोखी ने कहा कि उनकी सरकार देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने, सार्वजनिक संस्थाओं को मजबूत बनाने तथा निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पुनर्निर्माण एक लंबी प्रक्रिया है और इसमें भारत, अंतरराष्ट्रीय साझेदारों तथा वैश्विक भारतीय समुदाय का सहयोग महत्वपूर्ण होगा।
डोखी ने कहा कि सूरीनाम में खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही सरकार विदेशी निवेश आकर्षित करने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने पर भी ध्यान दे रही है।
उन्होंने भारतीय कंपनियों को सूरीनाम में निवेश का आमंत्रण देते हुए कहा कि कैरिकॉम (CARICOM) की सदस्यता के कारण सूरीनाम कैरेबियाई क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बन सकता है। भारतीय उद्योगों के लिए यह पूरे कैरेबियाई बाजार तक पहुंच का प्रभावी मंच साबित हो सकता है।
डोखी ने वैश्विक भारतीय प्रवासी समुदाय की भूमिका पर भी जोर देते हुए कहा कि उनका अनुभव, निवेश और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क सूरीनाम के विकास को गति देने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
भारत के प्रति अपने व्यक्तिगत लगाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वे वर्ष 2000 में पहली बार भारत आए थे और 2003 में प्रवासी भारतीय दिवस में भी शामिल हुए। भारतीय भोजन, विशेषकर नान, तथा हिंदी फिल्म संगीत के प्रति अपने प्रेम का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी महान पार्श्वगायक महेंद्र कपूर के साथ सूरीनाम में मंच भी साझा किया था।
पूर्व राजनीतिक विवादों पर टिप्पणी से बचते हुए डोखी ने कहा कि अब ध्यान अतीत पर नहीं, बल्कि सूरीनाम के भविष्य और जनता के हितों पर होना चाहिए।
उन्होंने कहा, “भारत और सूरीनाम के बीच मित्रता पहले से मौजूद है। अब समय आ गया है कि इस सद्भावना को ठोस परियोजनाओं, निवेश और ऐसे अवसरों में बदला जाए, जिनसे दोनों देशों को समान रूप से लाभ मिले।”

दिल्ली ब्यूरो: वीरेंद्र मिश्र

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